Tarek Fatah: खुद को पाक में जन्मा भारतीय माना, तर्कों से छुड़ाए लोगों के पसीने, शरिया के मुखर विरोधी, Profile

Tarek Fatah का 73 साल की आयु में निधन हुआ। बेटी नताशा ने पिता के निधन की जानकारी दी। पाकिस्तानी मूल के स्तंभकार औऱ लेखक तारिक का जीवन चर्चित और विवादित दोनों रहा। तारिक की लाइफ के बारे में जानिए

tarek fatah

Tarek Fatah का 73 साल की आयु में निधन हो गया। कैंसर पीड़ित तारिक के निधन की जानकारी उनकी बेटी ने ट्वीट कर दी। तारिक कई कारणों से चर्चित रहे हैं। बात पाकिस्तान के अस्तित्व की हो या हिदुस्तानी सनातन संस्कृति की, तारिक हमेशा बेबाक रहे।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ

तारिक का जन्म भारत के विभाजन के बाद कराची में हुआ था। 20 नवंबर, 1949 को जन्मे तारिक फतेह कनाडा और पाकिस्तान दोनों देशों का नागरिकता रखते थे। 2015 में भारत दौरे पर राजनाथ सिंह के साथ इनकी तस्वीर काफी लोकप्रिय हुई थी।

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थरूर और तारिक की तस्वीर

अपनी बेबाकी के लिए लोकप्रिय सांसद शशि थरूर के साथ भी तारिक फतेह की तस्वीर एक संसदीय कार्यक्रम के दौरान जनवरी, 2018 में क्लिक की गई थी, जो खूब चर्चित रही थी।

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तारिक हिंदुस्तान के बेटे

बेटी ने निधन के बाद ट्विटर पर कई तस्वीरें शेयर की हैं। सोशल मीडिया यूजर्स भी तारिक को अपने तरीकों से याद कर रहे हैं। पत्रकारों की बिरादरी भी इनसे जुड़ी यादें शेयर की हैं।

LGBTQ के अधिकारों का पुरजोर समर्थन

तारिक फतेह के निधन पर इस बात का जिक्र जरूरी है कि उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की वकालत की। कराची में सेंट लॉरेंस ब्वॉयज स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑफ कराची से पढ़े तारेक ने LGBTQ समुदाय के अधिकारों की पुरजोर वकालत की।

पाकिस्तान में जन्मे भारतीय

शरिया कानून को मुखर विरोधी रहे तारिक फतेह खुद को पाकिस्तान में जन्मे भारतीय बताते थे। उन्होंने इस्लाम के उदार और आधुनिक पक्ष का समर्थन किया। कई इंटरव्यू में तारिक कहते हैं कि वे एक पंजाबी हैं जो इस्लाम में जन्मे।

भारत के विभाजन की तीखी आलोचना करने वाले तारिक फतेह का परिवार 1947 में विभाजन के बाद बॉम्बे से कराची चला गया था। बायोकेमेस्ट्री में डिग्री लेने के बाद तारिक 1970 में पत्रकारिता की तरफ मुड़े।

1960 और 1970 के दशक में तारिक की छवि वामपंथी छात्र नेता की रही। रिपोर्ट्स के अनुसार सैन्य हुकूमत के दौरान इन्होंने जेल में भी कुछ वक्त गुजारा। 1977 में जिया-उल-हक के शासनकाल में तारिक पर देशद्रोह का आरोप लगा और पाक में प्रवेश पर प्रतिबंध लग गया।

पाकिस्तान छोड़ने के बाद तारिक सऊदी अरब चले गए। बाद में 1987 में इन्होंने कनाडा में शिफ्ट होने का फैसला लिया। कनाडा में तारिक ओंटारियो न्यू डेमोक्रैटिक पार्टी (NDP) के भी सदस्य रहे। मीडिया में 1996 से 2006 तक इन्होंने मुस्लिम क्रॉनिकल नाम का टीवी शो होस्ट किया।

2018 के बाद फतेह ने "व्हाट द फतह" को होस्ट किया। न्यू दिल्ली टाइम्स ने अपने YouTube चैनल पर इस प्रोग्राम को होस्ट किया। टॉक शो मुख्य रूप से वर्तमान अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक रुझानों पर केंद्रित है। यह शो भारत, पाकिस्तान और कनाडा में बेहद लोकप्रिय है।

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