ये हैं बाज़ों के बादशाह
18 नवंबर को दुनिया के कई देशों में विश्व फ़ाल्कनरी दिवस मनाया जाता है. फ़ाल्कनरी यानी बाज़ को पालने और कलाबाज़ी सिखाने वाले लोग.
माना जाता है कि बाज़ की नज़र इंसान से 10 गुना ज़्यादा तेज़ होती है. इंसानी सभ्यता में सैकड़ों सालों तक बाज़ों का इस्तेमाल शिकार में मदद के लिए भी किया जाता रहा है.
क़रीब 60 फ़ीसदी बाज़ जन्म के पहले साल में ज़िंदा नहीं रह पाते हैं. औसतन एक बाज़ की उम्र 13 साल होती है. हालांकि कुछ बाज़ ऐसे भी रहे हैं, जिनकी उम्र 25 को छू पाई.
मिस्र में इस मौक़े पर बाज़ों के ये पहरेदार अपने-अपने बाज़ों के साथ इकट्ठा हुए.
एक रिपोर्ट के मुताबिक़, बाज़ साल में क़रीब 15 हज़ार मील से ज़्यादा का सफ़र तय करता है.
हर साल ये आयोजन एलेक्ज़ेंड्रिया के बोर्ग-अल-अरब में होता है.
बाज़ अपनी पैनी निगाह की वजह से निशाना साधने में तेज़ होता है और चोंच का इस्तेमाल हथियार की तरह करता है.
आयोजन में शिरकत करने वाले बाज़ों को लाइन में बिठाया जाता है. बाज़ दुनिया का सबसे तेज़ पंछी है, जो क़रीब 200 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ता है.
मिस्र में बाज़ का एक अपना इतिहास रहा है. इस तस्वीर में 11 साल का अम्मार अपने बाज़ अशक़ार के साथ दिख रहा है.












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