अमरुल्ला सालेह को रोकने के लिए तालिबान का नया पैंतरा, पंजशीर घाटी में इंटरनेट बंद
काबुल, 29 अगस्त: अफगानिस्तान की सत्ता में अपना काबू करने वाला तालिबान पूरे देश में तबाही मचा रहा है। 15 अगस्त के बाद पूरे देश पर अपनी पैठ जमाने वाला तालिबान अभी भी पंजशीर घाटी के आगे बेबस नजर आ रहा है। इस बीच पंजशीर के लड़ाकों को हराने के लिए तालिबान ने अब नया पैतरा अपनाया है। तालिबान ने अब हथियार नहीं बल्कि इंटरनेट बैन करके पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह को ट्विटर करने से रोकने के लिए यह कदम उठाया है।

रविवार को तालिबान ने पंजशीर घाटी के इलाके में इंटरनेट पर पूरी तरह से रोक लगा दी। ऐसे में अब अमरुल्ला सालेह किसी तरह से कोई ट्वीट नहीं कर पाएंगे। दरअसल, पूर्व उपराष्ट्रपति ट्वीटर पर लगातार एक्टिव हैं और तालिबान हुकुमत के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते ट्वीट कर रहे हैं।
तालिबान के कब्जे से बाहर पंजशीर
बता दें कि पंजशीर एकमात्र अफगानिस्तान प्रांत है, जो अभी तक तालिबान के हाथों में नहीं आया है। ऐसे में कई तालिबान विरोधी पंजशीर घाटी में इकट्ठे हो गए हैं। तालिबानी विद्रोही कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह पंजशीर घाटी में हैं। दोनों यहीं से तालिबानी को लगातार ललकारते हुए जमकर निशाना साध रहे है।
पंजशीर में घुसने का दावा खारिज
इससे पहले शनिवार को अफगानिस्तान से खबर आ रही थी कि तालिबान ने दावा करते हुए कहा था कि लड़ाके पंजशीर की घाटी में घुस चुके हैं, लेकिन बाद में अहमद मसूद ने इस दावे का खंडन कर दिया था।
तालिबान के खिलाफ जंग का ऐलान
15 अगस्त को अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश से भाग जाने के बाद अमरुल्ला सालेह ने देश के संविधान के अनुसार खुद को अफगानिस्तान का वैध कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया था। हालाकि, सालेह के दावे को अभी तक किसी भी देश या अंतर्राष्ट्रीय निकाय जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है।












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