Iran War Timeline: 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक US-ईरान के बीच कब-क्या हुआ? एक क्लिक में देखिए पूरी टाइमलाइन
Iran War Timeline: अमेरिका और ईरान 40 दिन की जंग के बाद दोनों देश सीजफायर पर राजी हो गए हैं। 28 फरवरी की सुबह (भारतीय समयानुसार) यह युद्ध शुरू हुआ और 8 तारीख को तकरीबन रात तीन बजे सीजफायर की घोषणा हुई। हर तरफ इस सीजफायर को सेलिब्रेट किया गया लेकिन इसके निशान हमेशा के लिए रह गए। ईरान में सिर्फ जान-माल नहीं बल्कि हेरिटेज के लेवल पर नुकसान हुआ है जबकि अमेरिका ने साल 2003 के बाद इतनी बड़ी तादाद में किसी भी जंग में अपने सैनिकों को खोया है। सीजफायर की घोषणा से पहले सभी 39 दिन इस जंग ने एक से बढ़कर एक बुरे दौर और अनिश्चितता देखी, इसलिए इस युद्ध का टाइमलाइन जानना बेहद जरूरी हो जाता है।
इजरायली हमलों से शुरुआत
28 फरवरी, 2026: अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। जिसमें तेहरान में सरकारी दफ्तरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। दिन चढ़ने के साथ इस युद्ध में वो अपडेट भी आया जिसके लिए दुनिया के ज्यादातर शिया लोग डरे हुए थे। ईरानी मीडिया ने घोषणा कर दी कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की एक स्ट्राइक में मौत हो गई। इसके अलावा कई दूसरे मिलिट्री लीडर भी मारे गए।

लड़कियों के स्कूल पर हमला और ईरान का गुस्सा
दक्षिणी ईरान के एक प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले में 175 से ज्यादा लोग मारे गए। जिसमें से ज्यादातर लड़कियां थीं। जिसके लिए अमेरिका की खूब लानत-मलानत हुई। वहीं, जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने सऊदी, UAE, कुवैत, कतर और बहरीन समेत कई खाड़ी देशों में इजरायली और अमेरिकी सैन्य अड्डे और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया।
1 मार्च:
कुवैत के पोर्ट शुएबा में ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए, जो युद्ध में मरने वाले पहले अमेरिकी बने। ईरान के सपोर्ट से लेबनान में चल रहे हिजबुल्लाह गुट ने ईरानी सुप्रीम लीडर की हत्या के बदले में इजरायल पर रॉकेट दागे।
8 मार्च:
ईरान ने दिवंगत सुप्रीम लीडर के बेटे मोज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे कभी स्वीकार न करने वाला विकल्प बताया।
11 मार्च और समुद्री रास्तों पर हमला:
इस दिन एक ब्रिटिश समुद्री एजेंसी ने बताया कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन जहाजों पर हमला किया। साथ ही, ईरान ने थाईलैंड के कार्गो शिप पर हमले की जिम्मेदारी ली, जिससे इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ीं।
12 मार्च- मोजतबा का राजतिलक:
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ने सैन्य बलों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का आदेश दे दिया। इसके साथ ही, इराक में एक KC-135 जो हवा में दूसरे फाइटर जेट में ईंधन भरने के लिए इस्तेमाल होता है, क्रैश हो गया। जिसमें 6 अमेरिकी जवान मारे गए। इसी दिन अमेरिकी के एयरक्राफ्ट करियर USS Gerald में आग लगने की घटना सामने आई, जिसके कुछ दिन बाद उसे युद्ध छोड़कर जाना पड़ा। हालांकि आग लगने के कारण साफ नहीं हो सके।

13 मार्च:
अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर बमबारी की जो कि ऑयल एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ा ठिकाना है। आलोचना हुई तो ट्रंप ने उसे मिलिट्री टारगेट बताकर टालने की कोशिश की।
17 मार्च:
इजरायल ने ईरान के दो सीनियर लीडर, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारीजानी और IRGC के टॉप कमांडर और बासिज मिलिशिया के चीफ गुलामरेजा सोलेमानी को मार गिराया।
18 मार्च:
इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस प्लांट पर हमला किया। जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाया था, जो दुनिया का सबसे बड़ा नैचुरल गैस एक्सपोर्ट का प्लांट है।
23 मार्च:
राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने पर बातचीत कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच 28 मार्च को, यमन के ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे इजरायल ने रोक लेने का दावा किया।
3 अप्रैल:
ईरान ने अमेरिकी एयरफोर्स के एक F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराया, जिसमें दो एयरमेन थे। एक को उसी दिन बचा लिया गया, जबकि दूसरे की तलाशी दो दिन चली। यह युद्ध में गिराया गया पहला अमेरिकी फाइटर जेट था।
7 अप्रैल:
डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी, "अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलता, तो आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म कर देंगे, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।" उन्होंने 7 अप्रैल को रात 8 बजे (GMT) की डेडलाइन रखी थी। यह पांचवीं डेडलाइन थी, इससे पहले 21 मार्च (48 घंटे), 23 मार्च (5 दिन के लिए सीजफायर), 26 मार्च (10 दिन के लिए सीजफायर) और 4 अप्रैल (48 घंटे) को भी समय सीमाएं जारी की गई थीं। 7 अप्रैल की नई डेडलाइन भारतीय समयानुसार 8 अप्रैल को सुबह 5.30 बजे पूरी होनी थी।
8 अप्रैल और सीजफायर:
अमेरिकी पोप, डेमोक्रेटिक सीनेटर्स और दुनियाभर में हो रहे विरोध के चलते ट्रंप ने सीजफायर के प्रस्ताव को मान लिया और दो सप्ताह तक हमले न करने की बात कही।10 अप्रैल: इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिकी नेताओं की बैठक होना बताया जा रहा है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो पाकिस्तान में इस जंग का भविष्य लिखा जाएगा।
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