पाकिस्तान के दामन में लगी 'शरिया कानून' की आग, तहरीक-ए-तालिबान ने दो जवानों की ली जान

बाजौर जिला उन इलाकों में से आता है, जहां कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है और ना ही कोई सरकार है। ये इलाका पिछले कई सालों से आतंकियों के लिए शरणस्थली रही है।

इस्लामाबाद/काबुल, अगस्त 30: अफगानिस्तान में इस्लामिक चरमपंथ की आग को हवा देने वाले इमरान खान अब खुद अपनी लगाई आग में झुलसने लगे हैं। काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान को इस्लामिक अमीरात बनाने की घोषणा कर दी है, लेकिन तहरीक-ए-तालिबान, जिसे पाकिस्तान तालिबान भी कहते हैं, उसने अब पाकिस्तान में खूनी खेल खेलना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान सेना ने पुष्टि कर दी है कि उसके दो सैनिकों को अफगानिस्तान बॉर्डर पर मौत के घाट उतार दिया गया है।

दो पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या

दो पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या

अफगानिस्तान सीमा से पाकिस्तान में आतंकी दाखिल ना हो, इसके लिए पाकिस्तान की इमरान सरकार ने डूरंड रेखा पर तारबंदी शुरू कर दी थी और बड़े हिस्से में तारबंदी का काम पूरा भी कर लिया गया है, लेकिन अफगानिस्तान बॉर्डर से बड़ी संख्या में आतंकियों की घुसपैठ पाकिस्तान में शुरू हो चुकी है। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये आतंकी तहरी-ए-तालिबान-पाकिस्तान के हैं, लेकिन तहरीक-ए-तालिबान की मांग रही है कि उसके लड़ाके पाकिस्तान में बंदूक के दम पर शरिया कानून लागू करना चाहते हैं और पाकिस्तान को इस्लामिक अमीरात बनाया जाएगा। पाकिस्तान को उस वक्त बड़ा झटका लगा है, जब 2 दिन पहले अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह ने साफ तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह दिया है कि पाकिस्तान तालिबान को रोकने का काम अफगान तालिबान का नहीं है, पाकिस्तान के धार्मिक नेता पाकिस्तान तालिबान से बात करे।

अफगान बॉर्डर से हमला

अफगान बॉर्डर से हमला

पाकिस्तान सेना ने दावा किया है कि अफगानिस्तान बॉर्डर की तरफ से करीब 3 से चार लोगों ने पाकिस्तानी सैनिकों पर हमला किया था, जिसमें पाकिस्तानी सेना के दो जवान मारे गये हैं। वहीं, सभी हमलावरों को मार गिराया गया है। लेकिन, अलजजीरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर हालात काफी ज्यादा खराब हैं और हजारों की संख्या में लोग वहां मौजूद हैं, जो अफगानिस्तान छोड़ना चाहते हैं। अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर असल हालात क्या हैं, इसका ठीक-ठीक अंदाजा इसलिए नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि वो पूरा इलाका कबीलों का इलाका है और वहां जर्नलिस्ट भी नहीं जाते है। अलजजीरा ने अफगान-पाकिस्तान सीमा पर स्थित बाजौर जिले की स्थिति को काफी खराब बताया है और कहा है कि कितने लोगों ने पाकिस्तानी सेना पर हमला किया है, इसे सत्यापित नहीं किया जा सकता है।

अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर का हाल

अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर का हाल

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबित, बाजौर जिला उन इलाकों में से आता है, जहां कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है और ना ही कोई सरकार है। ये इलाका पिछले कई सालों से आतंकियों के लिए शरणस्थली रही है। खासकर पाकिस्तान-तालिबान के आतंकी यहीं पर रहते हैं और अकसर पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाते रहते हैं और अब जब तालिबान ने 2300 से ज्यादा पाकिस्तान तालिबान के लड़ाकों को रिहा कर दिया है, तो उन आतंकियों ने एक बार फिर से अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने सैनिकों की हत्या के बाद घटना की निंदा करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ हो रहा है, जबकि अफगान तालिबान ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। ऐसे में पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि इमरान खान ने कांटे का पेड़ बोया और अब वो गुलाब की उम्मीद कर रहे हैं।

सैनिकों की हत्या से बौखलाया पाकिस्तान

दो सैनिकों की हत्या के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से बौखलाया हुआ है, लेकिन वो किसी को जिम्मेदार ठहरा नहीं सकता है। क्योंकि, जिस अफगान तालिबान की वो तरफदारी कर रहा है, उसी अफगान तालिबान का समर्थन पाकिस्तान तालिबान को पूरी तरह से मिला हुआ है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक जफर हिलाली का कहना है कि अगर अफगानिस्तान तालिबान ने तय कर लिया है कि वो पाकिस्तान तालिबान के लिए पनाहगार बनेगा, तो फिर अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर तारबंदी से कुछ नहीं होने वाला है। उन्होंने ट्वीट में यहां तक कह दिया कि 'मीलों तक माइन्स बिछानी पड़ेगी, लंबी दीवार बनाने की जरूरत है।' इसके साथ ही उन्होंने लिखा है कि 'काफी ज्यादा प्रशिक्षित सैनिकों को बॉर्डर की सुरक्षा में लगानी होगी और उन्हें अत्याधुनिक हथियारों से लैश करना पड़ेगा'। जफर हिलाली के ट्वीट पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पाकिस्तान को अब समझ में आ रहा होगा कि आतंकवाद का समर्थन करना कितना खतरनाक होता है।

चीनी इंजीनियरों की हत्या

चीनी इंजीनियरों की हत्या

आपको बता दें कि जुलाई महीने में उत्तरी पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान के लड़ाकों ने चीनी इंजीनियरों को ले जा रही एक बस पर हमला कर दिया था, जिसमें चीन के 9 इंजीनियर मारे गये थे। पहले तो पाकिस्तान ने इसे बस हादसा बताया था, लेकिन जब चीन ने पाकिस्तान को फटकार लगाई, तो फिर पाकिस्तान ने इसके पीछे पाकिस्तान तालिबान का हाथ बता दिया। इसके साथ ही पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिकार चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि 'हमारा मानना है कि जिस तरह से अफगानिस्तान में काफी तेजी से स्थिति में परिवर्तन हुआ है, उसका असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है और पाकिस्तान में कुछ हिंसक घटनाएं हो सकती हैं।' आपको बता दें कि तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद पाकिस्तान में मिठाईयां बांटी गई थीं और कहा गया था कि भारत का वर्चस्व अफगानिस्तान में खत्म हो गया है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आने वाले वक्त में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान में काफी ज्यादा आतंक मचा सकता है।

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