तहरीक-ए-तालिबान ने पाकिस्तानी मीडिया को दी कड़ी चेतावनी, आतंकवादी कहा तो भुगतना होगा अंजाम

तहरीक-ए-तालिबान एक आतंकवादी संगठन है, जो पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना चाहता है और इस संगठन को पाकिस्तान में प्रतिबंधित किया जा चुका है।

इस्लामाबाद, सितंबर 07: आतंकवादियों को पालने और उनका समर्थन करने का नतीजा क्या होता है, ये पाकिस्तान के आज के हालात को देखकर समझा जा सकता है। लेकिन फिर भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान तालिबान, जिसे हरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान कहा जाता है, उसने पाकिस्तानी मीडिया को आतंकवादी बताने के लिए चेतावनी जारी की है।

तहरीक-ए-तालिबान की मीडिया को धमकी

तहरीक-ए-तालिबान की मीडिया को धमकी

प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पाकिस्तान की मीडिया और पत्रकारों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वे उन्हें "आतंकवादी संगठन" कहने से परहेज करें या उनके साथ दुश्मन जैसा व्यवहार किया जाएगा। टीटीपी द्वारा सोमवार को सोशल मीडिया पर स्पष्ट रूप से एक बयान जारी किया गया है, जिसमें तहरीक-ए-तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी ने कहा है कि वे मीडिया कवरेज की निगरानी कर रहे थे, जिसमें टीटीपी को "आतंकवादियों और चरमपंथियों" जैसे घृणित शीर्षकों के साथ पाकिस्तानी मीडिया दिखा रहा है, जो टीटीपी के लिए नाकबिल-ए-बर्दाश्त है।

पाकिस्तानी मीडिया को कड़ी चेतावनी

पाकिस्तानी मीडिया को कड़ी चेतावनी

तहरीक-ए-तालिबान ने पाकिस्तानी मीडिया के लिए कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि टीटीपी को आतंकवादी संगठन बोलना मीडिया और पत्रकारों के पक्षपातपूर्ण भूमिका को दर्शाता है और पत्रकारिता के पेशे के लिए एक कलंक है। जो फौरन बंद होना चाहिए। आपको बता दें कि, पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान एक प्रतिबंधित संगठन है और पाकिस्तान इसे बेड तालिबान कहता है, वहीं अफगानिस्तान तालिबान को पाकिस्तान का पूरा समर्थन हासिल है और पाकिस्तान उसे गुड तालिबान कहता है। लेकिन, गौर से देखें तो दोनों ही एक आतंकवादी संगठन है, जिसका काम लोगों को मौत के घाट उतारना है। पाकिस्तान के पेशावर में टीटीपी के आतंकियों ने ही एक सैनिक स्कूल पर हमला कर करीब डेढ़ सौ बच्चों को बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया था।

आतंकवादी संगठन है तहरीक-ए-तालिबान

आतंकवादी संगठन है तहरीक-ए-तालिबान

निर्विवाद तौर पर तहरीक-ए-तालिबान एक आतंकवादी संगठन है, जिसने पाकिस्तान में दर्जनों बम धमाके किए हैं और पिछले महीने 15 अगस्त को जब काबुल जेल पर तालिबान ने कब्जा किया था, उसके बाद तालिबान ने तहरीक-ए-तालिबान के 2300 आतंकवादियों को काबुल जेल से रिहा कर दिया था, जो एक बार फिर से पाकिस्तान में घुस रहे हैं और पाकिस्तान सरकार ने ऐसी आशंका जताई है कि आने वाले वक्त में पकिस्तान में कई आतंकवादी हमले हो सकते हैं। वहीं, पाकिस्तानी मीडिया ने टीटीपी को एक आतंकवादी संगठन कहकर संबोधित करती है, जिसकी वजह से टीटीपी भड़क गया है और उसने पाकिस्तान मीडिया को कड़ी चेतावनी दी है।

प्रतिबंधित संगठन है तहरीक-ए-तालिबान

प्रतिबंधित संगठन है तहरीक-ए-तालिबान

आपको बता दें कि कई बम धमाको में शामिल होने की वजह से पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान को प्रतिबंधित कर दिया गया था। टीटीपी, विभिन्न आतंकवादी संगठनों का एक समूह है, जिसे 2007 में बनाया गया था और पाकिस्तान सरकार ने अगस्त 2008 में इसे एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। बैतुल्ला महसूद टीटीपी का पहला प्रमुख नेता था जो 2009 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था। पाकिस्तान सरकार ने 2014 में टीटीपी की अन्य शाखाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही पाकिस्तान सरकार ने मीडिया पर इस आतंकवादी संगठन का महिमामंडन करने का आरोप लगाया था।

तहरीक-ए-तालिबान ने क्या कहा?

तहरीक-ए-तालिबान ने क्या कहा?

तहरीक-ए-तालिबान के प्रवक्ता खुरासानी ने कथित तौर पर कहा किस मीडिया ने एक पार्टी के इशारे पर टीटीपी के लिए इस तरह के आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिसने तहरीक-ए-तालिबान को एक विरोधी के तौर पर पेश किया है। इसलिए मीडिया उसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के नाम से बुलाए। अन्यथा, मीडिया पेशेवर बेईमानी करेगा और अपने लिए दुश्मन पैदा करेगा। आपको बता दें कि पाकिस्तान में कई पत्रकार हमेशा से आतंकवादियों के निशाने पर रहे हैं और दर्जनों पत्रकारों को आतंकवादी मार भी चुके हैं और कई पत्रकारों को किडनैप भी कर चुके हैं। खासकर फाटा और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत आतंकवादियों का काफी उत्पात रहा है।

30 से ज्यादा पत्रकारों की हत्या

30 से ज्यादा पत्रकारों की हत्या

पाकिस्तान के फाटा और केपी में आतंकवादी अब तक 30 से ज्यादा पत्रकारों की हत्या कर चुके हैं। कुछ मामलों में मीडियाकर्मियों के परिवार के सदस्यों को या तो मार दिया गया या फिर उन्हें दूसरे जगह पर भागने के लिए मजबूर किया गया। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इतने पत्रकारों की हत्या के बाद भी आतंकवादियों के खिलाफ कभी कार्रवाई नहीं की गई और ना ही पाकिस्तान सरकार ने मृतक पत्रकारों के परिवारों की देखभाल करने की कोशिश की और नाही पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराने की कोशिश की।

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