ईरान से लड़ने के लिए तालिबान ने हजारों लड़ाकों को बॉर्डर पर भेजा, पानी पर कब्जे को लेकर होगी जंग?
ईरान और तालिबान के बीच पानी पर कब्जे को लेकर विवाद फिर से गहरा गया है। तालिबान ने बॉर्डर इलाके में हजारों सैनिकों और सैकड़ों आत्मघाती हमलावरों को भेजा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
आपको बता दें कि ईरान भयंकर सूखे का सामना कर रहा है। देश के कई इलाके भीषण तापमान से जल रहे हैं। इस बीच अफगानिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे हेलमंद की जल नदी पर विवाद के कारण ईरान की समस्या बढ़ गई है।

इस बीच ईरान ने तालिबान को चेतावनी देते हुए 1973 के समझौते का सम्मान करने या परिणाम भुगतने का चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि तालिबान हेलमंद नदी जल बंटवारे के समझौते पर अमल नहीं कर रहा है।
क्या है हेलमंद नदी समझौता?
हेलमंद नदी पश्चिमी हिंदुकुश पर्वत शृंखला में काबुल के पास से निकलती है। 1,150 किलोमीटर लंबी यह अफगानिस्तान की सबसे लंबी नदी है जो खेती के लिए महत्वपूर्ण पानी उपलब्ध कराती है और सीमा के दोनों ओर लाखों लोग इसका उपयोग करते हैं।
ईरान और अफगानिस्तान के बीच जल बंटवारे को लेकर 1973 में हेलमंद नदी समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार, ईरान को 22 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड की प्रवाह दर पर सालाना 820 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलने की बात कही गई थी।
हालांकि, देश में चार दशकों के संघर्ष के कारण समझौते को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया जा सका है। 1973 में हेलमंद नदी समझौते के ही साल अफगानिस्तान में राजनीतिक विद्रोह शुरू हो गया। इसके अगले ही साल अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का कब्जा हो गया था। इसके बाद साल 1995 में तालिबान के आगमन ने समझौते को कभी अमल में आने नहीं दिया।
ऐसे में इस नदी के पानी का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए तालिबान ने कई बांध बांध लिए हैं। ईरान का कहना है कि तालिबान ने नियंत्रण हासिल करने के बाद से जल प्रवाह कम कर दिया है। इस वजह से उसे इस नदी के हिस्से का सिर्फ 4 फीसदी पानी ही मिलता है।
वहीं, तालिबान का दावा है कि, अफगानिस्तान अपने जल संसाधनों का केवल 25 फीसदी पानी उपयोग कर पाता है। बाकी ईरान और पाकिस्तान सहित पड़ोसी देशों को जाता है। इससे पहले भी मई महीने में ईरान और तालिबान के बीच बॉर्डर पर पानी के लिए लड़ाई छिड़ गई।
दोनों देशों के बीच ईरान के सिस्तान और अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत की सीमा पर भारी गोलीबारी हुई थी जिसमें तालिबान के एक लड़ाके और ईरानी सेना के 3 सैनिकों की मौत हो गई थी।












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