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गृहयुद्ध में सीरिया की एक तिहाई आबादी बनी विकलांग, किसी के हाथ नहीं, किसी के पैर गायब.. देश का भविष्य अपाहिज!

Syria Explain: अब्द अल-हादी मितेब अल-हसन का परिवार, जो मूल रूप से मध्य सीरियाई शहर हामा के पास के ग्रामीण इलाकों का रहने वाला है, वो अब तक दो बार रूसी-प्रक्षेपित क्लस्टर बमों का शिकार हो चुका है और दोनों बार इस परिवार के साथ भयानक परिणाम हुए हैं।

डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट में सीरिया की त्रासदी को दुनिया के सामने रखा गया है और इस रिपोर्ट में 23 साल के अल-हसन ने बताया, कि पहली बार, विपक्ष के नियंत्रण वाले इदलिब में विस्थापित लोगों के एक शिविर पर हवाई हमले में उनके पिता की मौत हो गई थी। दूसरी बार, उनकी दो छोटी बहनें शिविर के ठीक बाहर खेल रही थीं, जब एक क्लस्टर बम के अवशेष फट गए।

syria disabilities

अल-हसन के कहा, उस धमाके में उसकी बहन रूआ की एक आंख चली गई और दूसरी बहन दोआ का एक हाथ उड़ गया। उन्होंने कहा, कि वो अपनी बहनों के साथ एक महीने तक इदलिब के अस्पताल में रहे और जब वो घर लौटीं, तो एक बहन की एक आंख जा चुकी थी और दूसरी बहन के पास सिर्फ एक हाथ बचा था।

ये बात करीब 16 महीने पहले की है और अब 9 और 10 साल की ये दो छोटी लड़कियां, अपाहिज होकर अपने जीवन को सामान्य करने की कोशिश कर रही हैं।

लड़कियों के भाई अल-हसन बताते हैं, कि "हाथ कटने के अलावा, दोआ को पैर में भी समस्या है, लिहाजा दोनों बहनों को अब विशेष देखभाल की ज़रूरत है, लेकिन यहां उनके लिए कुछ भी नहीं है। यह सब मेरे लिए और मेरी मां के लिए बहुत मुश्किल है। यहां के दिन काफी कठिन होते हैं, भीषण गर्मी रहती है और हम तंबू में रहते हैं, जिसके ऊपर प्लास्टिक बिछा होता है।"

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सीरिया में कितनी आबादी हो चुकी है अपाहिज?

यूनाइटेड नेशंस की साल 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक से ज्यादा समय से गृहयुद्ध में फंसे इस देश की 28 प्रतिशत आबादी अब अपंग हो चुकी है। देश की 28 प्रतिशत आबादी, जिनकी उम्र 2 साल या उससे ज्यादा है, वो अपाहिज हो चुके हैं।

उत्तरी सीरिया के कुछ हिस्सों में यह संख्या और भी ज्यादा है। वह क्षेत्र, जहां अल-हसन और उनकी बहनें रहती हैं और जिस पर विपक्षी लड़ाकों का नियंत्रण है, वो क्षेत्र मानवीय सहायता पर काफी ज्यादा निर्भर है और यहां चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पूर्वोत्तर सीरिया में लगभग 37% आबादी किसी न किसी प्रकार की विकलांगता से पीड़ित है।

यह प्रतिशत विश्व औसत के दोगुने से भी अधिक है, जो लगभग 15% के करीब है।

ह्यूमन राइट्स वॉच में विकलांगता अधिकारों पर एक वरिष्ठ शोधकर्ता एमिना सेरीमोविक, जिन्होंने इस विषय पर 2022 की रिपोर्ट लिखने में मदद की थी, वो कहती हैं, कि "यह आँकड़ा केवल युद्ध के कारण ही इतना ऊँचा नहीं है।"

उन्होंने कहा, कि "ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं है कि गोलाबारी में किसी को गोली मार दी गई या घायल हो गया, बल्कि स्वास्थ्य देखभाल और अन्य सेवाओं की कमी के स्थिति और बिगड़ी है। इन सबके परिणामस्वरूप कई बच्चों और वयस्कों को ऐसी विकलांगता प्राप्त हुई है, जिसका अगर इलाज किया जाता, तो वो ठीक हो सकते थे।"

डीडब्ल्यू के मुताबिक, सहायता संगठनों का मानना है, कि विकलांग लोगों की वास्तविक संख्या संयुक्त राष्ट्र के 2021 के सर्वेक्षण से भी काफी ज्यादा है।

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एक सहायता संगठन की प्रमुख सेरीमोविक ने कहा, कि "उस वक्त हर किसी की गिनती नहीं की गई थी। जिस पद्धति का उपयोग किया गया था, उसमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं या मनोसामाजिक विकलांगताएं शामिल नहीं हैं।" सेरीमोविक ने आगे कहा, कि "इसलिए हमें डर है कि संख्याएं और भी ज्यादा होंगी।"

वहीं, इस साल फरवरी में तुर्की और उत्तरी सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप के बाद इस संख्या में निश्चित रूप और इजाफा हुआ है। सीरिया रिस्पांस टीम और सहायता संगठन हैंडीकैप इंटरनेशनल के प्रमुख मायरियम अबॉर्ड-ह्यूगन ने इसकी पुष्टि भी की है।

सीरिया में विकलांगता इतनी ज्यादा हो गई है, कि ये बात अब कोई मुद्दा ही नहीं रहा है। हर तरफ कटे हाथ, एक आंख या एक पैर वाला आसानी से दिख सकते हैं।

विकलांगता को 'छिपा हुआ' क्यों बताया गया है?

सेरीमोविक का मानना है, कि सीरिया के विकलांगों पर उतना ध्यान इसलिए नहीं दिया गया है, क्योंकि ये संख्या काफी ज्यादा है और संघर्ष इतने समय से चल रहा है, कि लोगों को इसका समाधान नहीं दिख रहा है।

जैसे सीमा पार सहायता वितरण और बशर असद के नेतृत्व वाली सत्तावादी सीरियाई सरकार के इर्द-गिर्द राजनीतिक मुद्दों पर लड़ाई चलती रहती है और इसका कोई समाधान नहीं निकल पाता है।

सेरीमोविक और एबोर्ड-ह्यूगन दोनों ने कहा, इस विषय को दरकिनार किया जा रहा है, लेकिन इसका स्पष्ट रूप से देश के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

यूके के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के शोधकर्ताओं का कहना है, कि यह जानना मुश्किल है कि 2011 में युद्ध शुरू होने से पहले सीरिया में कितने विकलांग लोग थे, क्योंकि "व्यवस्थित सर्वेक्षण की कमी और सामाजिक कलंक की वजह से साीरिया में विकलांगता के ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं होते हैं।"

उन्होंने निष्कर्ष निकाला, कि यह आबादी के 8% से लेकर विश्व औसत माने जाने वाले 15% के करीब कहीं भी हो सकता है।

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हैंडीकैप इंटरनेशनल के एबोर्ड-ह्यूगन कहते हैं, कि "लोगों का एक बड़ा हिस्सा है, जो विकलांगता का शिकार है। आबादी के एक तिहाई हिस्से का विकलांग होना, देश के भविष्य के लिए काफी मायने रखता है। यह आत्मसम्मान का भी सवाल है। इन लोगों को डर है, कि वे बेकार हैं, कि वे अपने परिवारों पर निर्भर हैं या वे अपने परिवारों का भरण-पोषण नहीं कर सकते। इसलिए अब ये एक मनोवैज्ञानिक सवाल बन चुका है और लोग डिप्रेशन में जा चुके हैं।"

उदाहरण के लिए, फातिमा अल-अब्दुल्ला के रिश्तेदार इस बात को लेकर चिंतित हैं, कि उसके साथ क्या किया जाए। फरवरी के भूकंप में उसके पिता और भाई की मृत्यु हो गई और उसकी मां और अन्य भाई-बहन घायल हो गए।

15 वर्षीय अल-अब्दुल्ला पैरों से पीड़ित है और सीरियाई अमेरिकन मेडिकल सोसाइटी द्वारा संचालित इदलिब अस्पताल में उसकी रीढ़ की हड्डी की सर्जरी मुफ्त में हुई है।

अबॉर्ड-ह्यूगन बताते हैं, कि सीरिया के कुछ हिस्सों में अब हर परिवार किसी न किसी प्रकार की विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति को जानता है।

किसी देश की 30 प्रतिशत से ज्यादा की आबादी के विकलांग होने का मतलब है, कि देश का भविष्य अपाहिज हो गया है और सीरिया का भविष्य अनाथ दिख रहा है।

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