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Tsar Bomba: दुनिया का सबसे खतरनाक परमाणु परीक्षण! 1000 KM दूर से दिखे शोले, कहलाया एटम बमों का 'महाराजा'

Tsar Bomba Nuclear Testing: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर एटम बम गिराकर पूरी दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी। इसके बाद विश्व युद्ध तो समाप्त हो गया, लेकिन दुनिया में दो महाशक्तियों, अमेरिका और सोवियत संघ के बीच "कोल्ड वॉर" या शीत युद्ध शुरू हो गया। इस दौरान दोनों देशों में शक्ति प्रदर्शन की होड़ चल रही थी। इसी दौर में सोवियत संघ के वैज्ञानिक आंद्रेई सखारोव ने दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली बम तैयार किया, जिसे "जार बम" का नाम दिया गया।

ज़ार बम का नाम रूस के पुराने राजाओं की उपाधि "जार" से प्रेरित था, जिसका मतलब "बमों का राजा" माना जाता था। यह बम इतना विशाल और ताकतवर था कि इसे रखने के लिए एक विशेष प्रकार के लड़ाकू विमान की जरूरत पड़ी। यह बम अमेरिका के "लिटिल बॉय" और "फैट मैन" बम से कई गुना ज्यादा ताकतवर था। इस बम का उद्देश्य शक्ति का प्रदर्शन करना था, ताकि दुनिया को सोवियत संघ की परमाणु शक्ति का अंदाजा हो सके।

Tsar Bomba Biggest Bomb in History

इतिहास के पन्नों में दर्ज 30 अक्टूबर
आपको बता दें कि, 30 अक्टूबर 1961 को सोवियत संघ ने ज़ार बम का परीक्षण नोवाया जेमलिया द्वीप पर किया। इस परीक्षण में टुपोलोव-95 नामक सोवियत लड़ाकू विमान का उपयोग किया गया, जो लगभग दस किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। बम को पैराशूट के सहारे गिराया गया, ताकि विस्फोट होने से पहले विमान सुरक्षित दूरी पर पहुंच जाए।

जैसे ही यह बम धरती पर गिरा, विस्फोट हुआ जिसने दुनिया भर को हिला दिया। इस विस्फोट की शक्ति इतनी भयंकर थी कि इसे अब तक का सबसे शक्तिशाली मानव निर्मित विस्फोट माना जाता है। इस बम की क्षमता लगभग 50 मेगाटन टीएनटी के बराबर थी, जो कि सभी पिछले हाइड्रोजन बम परीक्षणों से कहीं अधिक थी।

जार बम का वैश्विक प्रभाव और प्रतिबंध
इस विस्फोट के बाद, पूरी दुनिया को समझ में आया कि खुले में परमाणु परीक्षण कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसलिए 1963 में अधिकांश देशों ने खुले में परमाणु परीक्षण पर रोक लगाने के लिए एक समझौता किया, ताकि पर्यावरण और मानव जीवन को बचाया जा सके। जार बम का परीक्षण एक चेतावनी के रूप में देखा गया, जिसने कई देशों को ऐसे परीक्षणों पर रोक लगाने के लिए मजबूर कर दिया।

आंद्रेई सखारोव, जिन्होंने इस बम को बनाया था, को भी महसूस हुआ कि ऐसे विनाशकारी हथियार दुनिया के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं। इसके बाद उन्होंने परमाणु हथियारों के खिलाफ अभियान चलाना शुरू किया और उन्हें 1975 में शांति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Tsar Bomba Biggest Bomb in History

ज़ार बम का पश्चिमी नाम "बिग इवान"
ज़ार बम का पश्चिमी नाम "बिग इवान" भी था। इसके अलावा, सोवियत संघ में इसे "कुज़किना मैट" के नाम से भी जाना जाता था, जिसका मतलब होता है "हम आपको दिखाएंगे!" यह नाम निकिता ख्रुश्चेव के संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को दी गई चेतावनी से प्रेरित था। इसके अलावा, सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) ने इस परीक्षण को "JOE 111" कोड नाम दिया था।

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ज़ार बम का परीक्षण एक ऐसी घटना थी, जिसने पूरी दुनिया को परमाणु हथियारों के भयावह परिणामों के प्रति सचेत किया। इसने अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शक्ति प्रदर्शन की होड़ को और भी गहरा कर दिया। ज़ार बम जैसे शक्तिशाली हथियारों का निर्माण एक ओर वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक था, तो दूसरी ओर इसने मानवता के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए। परमाणु परीक्षणों पर लगे प्रतिबंधों और शांति के प्रयासों से दुनिया को परमाणु हथियारों से सुरक्षित बनाने की कोशिशें शुरू हुईं, जिसका श्रेय आंद्रेई सखारोव जैसे वैज्ञानिकों को भी जाता है।

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