नाटो में स्वीडन और फिनलैंड की एंट्री पर फिर अड़ंगा लगाने को तैयार तुर्की, अर्दोआन के फिर बदले तेवर
अंकारा, 03 अक्टूबरः तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने एक बार फिर से नाटो सदस्यता को लेकर स्वीडन और फिनलैंड को धमकी दी है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने कहा कि अगर वे उनसे किए गए अपने वादे पूरे नहीं करते हैं तो वे नाटो गठबंधन में शामिल होने के उनके प्रयासों को रोक देंगे।

स्वीडन और फिनलैंड ने नहीं पूरा किया वादा
शनिवार को देश की संसद में बोलते हुए राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा है कि हमने बारीकी से इस बात को परखा है कि क्या स्वीडन और फिनलैंड द्वारा नाटो में शामिल होने की एवज में किए गए वादों को पूरा किया गया था। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे देश से किए गए वादे पूरे नहीं किए जाते, तब तक हम अपनी सैद्धांतिक स्थिति को बनाए रखेंगे। अंतिम निर्णय हमारी संसद द्वारा लिया जाएगा।

नाटो में शामिल होने के लिए 30 सदस्य देशों की मंजूरी जरूरी
गौरतलब है कि नाटो में शामिल होने के लिए संगठन के सभी 30 सदस्य देशों द्वारा नाटो सदस्यता आवेदनों को मंजूरी दी जानी जरूरी है। अब तक हंगरी और तुर्की को छोड़कर सभी नाटो सदस्य देशों ने स्वीडन और फिनलैंड की सदस्यता को मंजूरी दे दी है। फरवरी में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए आक्रमण के बाद दोनों नॉर्डिक देशों ने दशकों से चले आ रहे सैन्य गुटनिरपेक्षता को त्याग कर मई में नाटों में शामिल होने का आवेदन दिया था।

कुर्द आतंकियों को पनाह देने का है आरोप
इसके बाद तुर्की ने घोषणा की थी कि वह नाटो में शामिल होने के लिए स्वीडन और फिनलैंड की मंजूरी को तब तक रोकेगा, जब तक कि ये दोनों देश अपने क्षेत्र में सक्रिय कुर्द आतंकवादी समूहों का समर्थन करना बंद नहीं कर देते। ऐर्दोगन ने दोनों देशों पर कुर्द आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाया था। तुर्की ने इन दोनों देशों पर आरोप लगाते हुए कहा ये प्रतिबंधित संगठन कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी की मदद कर रहे हैं।

जून में तुर्की ने किया था दोनों देशों संग समझौता
बता दें कि 28 जून को मैड्रिड में नाटो शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले तुर्की और दो नॉर्डिक देशों के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें दोनों नार्डिक देश यानी फिनलैंड और स्वीडन 'पीकेके (Kurdistan Workers' Party) और अन्य कुर्द आतंकवादी समूहों के खिलाफ लड़ाई में तुर्की के साथ पूरी तरह से सहयोग करने पर सहमत हुए। इसके साथ दोनों देश तुर्की को हथियारों की डिलीवरी पर लगाए गए अपने प्रतिबंध को हटाने के लिए भी सहमत हुए हैं, जो सीरिया में तुर्की द्वारा 2019 में किए गए सैन्य घुसपैठ के जवाब में लगाए गए थे। हालांकि, इस समझौते के बावजूद एर्दोगन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंकारा स्वीडन और फिनलैंड के समझौते को लागू करने के तरीके से संतुष्ट नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस साल एर्दोगन ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और इजराइल जैसे कई देशों के साथ तुर्की के खराब संबंधों को सुधारने के लिए प्रयास किए है।












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