तहरीक-ए-तालिबान ने इमरान खान को दिया खुला चैलेंज, सीजफायर से इनकार, कैप्टन समेत कई जवानों को मारा
तहरीक-ए-तालिबान को लेकर इमरान खान ने कहा था कि उनसे पाकिस्तान सरकार की बात चल रही है और टीटीपी ने सीजफायर की घोषणा की है, लेकिन टीटीपी ने बातचीत के साथ साथ सीजफायर से भी इनकार कर दिया है।
इस्लामाबाद, अक्टूबर 03: पिछले हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानंमत्री इमरान खान ने कहा था कि पाकिस्तान तालिबान, जिसे टीटीपी भी कहा जाता है, उनसे पाकिस्तान सरकार की बात चल रही है और अगर वो हथियार छोड़ दें, तो उन्हें माफी दे जाएगी। वहीं, पाकिस्तानी मीडिया में खबर आई, कि टीटीपी ने 20 दिनों के लिए सीजफायर की घोषणा की है, लेकिन टीटीपी के आतंकवादियों ने पांच पाकिस्तानी सैनिकों की बेरहमी से हत्या कर कहा है कि, उसने किसी सीजफायर की बात नहीं की थी।

पांच सैनिकों को टीटीपी ने मारा
पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान के कबायली जिले के स्पिनवाम इलाके में शनिवार को आतंकियों ने पाकिस्तान सैनिकों के वाहन को निशाना बनाया है, जिसमें फ्रंटियर कॉर्प्स के चार जवान और लेविस फोर्स का एक सब-इंस्पेक्टर मारे गए। पांच सैनिकों की मौत के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कहा है कि आतंकियों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पाकिस्तानी सेना पर ये भयानक हमला उत्तरी वजीरिस्तान के शूरा मुजाहिदीन के तालिबान कमांडर हाफिज गुल बहादुर के नेतृत्व में 20 दिनों के लिए संघर्ष विराम की घोषणा के एक दिन बाद इलाके में हुई। हालांकि, अब जो खबर आ रही है, उसके मुताबिक टीटीपी ने संघर्ष विराम की खबरों से इनकार कर दिया है।
इमरान खान ने की थी माफी की बात
पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया था कि जब इमरान खान ने टीटीपी के लिए माफी की बात की थी और उनसे मेनस्ट्रीम में आने की अपील की थी, तो टीटीपी ने 20 दिनों के लिए सीजफायर की घोषणा की थी। इमरान खान ने एक रूसी न्यूज नेटवर्क से बात करते हुए कहा था कि उनकी सरकार पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान के कई समूहों से बात कर रही है, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के इस बयान के अगले ही दिन टीटीपी के आतंकियों ने पांच पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या कर दी है।

''अफगान तालिबान करवा रहा समझौता''
इमरान खान ने कहा था कि, अफगानिस्तान तालिबान, पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान के बीच चल रही बातचीत में शांति दूत की भूमिका निभा रहा है। लेकिन, अब पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, टीटीपी के प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी ने संघर्षविराम की खबरों का खंडन किया है और उससे संबद्ध उग्रवादियों से अपनी गतिविधियां जारी रखने को कहा है। खुरसानी ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि उसने कभी भी युद्धविराम की घोषणा नहीं की थी और समूह का रूख पूरी तरह से स्पष्ट है। टीटीपी के नेताओं ने कहा है कि वो पाकिस्तान की सरकार के साथ किसी भी तरह की शांति समझौता को लेकर बातचीत नहीं कर रहे हैं।

घुटनों पर पाकिस्तान सरकार
अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार आने के बाद पाकिस्तान में लगातार आतंकवादी हमले हो रहे हैं और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान इन हमलों के पीछे जिम्मेदार है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने पाकिस्तान की सरकार को फौरन देश में शरिया कानून लागू करने की मांग की है। वहीं, टीटीपी के प्रवक्ता खुरासानी ने इस बात से भी इनकार किया है कि उसके संगठन में कोई दरार है। टीटीपी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, उनके ऑपरेशंस सामूहिक होते हैं और उसमें से कोई भी बहक नहीं सकता है। आपको बता दें कि टीटीपी पाकिस्तान के संविधान को नहीं मानता है और वो अफगानिस्तान की तरह की पाकिस्तान पर अपना कब्जा चाहता है।

कैप्टन को उतारा था मौत के घाट
इसी हफ्ते टीटीपी के आतंकवादियों ने खैबर-पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सेना के एक कैप्टन को मार दिया था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बताया था कि, 27 साल के कैप्टन सिकंदर अपनी बटालियन के साथ खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे थे, इसी दौरान टीटीपी आतंकियों ने उनके ऊपर जानलेवा हमला कर दिया था और कैप्टन की मौत हो गई। इसके अलावा टीटीपी के आतंकवादियो ने एक फ्रंटियर पोस्ट पर हमला कर एक और पाकिस्तानी सैनिक को को मौत के घाट उतार दिया था।

टीटीपी के आगे बेबस क्यों इमरान सरकार?
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आगे इमरान सरकार और पाकिस्तान की सेना पूरी तरह से बेबस है। पहले टीटीपी के आतंकवादी आम पाकिस्तानियों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब उन्होंने पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष कमर जावेद बाजवा ने जब देश की संसदीय समिति के सामने अपनी ब्रीफिंग दी थी, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा था, कि अफगान तालिबान और पाकिस्तान तालिबान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जबकि, इमरान खान अफगानिस्तान में स्थित तालिबान को गुड तालिबान और पाकिस्तान में मौजूद तालिबान को बैड तालिबान कहते हैं। सबसे दुर्भाग्य की बात है, कि पाकिस्तान में जिस तरह से कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा मिला है, वो पाकिस्तानी सैनिकों के ऑपरेशंस को कामयाब नहीं होने देता है।

पाकिस्तान तालिबान क्यों बना सिरदर्द
जब पाकिस्तान की सेना तहरीक-ए-तालिबान के आतंकियों के खिलाफ एक्शन चलाती है, तो उन्हें स्थानीय लोगों का साथ नहीं मिलता है। पाकिस्तान में पिछले कई सालों से जिस तरह से लोगों को कट्टरपंथी बनाया गया है, वो अब असर दिखा रहा है। तहरीक-ए-तालिबान के आतंकियों को स्थानीय लोग अपने घरों में छिपाते हैं, उनकी मदद करते हैं और सबसे बड़ी बात ये है, कि कौन तहरीक-ए-तालिबान का आतंकवादी है और कौन आम लोग, ये तक पता नहीं चल पाता है। सबसे हैरानी की बात तो ये है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के दफ्तर से तीन किलोमीटर दूर पर स्थिति लाल मस्जिद के मौलाना कहते हैं कि तहरीक-ए-तालिबान भी पाकिस्तानियों का वही हस्र करेंगे, जो अफगान तालिबान ने किया है, और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं गई।












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