डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, कोर्ट ने पलटा फैसला, अमेरिकी राष्ट्रपति पर लगाया गंभीर आरोप
Trump Portland Protest: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शनिवार को एक बड़ा कानूनी झटका लगा, जब एक संघीय अदालत ने ओरेगन के पोर्टलैंड शहर में 200 नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती के उनके आदेश पर तत्काल रोक लगा दी।
यह अंतरिम आदेश स्वयं ट्रंप द्वारा नियुक्त यूएस डिस्ट्रिक्ट जज करिन इम्मरगट ने दिया। जज ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि पोर्टलैंड में हो रहे विरोध प्रदर्शन "विद्रोह" के स्तर पर पहुँच गए थे या वे कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा थे, जिसके कारण नेशनल गार्ड की तैनाती आवश्यक हो।

प्रशासन की दलील बनाम ओरेगन की स्वायत्तता
ओरेगन की अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को अदालत में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति अपनी आप्रवासन (इमिग्रेशन) नीतियों के खिलाफ होने वाले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य नेशनल गार्ड पर गैरकानूनी नियंत्रण स्थापित करना है। राज्य सरकार ने इसे राज्य की स्वायत्तता पर हमला और संघीय कानून का उल्लंघन बताया। याचिका में यह भी कहा गया कि ट्रंप ने यह निर्णय संभवतः 2020 के पुराने, हिंसक प्रदर्शनों के वीडियो देखकर लिया, जबकि इस बार के प्रदर्शन "छोटे और शांतिपूर्ण" थे। वकीलों ने बताया कि जून के मध्य के बाद से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो शांतिपूर्ण माहौल का संकेत है।
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घरेलू आतंकवाद या राजनीतिक दखल?
ट्रंप प्रशासन का पक्ष है कि नेशनल गार्ड की तैनाती "घरेलू आतंकवाद" से संघीय इमारतों की रक्षा करने के लिए आवश्यक है। हालांकि, विपक्षी डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे राजनीतिक दखल और राष्ट्रपति द्वारा शक्ति का दुरुपयोग बताया है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा।
पोर्टलैंड में फिर से हुआ प्रदर्शन
इसी बीच, शनिवार शाम को भी पोर्टलैंड में ICE मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। हालांकि उन्होंने सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाजी की, पुलिस के अनुसार, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। यह फैसला राष्ट्रपति और राज्य सरकारों के बीच संघीय शक्ति के संतुलन पर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस को रेखांकित करता है।
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