तुर्की के राष्ट्रपति ने UNGA में भारत के खिलाफ उगला जहर, कश्मीर पर दिया पाकिस्तान का साथ
तुर्की किसी भी तरह से परमाणु हथियार हासिल करना चाहता है। इसके लिए उसने पहले भारत के साथ भी दोस्ती करने की कोशिश की थी। लेकिन, भारत के इनकार के बाद अब तुर्की पाकिस्तान से न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी लेना चाहता है।
न्यूयॉर्क, सितंबर 22: तुर्की ने एक बार फिर से कश्मीर को लेकर जहर उगला है और पाकिस्तान की जमकर तरफदारी की है। मुस्लिम देशों का नया खलीफा बनने की चाहत रखने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने भारत और कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया है और वैश्विक मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाने की गुस्ताखी की है।

तुर्की का जहरीला बयान
तुर्की और पाकिस्तान के संबंध पहले से ही जगजाहिर हैं और इस बात की पूरी उम्मीद थी कि संयुक्त राष्ट्र में जब तुर्की का नंबर आएगा तो वो कश्मीर को लेकर विवादित बयान जरूर देगा और ऐसा ही हुआ है। तुर्की के राष्ट्पति रजब तैयब एर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में वैश्विक नेताओं को संबोधित किया है और इस दौरान उन्होंने एक बार फिर से कश्मीर का मुद्दा उठा दिया। आपको बता दें कि पिछले साल भी तुर्की के राष्ट्रपति ने कश्मीर का मुद्दा उठाया था, जिसका भारत की तरफ से विरोध किया गया था और इस बार भी भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति के बयान पर जोरदार पलटवार किया है।

भारत ने किया पलटवार
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने जब कश्मीर का मुद्दा उठाया तो उसके जवाब में भारत ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति का बयान पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' है और तुर्की को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। भारत ने तुर्की के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि तुर्की को अपनी नीतियों पर फिर से गहराई में जाकर विचार करना चाहिए। आपको बता दें कि तुर्की के राष्ट्रपति ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में सामान्य चर्चा के दौरान अपने संबोधन में कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि, ''हम पिछले 74 सालों से कश्मीर में चल रही समस्याओं को लेकर उससे जुड़ी पार्टियों के बीच बातचीत के जरिए और प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के ढांचे के भीतर हर करने के पक्ष में अपना रूख जाहिर करते हैं''।

बार-बार कश्मीर का जिक्र करता तुर्की
आपको बता दें कि तुर्की बार बार कश्मीर का जिक्र करता रहता है और पाकिस्तान से उसके बेहद खास रिश्ते हैं। तुर्की के राष्ट्रपति पहले भी कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठा चुके हैं, हालांकि, उससे कोई फायदा नहीं हुआ। पिछले साल जब तुर्की के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा किया था, उस दौरान भी उन्होंने पाकिस्तान को खुश करने के लिए कश्मीर का मुद्दा उठाया था। उस वक्त भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुर्की को जवाब देते हुए कहा था कि, तुर्की के राष्ट्रपति की टिप्पणी ना तो इतिहास की समझ में ही सही है और ना ही कूटनीति के संचालन को ही दर्शाती है। भारत की तरफ से साफ कहा गया था कि तुर्की के राष्ट्रपति के बयान से भारत और तुर्की के बीच के संबंध पर गहरा असर पड़ेगा।

तुर्की क्यों उठाता है कश्मीर का मुद्दा?
आपको बता दें कि तुर्की एक परमाणु संपन्न देश बनना चाहता है और जब रजब तैयब एर्दोआन ने तुर्की की कमान संभाली थी, तो उन्होंने भारत के साथ दोस्ती करने की कोशिश की थी। उन्होंने भारत का दौरा भी किया था और उनका मकसद भारत से परमाणु बम बनाने की टेक्नोलॉजी हासिल करने की थी। लेकिन, भारत ने तुर्की को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी देने से साफ इनकार कर दिया था, उसके बाद से ही तुर्की भारत को लेकर भड़का हुआ है और लगातार कश्मीर का मुद्दा उठाता रहता है। तुर्की अब पाकिस्तान से परमाणु बम बनाने की टेक्नोलॉजी हासिल करना चाहता है और कई अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इस बात की चिंता जताई गई है कि पाकिस्तान तुर्की को न्यूक्लियर हथियार बनाने की टेक्नोलॉजी देना भी चाहता है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय प्रेशर की वजह से पाकिस्तान ऐसा नहीं कर पा रहा है।

पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंध
पिछले कुछ सालों में तुर्की ने पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत किया है। तुर्की दुनिया का इकलौता मुस्लिम बाहुल्य देश है, जो एक सेक्युलर देश है और जो मुस्लिम राष्ट्र नहीं है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन तुर्की को मुस्लिम देश बनाना चाहते हैं, लेकिन वो ऐसा कर नहीं पा रहा है। यूनाइटेड नेशंस में एर्दोगान ने रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बांग्लादेश के राहत शिविर में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति काफी खराब है और उनकी सुरक्षित घर वापसी होनी चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications