Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

100 साल बाद दफ़नाये गए प्रथम विश्व युद्ध के दो भारतीय सैनिक

दफनाये जाने से पहले भारतीय सैनिकों के ताबूत
BBC
दफनाये जाने से पहले भारतीय सैनिकों के ताबूत

उत्तर फ़्रांस के एक छोटे से गांव लावेन्टी में बारिश की दोपहर एक ख़ास शवदाह की तैयारी चल रही थी.

हिंदू पुजारी की तैयारियों के बीच भारतीय और फ़्रांसीसी सैन्यकर्मी दो भारतीय सैनिकों को दफनाने के लिए तय किए गए एक छोटे से इलाके में इकट्ठा हो रहे थे.

ठंडी हवा के झोंको के बीच सलामी दी जा रही थी और भारतीय तिरंगे से लिपटे दो ताबूतों के पास हिंदू मंत्र पढ़े जा रहे थे.

2016 में जब एक नाले को चौड़ा किया जा रहा था तब वहां दो अज्ञात भारतीय सैनिकों के शव पाये गए थे.

विश्व युद्ध लड़े गुमनाम भारतीयों की याद में

100 साल पहले एक गोली ने बदला दुनिया का इतिहास

फ़्रांसीसी और भारतीय सैन्यकर्मियों ने अज्ञात भारतीय सैनिकों को अंतिम श्रद्धांजलि दी
BBC
फ़्रांसीसी और भारतीय सैन्यकर्मियों ने अज्ञात भारतीय सैनिकों को अंतिम श्रद्धांजलि दी

39 रॉयल गढ़वाल राइफल्स

उनकी वर्दी पर लगे नंबर "39" से उनका परिचय मिला.

ये सैनिक 39 रॉयल गढ़वाल राइफल्स की उस रेजिमेंट का हिस्सा थे जिसने ब्रिटिश राज में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ़्रांस में युद्ध में भाग लिया था.

यह रेजिमेंट आज भी भारत में मौजूद है. फ़्रांस ने उनसे संपर्क किया और उन्हें सैनिकों के मिले शवों की जानकारी दी.

इन दो सैनिकों को दफनाए जाने के वक्त गढ़वाल राइफ़ल रेजिमेंट के कमांडेंट ब्रिगेडियर इंद्रजीत चटर्जी मौजूद थे.

1914-15 के दौरान इसकी पहली और दूसरी रेजिमेंट फ़्रांस में युद्ध में शामिल हुई थी.

मौजूदा नियमों के अनुसार, ये तय किया गया कि इन सैनिकों को पूरे सम्मान के साथ ला जॉर्ज, लावेन्टी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा.

इस समारोह में शामिल होने के लिए भारत से एक छोटी सी टीम भी पहुंची. इस दौरान मौजूद गढ़वाल राइफ़ल रेजिमेंट बैंड के दो बैगपाइपर्स ने औपचारिक धुन बजाई.

फ़्रांस में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इन मृत सैनिकों को अपनी श्रद्धांजलि दी. उनके साथ शहर के मेयर और अन्य अधिकारी और करीब डेढ़ सौ भारतीय श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे.

वो चिट्ठी जिससे अमरीका विश्व युद्ध को मजबूर हुआ

प्रथम विश्वयुद्धः जांबाज़ नर्सों के नाम कई लड़ाईयां

दो अज्ञात भारतीय सैनिकों का अंतिम संस्कार करते एक पुजारी
BBC
दो अज्ञात भारतीय सैनिकों का अंतिम संस्कार करते एक पुजारी

द लास्ट पोस्ट

फ़्रांस को अपना घर बताने वाले वेद प्रकाश ने कहा, "हम युद्ध के दौरान मारे गए हज़ारों सैनिकों के प्रति अपनी श्रद्धा जताते हैं. यह युद्ध की प्रकृति है- इसे याद रखा जाना चाहिए कि युद्ध बुराई पर सच्चाई की जीत का प्रतीक है."

द लास्ट पोस्ट की धुनों के साथ ही समारोह अपने समापन की ओर बढ़ने लगा, माहौल गंभीर हो गया और ताबूतों को धरती के भीतर उतारा जाने लगा. जिस जगह पर इनके शव मिले थे वहां की कुछ मिट्टी भारत लायी जाएगी.

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 10 लाख से अधिक सैनिक ब्रिटेन की तरफ से लड़े जिसमें 60 हज़ार से अधिक फ़्रांस जैसे देशों मारे गए, जहां निर्णायक और भीषण लड़ाईयां लड़ी गईं.

तब जबकि कई लोग इतिहास की किताबों में भारतीय बलिदान को भूल जाने की शिकायत करते हैं, इस गांव में, भारतीय सैनिकों की भूमिका को अभी भी याद किया जाता है.

प्रथम विश्व युद्ध: पहली चिंगारी- आर्चड्यूक की हत्या-1

प्रथम विश्व युद्ध: पहली चिंगारी- आर्चड्यूक की हत्या-

लावेन्टी में कब्रिस्तान के अलावा, न्यूवे चैपल में एक स्मारक भी बनाया गया है.

इस पर उन भारतीय सैनिकों के नाम खुदे हैं जो ब्रिटिश राज के लिए युद्ध लड़ते हुए मारे गए थे और यहां हर साल रिमेम्बरेंस संडे के दिन इन सैनिकों को याद किया जाता है.

द कॉमनवेल्थ वार ग्रेव्स कमीशन की लिज़ स्वीट ने कहा, "100 साल पहले मारे गए लोगों के मिले शवों को हम हमेशा ही तब उनके साथ युद्ध में मारे गए लोगों से मिलाने की कोशिश करते हैं, यह मामला 100 साल से भी पुराना है. जिस कब्रिस्तान में आज उन्हें दफनाया गया है वहां एक बड़ा क्षेत्र भारतीय लोगों को समर्पित है, और इन्हें उन्हीं लोगों के बगल में दफनाया गया है.

न्यूवे चैपल की लड़ाई 10-13 मार्च 1915 के दरम्यान हुयी थी. लड़ाई उत्तर फ़्रांस में लिली के पास हुयी थी. भारत के राइफलमैन गब्बर सिंह नेगी ने युद्ध में उनकी भूमिका के लिए विक्टोरिया क्रॉस प्राप्त किया और उनके पोते समारोह में मौजूद थे. वह भारतीय सेना में कार्यरत हैं.

प्रथम विश्व युद्ध: पहली चिंगारी - आर्चड्यूक की हत्या-3

प्रथम विश्वयुद्धः जांबाज़ नर्सों के नाम कई लड़ाईयां

न्यूवे चैपल में भारतीय स्मारक
BBC
न्यूवे चैपल में भारतीय स्मारक

न्यूवे चैपल में सैनिक स्मारक

भारतीय और ब्रिटिश दोनों ही टुकड़ियों का नेतृत्व सर डगलस हेग में किया.

1915 की शुरुआत में भारतीय सैनिकों को पहले आराम दिया गया लेकिन जल्दी ही उनकी युद्ध में वापसी हुई और वो भीषण लड़ाई का हिस्सा बनें.

भारतीय सैनिकों का योगदान महत्वपूर्ण था- मार्च में न्यूवे चैपल की लड़ाई में आधे सैनिक भारतीय थे.

हर साल, फ़्रांस के लोग न्यूवे चैपल के स्मारक पर इकट्ठा हो कर युद्ध में मृतकों को याद करते हैं.

फ़्रांस में रह रहे भारतीय प्रवासियों या वो जो इसे अपना देश कहते हैं, उनके लिए यह एक विशेष समारोह है. उस संदर्भ में कि वो कहां से और क्यों आए हैं?

इस स्मारक पर पहुंचे फ़्रांसीसी सिखों में से एक रंजीत सिंह ने कहा, "यह भारतीय प्रवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें इतिहास से जोड़ता है. इस तरह की घटनाओं के बीच हमें यहां लाया गया था. यह हमें याद दिलाता है कि सौ साल पहले (भारत से) कुछ सैनिक यहां आए थे, इसे किताबों में नहीं लिखा गया है, हमें इसका आभास है, आज हम ये देख सकते हैं."

इस समारोह में शामिल लोगों ने स्वतंत्रता की रक्षा में सालों पहले फ़्रांस की धरती पर गिरे भारतीयों के खून के प्रति अपनी श्रद्धांजलि दी.

अब उस बलिदान के प्रतीक के रूप में इस जगह की कुछ मिट्टी भारत लायी जायेगी.

मोहब्बतें जो विश्व युद्ध के दौरान परवान चढ़ीं

जब मोर्चे पर डटे फौज़ियों को मिली लाखों चिट्ठियां

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+