चार दिन पुरूष घूमने जाएंगे, 3 दिन महिलाएं... तालिबान ने पार्क में टहलने के लिए बनाए नये नियम

तालिबान ने 1996-2001 के बीच अफगानिस्तान पर आखिरी बार शरीयत कानून की कठोर व्याख्या लागू करने के लिए कुख्याति अर्जित की थी।

काबुल, मार्च 28: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार लगातार अलग अलग फरमान जारी कर रहा है और पिछले साल अगस्त महीने में काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान सरकार अभी तक महिलाओं को लेकर आखिरी फैसला नहीं कर पाई है। पिछले हफ्ते लड़कियों के लिए कुछ ही घंटे स्कूल खोलने के बाद तालिबान की तरफ से पार्क में टहलने को लेकर भी नया फरमान जारी किया है।

पार्क में टहलने पर फरमान

पार्क में टहलने पर फरमान

तालिबान ने अफगानिस्तान के पार्कों में टहलने को लेकर नया फरमान जारी किया है और साफ कर दिया है, कि पार्क में महिला और पुरूष एक साथ नहीं टहल सकते हैं। तालिबान ने देश के सभी मनोरंजन पार्कों के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी है, जिसमें साफ किया गया है, कि महिलाएं और पुरूष एक साथ पार्क में नहीं जा सकते हैं। समाचार एजेंसी स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने पार्क में एक साथ महिलाओं और पुरूषों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। समाचार एजेंसी स्पुतनिक ने बताया कि, तालिबान ने पुरुषों को बुधवार से शनिवार तक मनोरंजन पार्क में जाने की अनुमति दी है, जबकि महिलाएं सप्ताह के बाकी तीन दिन पार्क में जा सकती हैं। स्पुतनिक ने कहा कि, यह कदम अफगानिस्तान में लिंग अलगाव नियमों को और लागू करेगा।

मनोरंजन पार्कों पर नये नियम

मनोरंजन पार्कों पर नये नियम

पिछले महीने, तालिबान ने अपने लड़ाकों को अपने हथियारों को मनोरंजन पार्क में ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जो कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल करने के लिए तालिबान की तरफ से उठाए जाने वाला और दुनिया में तालिबान की छवि को नरम करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम माना गया था, लेकिन अगले ही दिन तालिबान की तरफ से पार्कों में महिलाएं और पुरूषों के लिए बने नये नियम ने तालिबान को पहले वाली स्थिति में ही ला दिया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्विटर पर कहा, "इस्लामिक अमीरात के मुजाहिदीन को हथियारों, सैन्य वर्दी और वाहनों के साथ मनोरंजन पार्क में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। (वे) मनोरंजन पार्क के सभी नियमों और विनियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।"

बार बार कन्फ्यूज हो रहा तालिबान?

बार बार कन्फ्यूज हो रहा तालिबान?

तालिबान ने 1996-2001 के बीच अफगानिस्तान पर आखिरी बार शरीयत कानून की कठोर व्याख्या लागू करने के लिए कुख्याति अर्जित की थी। जबकि, इस बार सुन्नी पश्तून समूह दुनिया के सामने एक अधिक उदार चेहरा पेश करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अफगानिस्तान पर पूर्ण नियंत्रण लेने से पहले किए गए कई वादों को पूरा करना अभी बाकी है। कई मानवाधिकार संगठनों ने कहा कि, तालिबान ने अगस्त में सत्ता में लौटने के बाद पूरे अफगानिस्तान में सख्त इस्लामी कानून लागू करना शुरू कर दिया है। तालिबान ने पहले छठी कक्षा से ऊपर की छात्राओं के स्कूलों में जाने पर प्रतिबंध लगाने का एक फरमान जारी किया था। जिसके बाद अफगानिस्तान के कई इलाकों में छात्राओं के भारी विरोध की खबरें आ रही हैं। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, काबुल में भी लड़कियों ने प्रदर्शन किया है और"शिक्षा हमारा पूर्ण अधिकार है" के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने पूरे अफगानिस्तान में लड़कियों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने का आह्वान किया है।

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