जूलियन असांजे की मुश्किलें और बढ़ीं, रेप के आरोप की जांच फिर शुरू करेगा स्वीडन
नई दिल्ली। लंदन में इक्वाडोरियन दूतावास से निकाले जाने के एक महीने बाद, स्वीडिश अभियोजक विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे के खिलाफ नौ साल पुराने बलात्कार के आरोप की प्रारंभिक जांच फिर से शुरू कर रहे हैं। हालांकि यह मामला खत्म हो चुका था लेकिन पीड़िता के वकील ने दोबारा जांच शुरू करने का आग्रह किया। इस बीच विकीलीक्स एडिटर ने कहा है कि स्वीडिश रेप इंवेस्टीगेशन की ओर से असांजे को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का मौका दिया जाएगा।

मामले को फिर से शुरू करने के स्वीडन के फैसले का मतलब यह है कि, ब्रिटेन की सरकार यह तय कर सकती है उन्हें स्कैंडिनेवियाई देश या संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्यर्पित करना है या नहीं। बता दें कि, 2010 में स्वीडन का दौरा करने के बाद स्वीडिश अभियोजकों ने असांजे के खिलाफ प्रारंभिक आरोप लगाए थे। असांजे पर सात साल बाद कथित यौन दुराचार का मामला तब हटा दिया गया जब सीमा संबंधी कानून की वैद्यता समाप्त हो गई।
असांजे पर रेप के आरोप उस समय खत्म कर दिए गए थे, जब यह मान लिया गया था कि, उनका पीछा नहीं किया जा सकता है। जबकि वे लंदन में इक्वाडोर के दूतावास में रह रहे थे। उन्हें स्वीडन लाने की कोई संभावना नहीं थी। ये मामला दो स्वीडिश महिलाओं की शिकायतों के बाद खोला गया था। जिन्होंने आरोप लगाया था कि वे असांजे द्वारा किए गए यौन अपराधों के शिकार हुईं थीं। वहीं असांजे ने आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा है कि ये दोनों केस राजनीति से प्रेरित हैं और सेक्स महिलाओं की सहमति से हुआ था।
ऑस्ट्रेलिया में जन्मे असांजे अमेरिका में कम्प्यूटर घुसपैठ की साजिश के आरोपों का सामना कर रहे हैं। वह सरकार की गोपनीय सूचनाओं को लीक करने के अब तक के सबसे बड़े मामले के आरोपी हैं। 2012 में स्वीडन के इन आरोपों से बचने के लिए असांजे नें इक्वाडोर की एंबेसी में शरण ली थी। इक्वाडोर द्वारा उनकी राजनीतिक शरण को रद्द करने के बाद उन्हें ब्रिटिश पुलिस ने 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। फिलहाल उन्हें जमानत की शर्तों को पूरा करने के लिए आत्मसमर्पण ना करने पर 50 हफ्ते जेल की सजा सुनाई गयी है।
असांजे पर 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान हस्तक्षेप का आरोप भी लगा। विकिलीक्स ने तब डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन की टीम की कई ऐसे गोपनीय मेल सार्वजनिक कर दिए जो चुनावी अभियान से जुड़े थे। जिनका सीधा असर राष्ट्रपति के चुनावों पर भी पड़ा था। असांजे पर आरोप लगा कि उन्होंने रूस की मदद से ये गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए थे।
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