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तालिबान ने सरकारी कर्मचारियों को दी सार्वजनिक माफी, फौरन काम पर लौटने को कहा, नेशनल टीवी लॉन्च

काबुल पर कब्जा करने के दूसरे दिन तालिबान ने देश के कर्मचारियों को फौरन काम कर लौटने को कहा है।

काबुल, अगस्त 17: काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने "सभी सरकारी अधिकारियों के लिए सामान्य माफी" की घोषणा की है और उनसे तुरंत काम पर लौटने का आग्रह किया है। तालिबान की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "सभी के लिए आम माफी की घोषणा की गई है... इसलिए आपको अपने नियमित जीवन की शुरुआत पूरे विश्वास के साथ करनी चाहिए।"

सामान्य माफी की घोषणा

सामान्य माफी की घोषणा

काबुल पर कब्जा करने के दूसरे दिन तालिबान ने देश के कर्मचारियों को फौरन काम कर लौटने को कहा है। इससे पहले सवाल उठ रहे थे कि आखिर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में काम-काज कैसे होगा और सरकारी कर्मचारियों का क्या होगा? तालिबान देश में अलग सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति करेगा या फिर पुराने कर्मचारियों को ही काम करने की इजाजत देगा और अब तालिबान की तरफ से कर्मचारियों को एक साथ माफी देने की घोषणा की गई है। तालिबान ने कर्मचारियों को कहा है कि वो पूरे विश्वास के साथ दफ्तर आएं और काम करें। इससे पहले तालिबान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें तालिबान के लड़ाके एक पार्क में खिलौने वाले घोड़े पर खेलते नजर आ रहे हैं, वहीं एक वीडियो में तालिबान के लड़ाके पार्क में बच्चों वाले कार पर सवारी करते दिख रहे हैं।

तालिबान के साथ बातचीत

तालिबान के साथ बातचीत

अफगानिस्तान में तेजी से हो रहे घटनाक्रम के बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि काबुल में भारत के राजदूत और उनके भारतीय कर्मचारी तुरंत भारत चले जाएंगे। इसके साथ ही भारत सरकार लगातार काबुल में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी तालिबान और अफगानिस्तान के लोकतंत्र समर्थक नेताओं के बीच सत्ता को लेकर बातचीत चल रही है। तालिबान के वरिष्ठ नेता अमीर खान मुत्ताकी के बारे में कहा जा रहा है कि वह काबुल के राजनीतिक नेतृत्व के साथ बातचीत कर रहे हैं, जिसमें अब्दुल्ला अब्दुल्ला और अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई शामिल हैं।

बंदी बनाए गये नेताओं के साथ क्या होगा?

बंदी बनाए गये नेताओं के साथ क्या होगा?

अलजजीरा से बातचीत के दौरान तालिबान ने कहा था कि वो अफगानिस्तान में 'इस्लामी अमीरात' सरकार का निर्माण करेगा और उस सरकार में लोकतंत्र समर्थक नेताओं को जगह दी जाएगी या नहीं, इसका फैसला तालिबान के शीर्ष नेता करेंगे। लेकिन, इन सबके बीच अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होते ही अफगानिस्तान के नेता अपनी जान बचाने के लिए अलग अलग देशों में शरण ले रहे है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके सहयोगी अफगानिस्तान छोड़ चुके हैं तो अफगानिस्तान सरकार के कई बड़े नेता भारत आ चुके हैं, वहीं कई बड़े नेताओं के भारत आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, भी तक तालिबान की तरफ से साफ नहीं किया गया है कि जिन नेताओं को उसने बंदी बना रखा है, उनके साथ क्या किया जाएगा। आपको बता दें कि तालिबान ने कई प्रांतों के गवर्नर और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बंदी बना रखा है।

तालिबान का नेशनल टीवी

तालिबान का नेशनल टीवी

इन सबके बीच अफगानिस्तान के न्यूज चैनल टोलो न्यूज के रिपोर्टर ने एक ट्वीट करते हुए दावा किया है कि तालिबान ने अपना नेशनल टीवी बनाया है। टोलो न्यूज के रिपोर्टर अब्दुल्लाह कमरी ने एक ट्वीट के जरिए कहा है कि ये अफगानिस्तान का नेशनल टीवी है। इस तस्वीर में तालिबानी नेताओं के लिबास में ही एक एंकर को न्यूज पढ़ते हुए दिखाया जा रहा है। वहीं बैकग्राउंड में इस्लामिक धार्मिक बातें लिखी हुई हैं। ये न्यूज एंकर पारंपरिक न्यूज एंकर से बिल्कुल अलग दिख रहा है। इससे पहले तालिबान ने कंधार रेडियो स्टेशन को जब्त कर लिया था और रेडियो पर म्यूजिक बजाने पर बैन लगा दिया गया है। अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि अफगानिस्तान में टीवी पर फिल्म दिखाने की आजादी दी गई है या फिर फिल्मों को भी बैन कर दिया गया है।

रेडियो को लेकर तालिबान का फरमान

तालिबान ने पिछले हफ्ते एक वीडियो जारी किया था, जिसमें एक अज्ञात 'विद्रोही' ने कंधार के मुख्य रेडियो स्टेशन को अपने कंट्रोल में लेने की घोषणा की थी। इस वीडियो के जरिए तालिबान ने घोषणा की थी, कि अब से कंधार रेडियो स्टेशन से गाने नहीं बजेंगे और रेडियो स्टेशन का नाम बदलकर 'वॉयस ऑफ शरिया' या 'इस्लामी कानून' कर दिया गया है। तालिबान ने कहा कि, सभी कर्मचारी रेडियो स्टेशन में मौजूद हैं और अब से इस रेडियो स्टेशन के जरिए सिर्फ कुरान के समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और इस्लामी पाठ का प्रसारण किया जाएगा। तालिबान ने साफ कहा है कि अब रेडियो स्टेशन के जरिए मनोरंजन करने वाले गाने नहीं बजाए जाएंगे। हालांकि, अभी तक इसका पता नहीं चल पाया है कि रेडियो स्टेशन में काम करने वाले पुराने कर्मचारी ही काम करेंगे या फिर उनके साथ क्या किया गया है।

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