विदेशी मददगारों के दरवाजों पर तालिबान ने चिपकाए धमकी भरे खत, सरेंडर नहीं करने पर सजा-ए-मौत
तालिबान की चिट्ठी मिलने के बाद सैकड़ों अफगान खौफ में हैं और अपनी जान बचाने के लिए लगातार छिप रहे हैं। लोगों का कहना है कि कोर्ट में सरेंडर करने के बाद भी तालिबान उन्हें मौत की सजा ही सुनाएगा।
काबुल, अगस्त 31: अमेरिका का अफगानिस्तान मिशन पूरी तरह से खत्म हो गया है और इसके साथ ही अफगानिस्तान पर तालिबान का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया है। लेकिन, इन सबके बीच ऐसे लोग बीच मंझधार में फंस गये हैं, जिन्होंने अमेरिकी सेना की किसी भी तरह से मदद की थी और वो अमेरिका से बाहर नहीं निकल पाए। तालिबान ने ऐसे लोगों को घरों के दरवाजों पर चिट्ठियां चिपकानी शुरू कर दी है, जिसमें कहा गया है कि अगर वो सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर उन्हें मौत की सजा दी जाएगी।

आधी रात तालिबान की चिट्ठी
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने ऐसे लोगों के घरों के दरवाजे पर आधी रात को अमेरिका के आखिरी विमान के काबुल एयरपोर्ट से रवाना होने के साथ ही चिट्ठियां चिपकानी शुरू कर दी है। चिट्ठी में तालिबान की तरफ से फरमान दिया गया है कि वो अपनी गलती मानकर तालिबान के कोर्ट में सरेंडर कर दें और अगर वो तालिबान का आदेश नहीं मानते हैं तो फिर उन्हें मौत की सजा दी जाएगी। ऐसा ही एक धमकी भरी चिट्ठी 34 साल के अफगान नाज को मिली है, जिन्होंने ब्रिटिश निर्माण कंपनी और ब्रिटिश सेना को हेलमंड में सड़कों और कैंप के बैशन में रनवे बनाने में मदद की थी, उन्होंने अफगान पुनर्वास कार्यक्रम के तहत ब्रिटेन में शरण लेने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया। और अब उन्हें तालिबान ने कोर्ट में हाजिर होने या फिर मरने के लिए तैयार होने के लिए कहा है।

तालिबान का मुहर लगा पत्र
पीड़ित नाज ने कहा कि उनके घर के दरवाजे पर तालिबान के लोग चिट्ठी चिपकाकर गये थे और वो चिट्ठी तालिबान की तरफ से भेजा गया आधिकारिक पत्र था। जिसपर तालिबान का मुहर लगा हुआ था। नाज़ ने कल कहा कि 'पत्र आधिकारिक था और तालिबान द्वारा मुहर लगाई गई थी। यह स्पष्ट संदेश है कि वे मुझे मारना चाहते हैं। अगर मैं अदालत में जाता हूं, तो मुझे मौत की सजा दी जाएगी''। नाज ने कहा कि, मैं अदालत जाऊं या नहीं जाऊं, वो मुझे मारेंगे ही, इसीलिए मैं बचने का कोई रास्ता खोज रहा हूं। मैं छिपने के लिए रास्ता खोज रहा हूं, मुझे मदद चाहिए''। वहीं, एक और पीड़ित अफगान, जो ब्रिटिश सैनिकों के लिए अनुवादक का काम करता था, उसे तालिबान ने 'काफिरों का जासूस' कहा है और कहा है कि या तो वो खुद अपने लिए मौत चुन ले, या फिर अदालत में उसे मौत की सजा दी जाएगी।

तालिबान की धमकी भरी चिट्ठी
एक और अफगान पीड़ित ने बताया कि एक ट्रांसलेटर के भाई को धमकी भरी चिट्ठी तालिबान ने भेजी है, जिसमें कहा गया है कि उसने अपने भाई को अपने घर में रखने का गुनाह किया है, लिहाजा उसे मौत की सजा दी गई है। वहीं, एक चिट्ठी मस्जिद से नमाज पढ़कर निकल रहे एक ट्रांसलेटर के जूतों में रखा गया था और उसे कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया था। आपको बता दें कि चिट्ठी भेजकर कोर्ट में बुलाना और फिर कत्ल कर देना, ये तालिबान का पारंपरिक तरीका है और पिछले शासनकाल के दौरान भी तालिबान ने भी यही किया था। जब अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का कब्जा था, उस वक्त भी मुजाहिदीन चिट्ठियों का ही इस्तेमाल किया करते थे, जिसपर बकायदा मुहर लगाया जाता था। फिलहाल तालिबान की तरफ से जो चिट्ठी भेजी जा रहा है, उसमें साफ और स्पष्ट तौर पर धमकी देते हुए कहा गया है कि अगर तालिबान के आदेश को नहीं माना गया तो उसे मौत की सजा दी जाएगी।

आत्मसमर्पण मतलब माफी नहीं
वहीं, 47 साल के शिर ने डेली मेल को बताया कि उन्होंने हेलमंद प्रांत में ब्रिटिश सेना के साथ फ्रंटलाइन में काम किया था और उन्होंने अफगानिस्तान से बाहर निकलने के ब्रिटेन की तरफ से इजाजत भी मिल गई थी। उनका और उनके पूरे परिवार का टिकट के साथ फ्लाइट भी बुक था, लेकिन वो हवाई अड्डे तक पहुंच नहीं पाए। जिसके बाद उनकी बेटी को दरवाजे पर कील लगा हुआ तालिबान का एक चिट्ठी मिला है, जिसमें शिर को इस्लामिक अमीरात ऑफ तालिबान के कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है। शिर ने कहा कि तालिबान के लोग शिकारी कुत्तों की तरफ उन्हें खोज रहे हैं और वो छिपते फिर रहे हैं। शिर ने कहा कि अगर वो सरेंडर भी करते हैं, फिर भी उन्हें मार दिया जाएगा।

तालिबानी चिट्ठी मतलब मौत का फरमान
तालिबान ने छिपे कई लोगों ने कहा कि तालिबान की चिट्ठी असल में मौत का फरमान होता है। उसमें डर होता है, धमकी होती है और आपको और आपके परिवार के लिए खतरा होता है। एक अफगान शख्स ने कहा कि अगर तालिबान की तरफ से आपको चिट्ठी मिल गई तो आपको फौरन सरेंडर कर देना चाहिए और इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि आप किसी भी तरह से पकड़े नहीं जाएं और उन्हें लगे कि आपने सरेंडर किया है, पकड़े नहीं गये हैं। एक अफगान ने कहा कि उसे तीन बार फ्लाइट पकड़ने के लिए हवाई अड्डे पर बुलाया गया लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी वो हवाई अड्डे पर नहीं पहुंच पाया और अब वो जान बचाने के लिए भाग रहा है। उसने कहा कि मुझे चिट्ठी मिली है और मेरे परिवार पर अब खतरा है। नाज को जो चिट्ठी मिली है, उसमें उसे नाटो सैनिकों का गुलाम बताया गया है और कहा गया है कि चेतावनी के बाद भी उसने काम बंद नहीं किया। चिट्ठी में कहा गया है कि अगर वो इस्लामिक कोर्ट में पेश नहीं होता है तो उसे शरिया कोर्ट ऑफ अपील में भेज दिया जाएगा, जहां से उसके लि मौत की सजा को पारित किया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications