चीन से भागकर भारत में घुसे उइगर मुस्लिमों को किया जा सकता है डिपोर्ट, कश्मीर में पकडे़ गये थे तीनों भाई
शिनजिंयाग प्रांत में चीन ने विशाल डिटेंशन सेंटर्स बना रखे हैं, जहां आतंकवाद के आरोप में उन्हें पकड़कर रखा जाता है और फिर उन्हें टॉर्चर किया जाता है।

Uighur arrested in india: अगस्त 2013 कश्मीर की घाटियों में गिरफ्तार किए गये तीन उइगर मुस्लिमों को भारत सरकार वापस चीन डिपोर्ट कर सकती है।
कश्मीर के उत्तर-पूर्व में आखिरी बसी हुई घाटियों में से एक नुब्रा में चीन से भागकर भारत में घुसे इन तीन उइगर मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया था।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के अधिकारी, प्रमानंद झा ने गिरफ्तारी के करीब 2 महीने बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस को एक चिट्ठी लिखकर 'चीनी घुसपैठियों' के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को कहा था। ये तीनों उइगर नागरिक ITBP की हिरासत में थे।
ITBP अधिकार प्रमानंद झा की चिट्ठी में कहा गया है, कि "चीनी नागरिकों को भारतीय सेना ने 12 जून 2013 की शाम को भारत-चीन सीमा के पास सुल्तानचुस्कु क्षेत्र के पास से पकड़ा था। जिसके बाद तीनों को अगले दिन आईटीबीपी को सौंप दिया गया था"।
प्रमानंद झा ने अपने पत्र में कहा है, कि उनकी पूछताछ में तीनों उइगर घुसपैठियों ने अपना नाम, आदिल, अब्दुल खालिक और सलामू बताया। इन तीनों की उम्र 20 से 23 वर्ष की आयु के आसपास है और ये तीनों भाई हैं, जो चीन के पूर्वी स्वायत्त क्षेत्र शिनजियांग क्षेत्र के रहने वाले हैं।
दो महीने की पूछताछ में, ITBP को तीनों उइगर घुसपैठियों के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला, सिवाय इसके कि वे अवैध रूप से भारतीय क्षेत्र में चले गए थे।
वापस भेजे जाएंगे चीन!
सितंबर 2013 में जब पुलिस ने उन्हें एक अदालत में पेश किया, तो उन्होंने कहा, कि वे स्थानीय भाषाओं को नहीं समझते हैं। लद्दाख के मुख्य शहर लेह की एक जेल में 10 महीने बिताने के बाद, जहां भाई-बहनों ने कुछ उर्दू और लद्दाखी भाषाएँ सीखीं, उन्होंने अदालत के सामने कबूल किया, कि वे "बिना किसी यात्रा दस्तावेज के भारत चले गए और उनके पास चाकू और नक्शे थे, जब भारतीय सेना ने उन्हें पकड़ा था।"
अदालत ने 22 जुलाई 2014 को उन्हें घुसपैठ के तीन मामलों में दोषी पाया और उन्हें 18 महीने की कैद की सजा सुनाई। हालांकि, पिछले 10 सालों से ये तीनों जेल में ही बंद हैं और इन्हें समय समय पर कश्मीर के अलग अलग जेलों में ट्रांसफर किया जाता रहा है।
लेकिन वे कौन हैं और वे सीमा पार करके भारत क्यों आए?
उइगर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले इन तीनों भाइयों का कहना है, कि वे शिनजियांग के कारगिलिक के निवासी हैं, जहां से वे चीनी अधिकारियों के उत्पीड़न का सामना करने के बाद किसी तरह भागने में कामयाब हो गये थे।
चीन पर उइगरों के खिलाफ गंभीर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप है, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, शिनजियांग में कम से कम दस लाख उइगरों को "उग्रवाद विरोधी केंद्रों" में रखा गया है, जो कश्मीर के साथ सीमा साझा करता है। इन तीनों उइगर मुस्लिमों ने अपने वकील मुहम्मद शफी लस्सू को बताया, कि उनके कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों को हिरासत केंद्र में रखा गया था, जिसके बाद उन्होंने चीन से भागने का फैसला किया।
वकील मुहम्मद शफी लस्सू ने अलजजीरा को बताया, कि इन तीनों ने उन्हें बताया, कि चीन के अंदर उन्हें भी डर था, कि उन्हें भी डिटेंशन सेंटर में डाला जा सकता है और इसीलिए उन्होंने भागने की कोशिश की। तीनों भाइयों ने लस्सू को बताया, कि वे अंतरराष्ट्रीय सीमा नियमों से अनजान थे और उन्हें पता नहीं चल पाया, कि वो भारत में आ गये हैं।
24 दिसंबर 2022 को जारी अंतिम सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) आदेश में कहा गया है, कि तीनों बंदियों को उनके मूल देश भेज दिया जाना चाहिए।
आपको बता दें, कि अतीत में कश्मीर क्षेत्र प्रसिद्ध रेशम मार्ग पर पड़ता था और व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से मध्य एशिया के साथ घनिष्ठ संबंध साझा करता था। वर्तमान समय का शिनजियांग क्षेत्र, जिसे चीन ने नाम मात्र की स्वायत्तत प्रदान कर रखी है, इस क्षेत्र के व्यापारी खतरनाक पहाड़ी दर्रों से गुजरते हुए हिमालयी क्षेत्र में आते-जाते थे। वर्तमान में, इस क्षेत्र में लगभग 30 उइगर परिवार हैं, जो ज्यादातर लद्दाख और कश्मीर घाटी में रहते हैं।
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वहीं, चीन में खतरनाक टॉर्चर का हवाला देते हुए इन तीनों ने भारतीय गृहमंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने गुहार लगाई है, कि उन्हें निर्वासित नहीं किया जाए और जबतक उन्हें किसी और देश में शरण नहीं मिल जाती है, तब तक भारत में ही रहने दिया जाए। हालांकि, अभी तक भारतीय गृहमंत्रालय की तरफ से उनकी अपील पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।












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