क्या तुर्की राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे भारत के लिए निराशाजनक हैं? क्या कहते हैं भारत के एक्सपर्ट्स जानिए

तुर्की में चुनाव परिणाम जारी होने के बाद अर्दोआन 49.49 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं, जबकि कमाल कलचदारलू को 44.79 प्रतिशत वोट मिले हैं। अब फिर से 28 मई को चुनाव होगा।

turkey election results

Turkey election results: जियो पॉलिटिक्स के हिसाब से रविवार को तुर्की में हुआ मतदान और चुनावी नतीजे इस साल की अभी तक सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, जिसके व्यापक असर दुनिया पर पड़ता है।

चुनाव से पहले लगातार पश्चिमी मीडिया में दावे किए जा रहे थे, कि राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन चुनाव में हार सकते हैं, क्योंकि उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था में तुर्की में राजनीतिक ध्रुवीकरण और इस्लामिक राजनीति, अमेरिका की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए भयानक उदाहरण स्थापित कर रहा है।

तुर्की में होता इस्लामीकरण अमेरिका के ग्लोबल साउथ नीति को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रहा है, क्योंकि तुर्की की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ सालों में सबसे खराब स्थिति से गुजर रही है और यूक्रेन युद्ध में रूस का परोक्ष तौर पर समर्थन और अर्दोआन की पुतिन से करीबी ने अमेरिका को परेशान किया है।

आपको बता दें, कि ग्लोबल साउथ एशिया, अफ्रीकी देश और दक्षिण अमेरिकी देशों को कहा जाता है, जबकि ग्लोबल नॉर्थ में अमेरिका, कनाडा, यूरोप, रूस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों को रखा गया है।

turkey election results

पश्चिमी मीडिया ने हमेशा से राष्ट्रपति अर्दोआन को एक करिश्माई और मजबूत नेता माना है, जो हमेशा लोकप्रियता के रथ पर सवार रहा है, लेकिन इस बार उम्मीद थी, कि अर्दोआन को विपक्षी गठबंधन के नेता कमाल कलचदारलू से कड़ा मुकाबला मिलेगा और संभवत: अर्दोआन हार जाएंगे।

लेकिन, रविवार को आए चुनावी नतीजे पश्चिम के साथ साथ भारत को भी निराश करने वाला है, क्योंकि उम्मीद से बढ़कर अर्दोआन का प्रदर्शन रहा है और उन्होंने राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी 50 प्रतिशत वोटों की तुलना में साढ़े 49 प्रतिशत हासल किए हैं। हालांकि, आधा प्रतिशत से चूकने की वजह से अब फिर से 28 मई को मतदान होगा, लेकिन अब माना जा रहा है, कि राउंड अप चुनाव में अर्दोआन जीत हासिल कर लेंगे और फिर से राष्ट्रपति बन जाएंगे।

भारत के पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहर, जो कजाकिस्तान, स्वीडन में भारत के राजदूत रह चुके हैं, उनका मानना है, कि अर्दोआन का जीतना, भारत के लिहाज से सही नहीं होगा। उन्होंने वन इंडिया हिन्दी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा, कि "अर्दोआन का जीतना सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सही नहीं होगा"।

turkey election results

अर्दोआन फिर जीते, तो भारत के लिए नुकसानदायक?

अर्दोआन इतिहास के एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने सत्ता का कंट्रोल नागरिकों के सहयोग से अपने हाथों में रखा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के बाद भी उन्हें जनता से समर्थन ही मिला है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहकर उन्होंने अपने देश में एक तानाशाही व्यवस्था कायम की है, जो जनता को कबूल है।

वहीं, भारत के पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने वन इंडिया हिन्दी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा, कि "अर्दोआन कट्टर इस्लामवादी नेता हैं और उनके कार्यकाल में तुर्की लिबरल देस से कट्टरवादी देश बनकर उभरा है, जो भारत के लिए सही नहीं रहा है"।

उन्होंने कहा, कि "तुर्की में आए भूकंप में भारत सबसे पहले सहायता पहुंचाने वाले देशों में से एक था, फिर भी जेनेवा में ह्यूमन राइट्स की बैठक में तुर्की ने पाकिस्तान का पक्ष लिया है, अर्दोआन भारत के लिए कृतघ्न किस्म के नेता रहे हैं, लिहाजा अगर अर्दोआन जीतते हैं, तो भारत के लिए ये नुकसान दायक रहेगा"।

अशोक सज्जनहर का मानना है, कि "अर्दोआन के फिर से जीतने का मतलब ये है, कि वो अपने 20 सालों की प्रो- इस्लामिक राजनीति को और तेजी से आगे बढ़ाएंगे, और पाकिस्तान के लिए ये मुफीद स्थिति होगी।"

सज्जनहर ने कहा, कि "यूएई और सऊदी अरब जैसे देश अब पाकिस्तान से मुंह फेर चुके हैं। पाकिस्तान में अभी जो उठापटक चल रही है, या जो आर्थिक संकट है, सऊदी और यूएई ने अब पाकिस्तान पर ध्यान देना बंद कर दिया है, लेकिन अर्दोआन अभी भी कश्मीर पर पाकिस्तान की भाषा ही बोलते हैं, लिहाजा अर्दोआन का जीतना, जियो पॉलिटिक्स के हिसाब से भारत के लिए सही नहीं होगा।"

जेके त्रिपाठी कहते हैं, कि "अर्दोआन की चाहत तुर्की को इस्लामिक देशों का लीडर बनाने की रही है और यही कोशिश पाकिस्तान की भी रही है, जिसके पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने मलेशिया में इस्लामिक देशों का एक कॉन्फ्रेंस करने की कोशिश की थी, लेकिन सऊदी अरब की नाराजगी के बाद ये नहीं हो पाया था"।

उन्होंने कहा, कि "पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति चूंकी कमजोर है, लिहाजा तुर्की की कोशिश इस्लामिक देशों का नेता बनने की है और अर्दोआन ने अपने देश में इसे राष्ट्रवाद से जोड़ा है"। इसके साथ ही उन्होंने कहा, कि "तुर्की और चीन, वो दो देश हैं, जिन्होंने एफएटीएफ में हमेशा से पाकिस्तान की मदद की है, लिहाजा अगर अर्दोआन 28 मई को जीत जाते हैं, तो इसका मतलब ये होगा, कि आने वाले सालों में अर्दोआन अपने भारत विरोधी रूख को और तेजी से आगे बढ़ाएंगे, लिहाजा भारत के लिए अर्दोआन का जीतना सही नहीं होगा।"

turkey election results

कमाल कलचदारलू का क्या हो सकता है रवैया

कमाल कलचदारलू के पास अभी तक दिखाने के लिए कुछ नहीं था, सिवाए इसके कि वो लोकतांत्रिक व्यवस्था के दमदार आवाज माने जाते हैं और जिन्होंने तुर्की की जनता से वादा किया है, कि वो तुर्की में फिर से संसदीय लोकत्रंत को बहाल करेंगे, लिहाजा पश्चिम को कमाल कलचदारलू लुभा रहे थे। लेकिन, चुनावी नतीजों ने पश्चिम और भारत को झटका दिया है।

हालांकि, कमाल कलचदारलू अगर जीतते हैं, फिर भी इस बात की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, कि तुर्की की विदेश नीति में कोई बदलाव आएगा, क्योंकि वो कह चुके हैं, तुर्की की 'विदेश और रक्षा नीतियां राज्य का मुद्दा है' और राजनीतिक दलों से स्वतंत्र है।

कमाल कलचदारलू को लेकर जेके त्रिपाठी कहते हैं, कि "उनकी राजनीति लिबरल रही है और भले ही उन्होंने देश की पुरानी विदेश नीति को ही आगे बढ़ाने की बात कही है, लेकिन फिर भी भारत को लेकर उनका रूख नरम हो सकता है, क्योंकि वो कट्टर इस्लामवादी विचारधारा के खिलाफ हैं, जो भारत के लिए अच्छा होगा।"

पश्चिमी देशों का भी यही मानना है, कि कमाल कलचदारलू अगर जीतते हैं, तो वो एक ऐसी सरकार के प्रतिनिधि होंगे, जो विचारधारा के स्तर पर लोकतांत्रिक होंगे।

वहीं, अशोक सज्जनहर का मानना है, कि कमाल कलचदारलू अगर जीतते हैं, तो तुर्की की विदेश नीति में काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा, कि "कमाल कलचदारलू कश्मीर को लेकर न्यूट्रल सोच रखते हैं और बहुत कम उम्मीद है, कि वो पाकिस्तान का पक्ष लेंगे। कश्मीर पर उनके पुराने विचार भारत के खिलाफ नहीं रहे हैं, जबकि अर्दोआन कश्मीर पर अवैध पाकिस्तानी पक्ष का समर्थन करते रहेंगे।"

turkey election results

अशोक सज्जनहर कहते हैं, "अर्दोआन प्रो-इस्लामिक मूवमेंट को आगे बढ़ाएंगे, जबकि कमाल कलचदारलू का रूख खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष को रोकने की तरफ होगा और वो कश्मीर पर हस्तक्षेप नहीं करेंगे, लिहाजा कमाल कलचदारलू अगर जीतते हैं, तो ये भारत के लिए पॉजिटिव बात होगी और दोनों देशों के संबंध मजबूत होने की दिशा में बढ़ सकते हैं।"

Recommended Video

    Turkey Syria Earthquake में मदद कर लौटे NDRF को कैसे मिली शाबाशी ? | PM Modi | वनइंडिया हिंदी

    हालांकि, अब 28 मई को ही पता चल पाएगा, कि तुर्की में रेचेप तैय्यप अर्दोआन जीतते हैं या फिर कमाल कलचदारलू जीत हासिल करते हैं, लेकिन इतना तय है, कि तुर्की का ये चुनाव जियो-पॉलिटिक्स में एक बड़ा बदलाव लाएगा।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+