Emergency Alert System: UK से पहले यह किन देशों में लागू है और इसका विरोध क्यों हो रहा है? जानिए
यूके में मोबाइल फोन पर इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम लागू की जा रही है। इससे किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तुरंत चेतावनी दी जा सकती है। कुछ देशों में यह पहले ही है। लेकिन, यूके में इसका विरोध भी हो रहा है।

यूनाइटेड किंगडम रविवार को इमरजेंसी अलर्ट सर्विस का पहली बार टेस्ट करने जा रहा है। इस दौरान लाखों मोबाइल फोन में एकसाथ तेज आवाज के साथ अलार्म बजेगा या वाइब्रेशन शुरू हो जाएगा। इस टेस्ट के लिए स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर बाद 3 बजे का समय निर्धारित किया गया है।

नुकसान को कम करने के लिए अलर्ट
मोबाइल फोन से इमरजेंसी अलर्ट देने की सोचने वाला यूके दुनिया का पहला देश नहीं है। दुनिया के कुछ देशों में यह व्यवस्था पहले से ही है। यह सेवा किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तत्काल अलर्ट करने के लिए होती है, जिससे जिंदगी को होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

इमरजेंसी अलर्ट में आएगा संदेश
यूके में लोगों के पास इस ट्रायल रन के दौरान मोबाइल पर एक संदेश आएगा, जिसमें कहा जाएगा, 'यह एक इमरजेंसी अलर्ट का टेस्ट है, यूके सरकार की एक नई सेवा, जो जानलेवा खतरे के दौरान आपको चेतावनी देगा।' हालांकि, परीक्षण से पहले इसका विरोध भी शुरू हो चुका है।

यूके से पहले किन देशों में लागू है?
कनाडा, जापान, नीदरलैंड और अमेरिका जैसे देशों में यह व्यवस्था पहले से ही चल रही है। इसके माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में लोगों को समय रहते अलर्ट करना आसान हो जाता है, जिससे जानमाल की क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

फोन साइलेंट रहने पर भी बजेगा अलार्म
यूनाइटेड किंगडम सरकार और वहां आपात सेवाओं से जुड़ी एजेंसियों को उम्मीद है कि नए सिस्टम के चालू हो जाने पर बाढ़ या आग जैसी आपात स्थिति में लोगों को तत्काल अलर्ट करने में आसानी रहेगी। यह मात्र 10 सेकंड का अलार्म होगा, जो फोन के साइलेंट रहने पर भी बजेगा।

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'लोगों को सुरक्षित रखना सरकार का पहला काम'
न्यूज एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के डिप्टी पीएम ओलिवर डाउडेन ने नए अलर्ट सिस्टम के बारे में कहा है कि 'सरकार का पहला काम लोगों को सुरक्षित रखना है और यह आपात स्थिति के लिए मौजूद टूलकिट में एक और विकल्प है।'
इसका विरोध क्यों हो रहा है?
हालांकि, इरादे जितने भी नेक हों, लेकिन इसका भी विरोध शुरू हो गया है। कंजर्वेटिव नेता और पूर्व मंत्री जैकब रीस-मोग ने तो लोगों से यहां तक कह दिया है कि 'अनावश्यक और दखल देने वाले अलर्ट को स्विच ऑफ कर दें।' वहीं डेली मेल की स्तंभकार और मंत्री माइकल गोव की पूर्व पत्नी सारा वाइन ने इसे 'भयानक' कहा है। क्योंकि, इनके मुताबिक यह जापानी तकनीक की घुसपैठ की तरह है।

जापानी कंपनी को ठेगा देने की वजह से भी विरोध
ब्रिटिश सांसद इस सिस्टम की आलोचना इस वजह से भी कर रहे हैं कि इसके लिए लुभावना आईटी ठेका जापानी कंपनी Fujitsu को देने का फैसला हुआ है। इस कंपनी को पोस्ट ऑफिस सिस्टम में खराब सॉफ्टवेयर लगाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है, जिसके चलते कई कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
'यह एक सकारात्मक पहल है'
लेकिन, प्लायमाउथ यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर और अलार्म सिस्टम की अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट जूडी एडवर्थी के मुताबिक यह एक सकारात्मक पहल है, चाहे पहली बार इसकी वजह से लोग चौंक जाएं। उन्होंने कहा है कि 'यदि यह अलार्म लोगों को अपने फोन की ओर देखने के लिए प्रेरित करता है और वे संदेश पढ़ते हैं और फिर उसके अनुसार काम करते हैं तो यह कहा जा सकता है कि यह काम कर गया है।' (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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