तालिबानी ने पहली बार खुलकर माना, दूसरा घर है पाकिस्तान, भारत के साथ रिश्तों पर आया बड़ा बयान
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान तालिबानके लिए "दूसरे घर जैसा है"।
काबुल, अगस्त 26: पाकिस्तान पर लगातार अफगानिस्तान के लोग आरोप लगा रहे हैं कि वहीं से तालिबान की पूरी मदद की गई है और पाकिस्तान की वजह से ही तालिबान ने अफगानिस्तान के ऊपर कब्जा किया है, लेकिन अब तालिबान ने खुलकर कह दिया है कि पाकिस्तान के साथ उसका दोस्ताना संबंध है और पाकिस्तान तालिबानी आतंकियों के लिए दूसरे घर के जैसा है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ने खुलकर पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को कबूल कर लिया है।
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दूसरा घर है पाकिस्तान
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान तालिबानके लिए "दूसरे घर जैसा है"। इसके साथ ही तालिबानी प्रवक्ता ने कहा कि तालिबान ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंधों को गहरा करने की कसम खाई है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने यह भी कहा कि तालिबान भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है। जबीउल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान के साथ एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि, "अफगानिस्तान पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा साझा करता है। जब मजहब की बात आती है तो हम परंपरागत रूप से एकसाथ होते हैं, दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के साथ मिलते हैं। इसलिए हम पाकिस्तान के साथ संबंधों को और गहरा करने की उम्मीद कर रहे हैं।"

पाकिस्तान पर बोला तालिबान
हालांकि, तालिबानी प्रवक्ता ने इस बात से इनकार कर दिया कि अफगानिस्तान पर कब्जा करने में तालिबान की मदद पाकिस्तान ने की है। तालिबानी प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान पर कब्जा करने के लिए तालिबान के हमले में पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं है। जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पड़ोसी देश ने कभी भी उनके मामलों में "हस्तक्षेप" नहीं किया है। मुजाहिद ने आगे कहा कि पाकिस्तान और भारत को अपने बकाया मुद्दों को हल करने के लिए एक साथ बैठना चाहिए, यह कहते हुए कि तालिबान भारत सहित सभी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है।

अफगानिस्तान में कैसी होगी सरकार?
अफगानिस्तान में सरकार गठन की अटकलों के बीच तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि वे ऐसी सरकार चाहते हैं जो मजबूत हो और इस्लाम पर आधारित हो और जिसमें सभी अफगान शामिल हों। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बुधवार को बताया कि तालिबान ने ग्वांतानामो के पूर्व बंदी मुल्ला अब्दुल कय्यूम जाकिर को कार्यवाहक रक्षा मंत्री नामित किया है। रायटर ने जानकारी के लिए अल जज़ीरा समाचार चैनल का हवाला दिया है। हालांकि, तालिबान ने अब तक औपचारिक रूप से नियुक्तियों की घोषणा नहीं की है, लेकिन मुजाहिद ने एआरवाई न्यूज को बताया कि अमेरिका के 31 अगस्त को अफगानिस्तान छोड़ने से पहले एक सरकार होगी। मुजाहिद ने कहा, "हम इस पर काम कर रहे हैं।' तालिबानी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका को अफगानिस्तान से निकलने में बिल्कुल देरी नहीं करनी चाहिए।

अफगानी धरती का गलत इस्तेमाल नहीं
तालिबानी प्रवक्ता मुजाहिद ने पाकिस्तानी चैनल से बातचीत में कहा कि तालिबान किसी अन्य देश के खिलाफ अफगान धरती का इस्तेमाल नहीं होने देगा। जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि तालिबान ने "युद्धग्रस्त देश में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करते हुए" सभी क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया है। हालांकि, कई समाचार आउटलेट्स ने दो दशकों के बाद सत्ता में लौटने के बाद से अफगानिस्तान में तालिबान की बर्बरता की सूचना दी है। फॉक्स न्यूज को एक वीडियो मिला, जिसमें दावा किया गया है कि तालिबान लड़ाके काबुल और अन्य जगहों की सड़कों पर घूमते हैं और पूर्व सरकारी कर्मचारियों की तलाश में गोलियां चलाते हैं। फॉक्स चैनल ने तखर प्रांत की एक घटना के बारे में भी बताया है, जहां मंगलवार को तालिबान लड़ाकों ने एक महिला को सार्वजनिक रूप से बिना सिर ढके रहने के कारण मार डाला।
पाकिस्तान का विरोध
तालिबानी प्रवक्ता ने जहां खुलेतौर पर कहा दिया है कि तालिबानी आतंकियों के लिए पाकिस्तान दूसरे घर जैसा है, वहीं पिछले महीने पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शाह रशीद ने कहा था कि तालिबान के लोग पाकिस्तान में इलाज कराने आते हैं। वहीं, अफगानिस्तान के पत्रकारों ने दावा किया है कि तालिबान के कब्जे के बाद भारी संख्या में पाकिस्तानी सेना के जवाब काबुल पहुंच गये हैं और हर जगह तलाशी ली जा रही है। अफगान पत्रकार हबीब खान ने दावा किया है कि अफगानिस्तान में जो कुछ भी तालिबान कर रहा है, वो पाकिस्तान का प्लान है। हबीब खान ने कहा कि काबुल में हर जगह तालिबान और पाकिस्तान के लोग हैं। अफगान आर्मी को खत्म कर दिया गया है और दूतावासों को खत्म कर दिया है। अफगानिस्तान में वैश्विक मदद आना बंद हो चुका है और सबसे खतरनाक बात ये है कि पाकिसतानी आतंकी, जासूस, डिप्लोमेट और पत्रकार पूरे काबुल में घूम रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान के पत्रकारों को देश छोड़ना पड़ रहा है।












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