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UAE ने फ्रांस से रिकॉर्ड 80 राफेल जेट खरीदे, विशालकाय समझौते से खाड़ी देशों में बिगड़ेगा शक्ति संतुलन?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उस वक्त खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जब अरब देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका की 'अनिश्चितता' को लेकर आवाज उठाई है।

अबू धाबी, दिसंबर 04: खाड़ी देशों में फ्रांस ने विशालकाय रक्षा समझौता किया है और संयुक्त अरब अमीरात के साथ 19 अरब डॉलर का रक्षा समझौता किया है। जिसके तहत यूएई ने फ्रांस से 80 राफेल लड़ाकू विमान और 12 सैन्य हेलीकॉप्टर खरीदने का फैसला किया है। फ्रांस और यूएई के बीच राफेल विमान को लेकर हुआ ये सबसे बड़ा सौदा है और ये सौदा उस वक्त किया गया है, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दो दिवसीय यूएई के दौरे पर हैं।

फ्रांस-यूएई राफेल सौदा

फ्रांस-यूएई राफेल सौदा

फ्रांस और यूएई के बीच राफेल जेट की अब तक की सबसे बड़ी विदेशी बिक्री को शुक्रवार को सील कर दिया गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति दो दिवसीय खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जहां वो यूएई के साथ साथ कतर और सऊदी अरब का भी दौरा भी कर रहे हैं। मैक्रों और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (एमबीजेड) द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने एक बयान में कहा कि, "यह अनुबंध एक तरफ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है जो पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और दूसरी तरफ क्षेत्रीय स्थिरता को बनाने में योगदान देता है।"

अमेरिका को दरकिनार?

अमेरिका को दरकिनार?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उस वक्त खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जब अरब देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका की 'अनिश्चितता' को लेकर आवाज उठाई है। जिसमें कहा गया है कि, अमेरिका खाड़ी देशों के साथ हथियार सौदे में सावधानी बरत रहा है। जबकि, खाड़ी देश अपने सबसे प्रमुख रक्षा सहयोगी संयुक्त राज्य अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा हथियार चाहते हैं। आपको बता दें कि, पिछले कुछ सालों से फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात के बीच के संबंध काफी गहरे हुए हैं और फ्रांसीसी नेता और यूएई राजपरिवार काफी करीब आए हैं और दोनों देशों के बीच निवेश भी काफी बढ़ा है।

फ्रांस में 7 हजार नौकरी

फ्रांस में 7 हजार नौकरी

फ्रांस के एक अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि, यूएई के साथ हुए समझौते से फ्रांस में 7 हजार नई नौकरियां विकसित होंगी और साल 2031 तक फ्रांस सभी राफेल विमानों की डिलीवरी संयुक्त अरब अमीरात को करेगा। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांसीसी अधिकारी ने ये भी कहा कि, संयुक्त अरब अमीरात के साथ ये समझौता इस साल ग्रीस, मिस्र और क्रोएशिया में हुए सौदों के तहत है और करार के तहत फ्रांस हर महीने राफेल विमान का उत्पादन करेगा। यूएई के साथ समझौता होते ही राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन एसए के शेयरों में 9 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।

फ्रांस-यूएई समझौता

फ्रांस-यूएई समझौता

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वक्त फ्रांस एफ-4 राफेल मॉडेल का प्रोडक्शन कर रहा है, जिसकी सप्लाई यूएई को साल 2027 में की जाएगी। फ्रांस के साथ राफेल विमान का बेहद अहम करार कर संयुक्त अरब अमीरात ने खाड़ी देश के अपने अहम प्रतिद्वंदी देश कतर की चुनौती को खत्म कर दिया है, जिसने फ्रांस से ही 36 राफेल विमान खरीदे हैं और अब यूएई ने फ्रांस से 80 राफेल विमानों का सौदा किया है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच राफेल विमान के लिए इस समझौता के होने में 10 साल से ज्यादा का वक्त लगा है। इससे पहले यूएई ने साल 2011 में 60 राफेल जेट्स की आपूर्ति के लिए फ्रांस के प्रस्ताव को "अप्रतिस्पर्धी और अव्यवहारिक" के रूप में सार्वजनिक रूप से ठुकरा दिया था। अबू धाबी के पास पहले से ही फ्रांस निर्मित मिराज 2000 युद्धक विमान हैं।

मिराज की जगह लेगा राफेल विमान

मिराज की जगह लेगा राफेल विमान

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा सूत्रों ने कहा कि राफेल विमान, मिराज 2000 बेड़े की जगह लेगा, लेकिन अमेरिकी निर्मित एफ-35 को विस्थापित करने की संभावना नहीं है। क्योंकि यूएई दो मुख्य आपूर्तिकर्ताओं, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपनी सुरक्षा को बरकरार रखता है। इस सौदे को फिर भी अधीरता के संकेत के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस चीन के साथ संयुक्त अरब अमीरात के संबंधों के बारे में चिंताओं के बीच एफ-35 सौदे को मंजूरी देने से हिचकिचाती है, जिसमें देश में Huawei 5G तकनीक का प्रचलन भी शामिल है। इसके साथ ही यूएई ने 12 काराकल हेलीकॉप्टरों का भी ऑर्डर दिया है। यह सुपर प्यूमा के बहु-भूमिका निभाने वाले सैन्य संस्करण एच225एम के लिए फ्रेंच कोड नाम है।

हथियारों का मुख्य आपूर्तिकर्ता है फ्रांस

हथियारों का मुख्य आपूर्तिकर्ता है फ्रांस

फ्रांस के संयुक्त अरब अमीरात के साथ गहरे संबंध हैं और वह हथियारों के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं में से एक है, लेकिन सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन और यमन में ईरान-गठबंधन हौथी विद्रोहियों के बीच संघर्ष के कारण इसे अपनी बिक्री की समीक्षा करने के लिए बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ा है। जो दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकटों में से एक बन गया है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने एक बयान में कहा कि, "यूएई द्वारा यमन में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के नेतृत्व में अत्याचार से प्रभावित सैन्य अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाने के बावजूद फ्रांस इन बिक्री के साथ आगे बढ़ रहा है।"

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