तुर्की के राष्ट्रपति ने जर्मनी जाकर खोली यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिद, हुआ बवाल
बर्लिन। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने पिछले सप्ताह जर्मनी में एक बड़ी मस्जिद का उद्घाटन कर अपने यूरोप दौरे को समाप्त किया। जर्मनी के कोलोन में यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिद को खोलकर एर्दोगन ने जर्मन सरकार का शुक्रिया अदा किया। एर्दोगन ने कोलोन में मस्जिद खोलकर इसे शांति का प्रतिक बताया है। एर्दोगन जब मस्जिद पहुंचे तब हजारों की संख्या में उनका विरोध और समर्थन करने लोग खड़े थे। जर्मनी के कोलोन में सबसे ज्यादा तुर्की प्रवासी लोग रहते हैं। एर्दोगन का जर्मनी की मीडिया और वहां की कई राजनीतिक पार्टियों ने विरोधि किया है।

तुर्की के करीबी जर्मनी में इस्लामिक ग्रुप ने कोलोन में इस विशाल मस्जिद को खड़ा किया है। जर्मनी दौरे पर आए एर्दोगन ने कहा कि उनका यहां आने का मकसद दोनों देशों के बीच रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना है। एर्दोगन ने कहा, 'हमें अपने मतभेदों को दूर करने और हमारे सामान्य हितों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।' हालांकि, जर्मनी ने एर्दोगन का गर्मजोशी से स्वागत नहीं किया।
कई विपक्षी राजनेताओं ने एर्दोगन के साथ डिनर प्रोग्राम को भी कैंसिल कर दिया। वहीं, जर्मन चांसलर भी एर्दोगन के डिनर में नहीं पहुंचीं। मस्जिद के बाहर कई प्रदर्शनकारी तुर्की में अल्पसंख्यक कुर्दों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और प्रेस की आजादी पर सरकार के हमले का विरोध कर रहे थे। कई लोग तुर्की में बदतर होते ह्यूमन राइट्स का विरोध प्रदर्शन करते हुए दिखे।
तुर्किश-इस्लामिक यूनियन ऑफ द इंस्टिट्यूट रिलिजियन (दीतिब) को तुर्की फंडिंग करता है। दीतिब ने जर्मनी में सैकड़ों मस्जिदें खोली है और उसके कई मेंबर्स को तुर्की से निकाले गए लोगों पर जासूस करने का आरोप है। हालांकि, इस मस्जिद की साइज की वजह से आस-पास के लोगों ने शिकायत की है।
जर्मनी के अखबारों ने एर्दोगन का विरोध किया है। जर्मनी के सबसे बड़े अखबार 'बिल्ड' ने अपने फ्रंट पेज पर लिखा कि एर्दोगन ने जर्मनी के खिलाफ नफरती भाषण दिया है। दोनों देशों के बीच संबंध तुर्की में 2016 के तख्तापलट की कोशिश के बाद से ही खराब है, जिसके परिणामस्वरूप हजारों लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।












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