इंडोनेशिया में सुनामी: ‘मेरी दुआ है कि अल्लाह उन्हें बचा ले’

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"शहर के लोग भूकंप से आई तबाही का जायज़ा ले रहे थे. मैं भी तालिसे बीच के पास एक दोमंज़िला पार्किंग के सामने मौजूद थी. मैं फ़ोन पर अपने एक रिश्तेदार से बात कर रही थी. तभी एक ईमारत की छत से किसी शख़्स के चिल्लाने की आवाज़ आई. उसने कहा- 'भागो वहाँ से'. ये शाम पौने छह बजे का समय था."

कुछ इस तरह 29 साल की हैनी कासुमा ने अपनी आपबीती सुनाना शुरू किया. पालू शहर में शुक्रवार को आये सुनामी के बाद हैनी कासुमा एक स्वयंसेवक के तौर पर बचाव कार्य में जुटी हुई हैं.

इंडोनेशिया की सरकारी एजेंसियों के अनुसार अब तक इस आपदा में कम से कम 832 लोगों की मौत हो गई है और 500 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.

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'दूसरी लहर के बाद कुछ नहीं बचा'

हैनी कासुमा ने बताया, "उस आदमी की आवाज़ सुनकर हम पार्किंग की तरफ भागे. जब हम दूसरी मंजिल पर पहुँचे तो सुनामी का विकराल रूप हम साफ़ देख सकते थे. सामने से आती हुई लहर को देखकर ही ये समझ आ गया था कि किनारे पर बने रेस्त्रां और छोटे मकान एक झटके में उखड़ जायेंगे."

वो बोलीं, "ऊपर खड़े लोग सुनामी-सुनामी चिल्ला रहे थे. बहुत से लोग वीडियो बना रहे थे. पार्किंग के नीचे एक छोटी बस के बराबर में क़रीब दस महिलाएं खड़ी थीं. हमने उन्हें जल्द से जल्द ऊपर आने को कहा. हमारे सामने जो सड़क थी, उसपर लोग घूम रहे थे. कई कारें और मोटरसाइकल सवार भी वहाँ से गुज़र रहे थे. क्योंकि सुनामी की जो चेतावनी भूंकप के बाद जारी की गई थी, उसे कुछ देर बाद ही वापस ले लिया गया था."

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"जो लहरें कई सौ मीटर दूर दिख रही थीं, वो महज़ डेढ़ मिनट के अंदर पार्किंग के निचले माले के पार निकल गईं. पहली लहर के टकराने के बाद ही सामने वाली सड़क पूरी तरह से मलबे से भर गई."

"कुछ लोग मलबे में दबे हुए दिखाई दे रहे थे. इनमें महिलाएं भी थीं और कुछ बच्चे भी. ये देख कुछ लड़के पार्किंग से नीचे की ओर दौड़े. लेकिन इससे पहले कि वो सड़क तक पहुँचते, ऊपर खड़े लोगों ने उन्हें आवाज़ लगाई- 'दूसरी लहर आ रही है.' उनमें से एक लड़के ने छोटी बच्ची को मलबे से निकाला और वो पार्किंग की तरफ दौड़ा."

"लेकिन हम उन्हें पार्किंग में घुसते हुए नहीं देख पाये. लहरें उनसे आगे निकल गईं. मैं दुआ करती हूँ कि अल्लाह उन्हें बचा ले."

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'शहर में कई फ़ीट पानी था'

इंडोनेशिया के सुलवेसी द्वीप पर आये सुनामी से पालू शहर सबसे ज़्यादा प्रभावित है. मुस्लिम बहुल इस शहर की आबादी सवा तीन लाख बताई जाती है.

हैनी जैसे चश्मदीदों के अनुसार, पानी का बहाव इतना तेज़ था कि आबादी के हिसाब से अधिक घनत्व वाले सभी इलाक़ों में कई फ़ीट पानी घुस आया.

दक्षिणी सुलवेसी के मकास्सार शहर में रहने वाले अमरिल नुरयान एक प्रोफ़ेशनल फ़ोटोग्राफ़र हैं. वो फ़िलहाल सुलवेसी द्वीप पर बचाव कार्य को गति देने के लिए आर्थिक मदद जुटाने का काम कर रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "पालू को एक सुरक्षित शहर समझा जाता था. शहर के तीन तरफ पहाड़ हैं और ये एक घाटीनुमा जगह में स्थित है. लेकिन भूकंप की तीव्रता बहुत ज़्यादा थी, इसलिए सुनामी का असर ज़्यादा हुआ."

नुरयान बोले, "पालू में मेरे रिश्तेदार भी फंसे हुए हैं. उन्होंने बताया है कि दूसरी लहर ने सबकुछ तबाह कर दिया. ये लहर क़रीब 20 फ़ीट ऊंची थी. पालू शहर की पहचान कहा जाने वाला पोनुलेले ब्रिज गिर गया है. बड़ा अस्पताल और सबसे बड़ा मॉल भी धवस्त हो गये हैं."

मई 2006 में बनकर तैयार हुए पोनुलेले ब्रिज का नाम सेंट्रल सुलवेसी के गवर्नर रहे अमीनुद्दीन पोनुलेले के नाम पर रखा गया था.

पोनुलेले ब्रिज पालू के मुख्य दर्शनीय स्थलों में से एक था और पूर्वी-पश्चिमी डोंगाला को जोड़ता था.

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फ़िलहाल की ज़रूरतें

हैनी कासुमा ने बताया कि शहर में साफ़ पानी की भारी किल्लत हो गई है. शहर के लोगों को टेंट, बच्चों के लिए दूध और दवाइयों की तत्काल ज़रूरत है.

हैनी के अनुसार पिछले भूकंपों में जिस 'आगुंग दर्रुस्सलाम मस्जिद' ने स्थानीय लोगों को पनाह दी थी, वो गिर गई है.

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उन्होंने बताया, "शहर में जो सुपर बाज़ार हैं, लोग उन्हें लूट रहे हैं. बचाव कर्मियों को हाथ से मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालना पड़ा रहा है. इसमें बहुत ज़्यादा वक़्त ख़राब हो रहा है."

इंडोनेशिया की आपदा एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद सौउगी ने शनिवार को समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "हमें बड़ी मशीनों की ज़रूरत है. ये हमें तुरंत चाहिए. लोग मलबे में फंसे हुए हैं. हमारे लोग ग्राउंड पर काम कर रहे हैं, लेकिन हाथों से इतना मलबा नहीं हटाया जा सकता."

इंडोनेशिया की समाचार एजेंसियों के अनुसार पालू और डोंगाला की ही तरह पोसो, सिगी और पारिगी जैसे शहरों में स्थिति काफ़ी नाज़ुक है.

बचाव कार्य में जुटी रेड क्रॉस संस्था का अनुमान है कि हालिया भूकंप और सुनामी से तकरीबन 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.

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समाचार एजेंसियों के अनुसार:

  • सुलवेसी द्वीप पर भूकंप के झटके आने का सिलसिला अभी भी जारी है जिसकी वजह से लोगों में दहशत है.
  • लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए इंडोनेशिया की सेना को उतारा गया है.
  • सरकार की आपात सेवा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पूर्वो नूगोरो का कहना है कि पालू और डोंगाला में मरने वालों की तादाद बढ़ सकती है.
  • प्रभावित शहरों की सड़कों पर अभी भी शव पड़े हैं और मुख्य अस्पताल धराशाई होने की वजह से घायलों का इलाज टेंटों में किया जा रहा है.
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इंडोनेशिया में क्यों आते हैं भूकंप

दुनिया में पृथ्वी की सतह पर सक्रिय ज्वालामुखियों में से आधे इसी इलाक़े में पड़ते हैं. इस कारण इस इलाक़े को रिंग ऑफ़ फ़ायर या आग का गोला भी कहा जाता है.

पिछले महीने ही यहां लोम्बोक द्वीप पर आए शक्तिशाली भूकंप में 460 लोगों की मौत हुई थी.

साल 2004 में इंडोनेशिया में आए भूकंप की वजह से पैदा हुई सुनामी ने हिंद महासागर के तटों पर भारी तबाही मचाई थी जिससे सवा दो लाख से अधिक लोग मारे गए थे. इनमें क़रीब सवा लाख मौतें इंडोनेशिया में ही हुई थीं.

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