Trump Modi Cold War: 35 मिनट की कॉल ने कैसे बदल दी कैमिस्ट्री? ट्रंप के फोटो गेम पर मोदी का मास्टर स्ट्रोक!
Trump Modi Cold War: भारत और अमेरिका के बीच सियासी तनातनी ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। कभी 'प्रिय मित्र' कहकर एक-दूसरे की तारीफ करने वाले नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप अब एक-दूसरे के खिलाफ सियासी जंग में उतर आए हैं।
ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ की मार और मोदी का रूस व चीन की ओर झुकाव इस बात का सबूत है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अब ठंडे पड़ चुके हैं। लेकिन इस सियासी भूचाल की शुरुआत कहां से हुई? एक 35 मिनट की फोन कॉल, ऑपरेशन सिंदूर, और ट्रंप का पाकिस्तान के साथ फोटोशूट का दांव- आइए, इस सियासी ड्रामे को डिकोड करें...

क्या हुआ उस 35 मिनट की कॉल में?
17 जून 2025 को जी-7 समिट के दौरान ट्रंप और मोदी की 35 मिनट की फोन कॉल ने भारत-अमेरिका रिश्तों में चिंगारी पैदा की। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कॉल में मोदी ने ट्रंप को दो टूक जवाब दिया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम पाकिस्तान की रिक्वेस्ट पर हुआ, न कि अमेरिकी मध्यस्थता से। मोदी ने साफ कहा, 'भारत न कभी मध्यस्थता स्वीकार करता है, न करेगा।'
ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम करवाया और इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताया। लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, 'भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य चैनलों के जरिए सीधी बात हुई। ट्रंप का कोई रोल नहीं था।' इस कॉल के बाद ट्रंप का रवैया बदल गया। उन्होंने भारत को 'मृत अर्थव्यवस्था' और 'घटिया व्यापार नीतियों' वाला देश कहना शुरू किया और 50% टैरिफ की सजा सुना दी।
ट्रंप का 'फोटो जाल', मोदी की चतुराई से मात!
इस कॉल का असली ड्रामा तब सामने आया, जब पता चला कि ट्रंप ने मोदी को व्हाइट हाउस बुलाया था। 18 जून को ट्रंप पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के साथ लंच करने वाले थे, और भारतीय अधिकारियों को शक था कि ट्रंप, मोदी को मुनीर के साथ फोटो खिंचवाने के लिए फंसा सकते हैं। यह भारत के लिए सियासी तौर पर खतरनाक होता, क्योंकि असीम मुनीर पर पहलगाम हमले (22 अप्रैल 2025, 26 पयर्टक मरे) में आतंकियों को समर्थन का आरोप है।
मोदी ने ट्रंप का न्योता ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि उनकी क्रोएशिया यात्रा पहले से तय है। विक्रम मिस्री ने बताया, 'मोदी ने ट्रंप को साफ मना कर दिया। भारत किसी भी हाल में मुनीर के साथ मंच साझा नहीं करेगा।' मोदी ने ट्रंप के फोटोशूट के जाल को समझ लिया और चतुराई से बच निकले। यह चालबाजी ट्रंप को नागवार गुजरी, और इसके बाद उन्होंने भारत को घेरने की कोशिश शुरू कर दी।
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की सैन्य ताकत का प्रदर्शन
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई, जब भारत ने पहलगाम हमले का जवाब देने के लिए पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए। चार दिन (7-10 मई) तक चले इस टकराव में दोनों देशों ने मिसाइल, ड्रोन और लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया। भारत ने इसे 'सटीक और गैर-उत्तेजक' हमला बताया, जबकि पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। विक्रम मिस्री ने कहा, 'पाकिस्तान ने 9-10 मई की रात हमला किया, लेकिन भारत की जवाबी कार्रवाई ने उनके कई हवाई अड्डों को तबाह कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम की गुहार लगाई। मोदी ने ट्रंप को बताया कि भारत अब आतंकवाद को 'प्रॉक्सी वॉर' नहीं, बल्कि 'युद्ध' मानता है, और ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है।
50% टैरिफ: ट्रंप की सजा या सियासी दबाव?
ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया, जिसमें से आधा भारत के रूसी तेल खरीद को लेकर सजा बताया गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा और इसका मकसद रूस की तेल आय को कम करना है। ट्रंप ने भारत को 'महाराजा ऑफ टैरिफ्स' तक कह डाला। राहुल गांधी ने इसे 'आर्थिक ब्लैकमेल' करार दिया और कहा, 'ट्रंप भारत को अनुचित व्यापार समझौते के लिए मजबूर कर रहे हैं।' लेकिन भारत ने झुकने से इनकार कर दिया। मोदी ने कहा, 'हम अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के हितों से समझौता नहीं करेंगे। मुझे भारी कीमत चुकानी पड़े, तो मैं तैयार हूं।'
पाकिस्तान को फायदा, भारत को नुकसान?
ट्रंप का पाकिस्तान के प्रति रुख भारत के लिए चिंता का विषय है। ब्लूमबर्ग की एक और रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ट्रंप की नीतियों का फायदा उठाया और बिना ज्यादा विरोध के अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हासिल कर लिया। ट्रंप ने असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में लंच कराया, और उनके समर्थकों ने पाकिस्तान के 'तेल और कॉपर भंडार' में निवेश की बात की।
मोदी का मास्टरस्ट्रोक: रूस और चीन की ओर झुकाव
ट्रंप की सख्ती के जवाब में भारत ने चीन और रूस के साथ रिश्ते मजबूत करने शुरू कर दिए। मोदी 2025 में SCO समिट के लिए चीन जाएंगे, जो सात साल बाद उनकी पहली यात्रा होगी। चीन के राजदूत ने X पर लिखा, 'ट्रंप के दबाव को देखते हुए भारत का फैसला सही है।' मोदी ने व्लादिमीर पुतिन से भी बात की और उन्हें भारत आने का न्योता दिया। Eric Garcetti (पूर्व अमेरिकी राजदूत) ने चेतावनी दी, 'ट्रंप की नीतियां भारत-अमेरिका रिश्तों को दशकों पीछे ले जा सकती हैं।
क्या है असली खेल?
ट्रंप का भारत पर टैरिफ हमला और पाकिस्तान के साथ नजदीकी एक सियासी खेल का हिस्सा है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत की ताकत और मोदी की चतुराई ने ट्रंप के फोटोशूट के दांव को नाकाम कर दिया, लेकिन इसका खामियाजा भारत को टैरिफ के रूप में भुगतना पड़ रहा है। मोदी ने ट्रंप को साफ बता दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा। क्या ट्रंप की सजा भारत को रूस और चीन के और करीब ले जाएगी? क्या यह सियासी शीत युद्ध लंबा चलेगा? बहस गर्म है, और दुनिया की नजरें इस सियासी ड्रामे पर टिकी हैं।
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