सूर्य के पीछे कोई विस्फोट हुआ है, नतीजा क्या होगा ? NOAA के वैज्ञानिकों ने बताया
नई दिल्ली, 1 अगस्त: वैज्ञानिकों ने सूर्य के पिछले हिस्से में एक बड़ा विस्फोट देखा है। इस विस्फोट के पूरी तरह से आकलन करने में अभी एक हफ्ते का समय लग सकता है। लेकिन, वैज्ञानिकों के एक वर्ग की राय है कि इसके चलते धरती से एक भू-चुंबकीय तूफान के टकराने की आशंका खारिज नहीं की जा सकती। क्योंकि, सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने विस्फोट वाले क्षेत्र की अभी तक जो धुंधली तस्वीरें देखी हैं, उसमें भी सूरज से तपता हुआ मलबा उड़ते देखा गया है। एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ हफ्तों से शांत सूरज की सतह इस विस्फोट की वजह से फिर से अशांत हो जा सकता है।

इसकी तीव्रता शायद कम आंकी गई है-स्पेस वेदर
जैसे ही सूर्य अपने सौर चक्र में अपनी गतिविधि के चरम के करीब आया है, हमारे सौर मंडल के इस तारे के उत्तरपूर्वी भाग के पीछे एक बड़ा विस्फोट हुआ है। सौर वेधशालाओं ने विस्फोट के अंश और टुकड़े देखे हैं, जो पृथ्वी की कक्षा से देखने पर धुंधले दिखते हैं। यह विस्फोट 31 जुलाई को देखा गया है और पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों ने लंबे समय तक के लिए सी9.3 श्रेणी का सौर भड़काव रिकॉर्ड किया है। हालांकि, सौर गतिविधियों पर नजर रखने वाले स्पेस वेदर के मुताबिक, 'इसकी तीव्रता शायद कम आंकी गई है, क्योंकि यह आंशिक रूप से सूर्य के किनारे से ढंक गया था। नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) ने विस्फोट वाली जगह से तपता हुआ मलबा उड़ते देखा। '

इस हफ्ते और ज्यादा जानकारी मिलने की संभावना
हालांकि, सूरज पर हुआ यह महाविस्फोट बहुत ही शक्तिशाली था, लेकिन विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि इससे भड़कने वाली आग की रेखा में पृथ्वी नहीं है। वैसे, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस हफ्ते में वह उसके सक्रिय क्षेत्र को देख पाएंगे। स्पेस वेदर ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'पृथ्वी आग की रेखा में नहीं है। विस्फोट महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इस हफ्ते के अंत में सूर्य के उत्तरपूर्वी छोर पर सक्रिय क्षेत्र में उभर सकता है। एक नया सनस्पॉट ग्रुप इसकी हफ्तों की अपेक्षाकृत शांति का अंत कर सकता है।'

भू-चुंबकीय तूफान के टकराने की आशंका-वैज्ञानिक
इस बीच अमेरिका स्थित नेशनल ओशीऐनिक एंड ऐट्मोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) का अनुमान है कि सूर्य पर हुए विस्फोट की वजह से पृथ्वी से हल्के जी-1 क्लास के भू-चुंबकीय तूफान के टकराने की आशंका है। यह घटना सूर्य के वायुमंडल में एक दक्षिणी सुराख पर एक हुए विस्फोट के कारण है, जिसने पृथ्वी समेत बाकी ग्रहों की ओर सौर हवा और गैसीय सामग्री की एक उच्च गति वाली धारा प्रवाहित की है।

भू-चुंबकीय तूफान से क्या होता है ?
भू-चुंबकीय तूफान वह प्राकृतिक घटना है, जिसके चलते पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर में बड़ी गड़बड़ी पैदा होती है। यह तब होती है, जब सौर हवा के साथ आने वाली बहुत ही प्रभावी ऊर्जा पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष वातावरण से मिलती है। सूर्य के 11 साल की गतिविधि चक्र के तेज होने के साथ ही कोरोनल मास इजेक्शन( सीएमई) और सोलर फ्लेयर्स (सौर भड़काव)जैसी घटनाओं के दोहराने प्रवृत्ति बढ़ रही हैं।

सूर्य पर हुए विस्फोट का नतीजा क्या होगा ?
GOES-18 सैटेलाइट पर लगे हुए सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजर ने भी सूर्य पर बड़े विस्फोट की घटना को कैद किया है। यह सैटेलाइट 1 मार्च को ही लॉन्च किया गया था। इसने 10 जुलाई को इसके नीचे दाएं हिस्से में कोरोनल मास इजेक्शन( सीएमई) को भी अपने कैमरे में कैद किया था। नेशनल ओशीऐनिक एंड ऐट्मोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने एक बयान में कहा, 'सौर विस्फोटों के आकार और प्रक्षेप पथ के आधार पर, पृथ्वी के पास के अंतरिक्ष और पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर पर संभावित भू-चुंबकीय तूफान पैदा कर सकते हैं, जो बिजली से संबंधित उपकरणों और संचार और नेविगेशन सिस्टम को बाधित कर सकते हैं। ये सौर तूफान परिक्रमा कर रहे उपग्रहों और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को रेडिएशन नुकसान पहुंचा सकते हैं।'












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