बामियान की मूर्तियों को तोड़ने के बाद अब उसी से कमाई कर रहा तालिबान, काउंटर लगा बेच रहा टिकटें
आर्थिक तंगी से जूझ रहा तालिबान अब दो दशक बाद बुद्ध की उन मूर्तियों के अवशेषों को देखने के टिकट बेच रहा है। दुनिया से वैधता के लिए संघर्ष कर रहा तालिबान प्रशासन बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है।
आपको अफगानिस्तान के बामियान के बुद्ध याद होंगे। बलुआ पत्थर की प्राचीन प्रतिमा कभी विश्व भर में बुद्ध की सबसे ऊंची मूर्ति हुआ करती थी।
मुल्ला उमर के आदेश पर 2001 में इसे विस्फोटक से उड़ा डाला गया था। बुद्ध की इन दो मुर्तियों को उड़ाने में तालिबान को 25 दिन लगे थे।

आर्थिक तंगी से जूझ रहा तालिबान अब दो दशक बाद बुद्ध की उन मूर्तियों के अवशेषों को देखने के टिकट बेच रहा है। दुनिया से वैधता के लिए संघर्ष कर रहा तालिबान प्रशासन बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है।
ऐसे में तालिबान बुद्ध अवशेषों को राजस्व के संभावित आकर्षक स्रोत के रूप में देख रहा है और साइट के आसपास पर्यटन को आकर्षित करने के लिए काम कर रहा है।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में अब बुद्ध की ये विखंडित मूर्तियां तालिबानियों की कमाई का नया जरिया बन रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान बुद्ध की 125-फुट ऊंची चट्टान की खाली छेद देखने के लिए टिकट बेचने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। तालिबान ने इसके लिए एक टिकट काउंटर भी बिठा रखा है।
बामियान की टूटी बुध् की मूर्ति देखने के लिए अफगाननासियों से 3 रुपये और विदेशियों से 282 भारतीय रुपये वसूले जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल 2 लाख से भी अधिक अफगान पर्यटक बामियान पहुंचे थे। इनमें से हर व्यक्ति ने औसत 5 हजार रुपए खर्च किए थे।
सूचना और सांस्कृतिक विभाग के निदेशक सैफुर्रहमान मोहम्मदी ने कहा कि दो दशक पहले हुई घटना के बारे में अभी बात करने से कोई मतलब नहीं है। अब आगे बढ़ने का समय है।
तालिबान के संस्कृति मंत्री अतीकुल्लाह अजीजी ने एक इंटरव्यू में कहा बामियान और बुद्ध हमारी सरकार के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने की दुनिया के लिए ये महत्वपूर्ण हैं। इनकी सुरक्षा के लिए 1,000 गार्ड नियुक्त किए गए हैं। ये इलाके में टिकट की भी निगरानी कर रहे हैं।












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