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बीजिंग में बोलीं सुषमा चीन और भारत को करीब ला सकती है हिंदी और हिंदी मीडियम

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    बीजिंग। विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज इस समय चीन के दौरे पर हैं। सोमवार को सुषमा ने एक कार्यक्रम में हिस्‍सा लिया जो राजधानी बीजिंग में था और हिंदी पर आधारित था। यहां पर सुषमा ने बताया कि कैसे हिंदी चीन और भारत के संबंधों में नरमी ला सकती है। सुषमा स्‍वराज शनिवार को चीन पहुंची थीं और उनकी यात्रा शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) समिट पर आधारित था। रविवार को सुषमा ने चीन के विदेश मंत्री वांग ई से मुलाकात की थी। सुषमा के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी चीन पहुंचने वाली हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन की यात्रा पर जाएंगे और 27-28 अप्रैल को वह चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे।

    हिट हो रही हैं हिंदी फिल्‍में

    हिट हो रही हैं हिंदी फिल्‍में

    सुषमा ने सोमवार को 'भारत-चीन मैत्री में हिंदी का योगदान' नामक कार्यक्रम में शिरकत की। सुषमा ने यहां पर कहा कि दो विदेश मंत्री भी हमारे देश के बीच दोस्‍त को उतना मजबूत नहीं बना सकते हैं जितना कि चीन के वे छात्र इसे मजबूत कर सकते हैं जो हिंदी भाषा से प्‍यार करते हैं। सुषमा ने यहां पर कहा कि भारत की फिल्‍में चीन में लगातार प्रस‍िद्धि हासिल कर रही हैं। उन्‍होंने कहा कि रविवार को जब वह चीन के विदेश मंत्री वांग ई से बात कर रही थीं तो वांग ने उन्‍हें बताया कि कैसे दंगल और सीक्रेट सुपरस्‍टार को चीन में भी लोकप्रियता हासिल हुई है।

    हिंदी का योगदान रिश्‍तों में काफी अहम

    हिंदी का योगदान रिश्‍तों में काफी अहम

    सुषमा की मानें तो जिस तरह से भारत और चीन के रिश्‍ते बेहतर हो रहे हैं, उसमें यह बात काफी अहम हो गई है कि चीन के छात्र हिंदी भाषा को सीखें और भारतीय छात्र चीन की भाषा मैनड्रिन में दक्षता हासिल करें। ताकि जब कभी भी वे चीन आएं या भारत जाएं तो उन्‍हें भाषाई बाधा का सामना न करना पड़े। सुषमा ने बताया कि एक लड़की ने उनसे कहा है कि भारत देखना उसका सपना है और उसे नहीं मालूम है कि उसका यह सपना कैसे पूरा होगा। सुषमा के मुताबिक इस लड़की का सपना जल्‍द पूरा होगा। उन्‍होंने बताया कि अपनी यात्रा के दौरान उन्‍होंने भारत के राजदूत से कहा है कि वह कार्यक्रम में मौजूद हिंदी भाषा सीखने वाले 25 चीनी छात्रों को भारत भेजें।

    2003 में पूर्व पीएम वाजपेई ने किया सेंटर का उद्घाटन

    2003 में पूर्व पीएम वाजपेई ने किया सेंटर का उद्घाटन

    चीन में हिंदी सीखने की ललक चीन के छात्रों में लगातार बढ़ती जा रही है। यहां पर साल 2001 में पेकिंग य‍ूनिवर्सिटी में स्थित सेंटर फॉर इंडिया स्‍टडीज में प्रोफेसर जियांग जिंगकुई की ओर से हिंदी की क्‍लास सबसे पहले शुरू की गई थी। साल 2003 में तत्‍कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने हिंदी सेंटर का उद्घाटन किया था। शुरुआत की समय क्‍लास में मुश्किल से छात्र नजर आते थे लेकिन कुछ ही वर्षों बाद इस क्‍लास में छात्रों के बैठने के लिए जगह मुश्किल से मिल पाती थी। यहां पर 50 छात्र फुल टाइम कोर्स कर रहे हैं जिसमें करीब आधा दर्जन छात्र हिंदी में पीएचडी कर रहे हैं।

    चीन की सबसे लोकप्रिय विदेशी भाषा हिंदी

    चीन की सबसे लोकप्रिय विदेशी भाषा हिंदी

    हिंदी चीन की सबसे लोकप्रिय विदेशी भाषा है और साल 2012 में साउथ चीन में ग्‍युआनदोंग यूनिवर्सिटी में भी हिंदी के कोर्स की शुरुआत हुई। वर्तमान समय में पेकिंग, ग्‍युआनदोंग के अलावा बीजिंग यूनिवर्सिटी में भी हिंदी का कोर्स पढ़ाया जा रहा है। लेक्‍चर्स की मानें तो हिंदी की वजह से यहां पर करियर के भी अच्‍छे विकल्‍प पैदा हो रहे हैं क्‍योंकि भारत-चीन के बीच व्‍यापार में इजाफा हो रहा है। हाल ही में यहां इरफान खान की फिल्‍म 'हिंदी मीडियम' रिलीज हुई थी और इस फिल्‍म ने 200 करोड़ का बिजनेस सिर्फ दो हफ्तों में कर डाला है।

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    English summary
    Foreign Minister Sushma Swaraj attended the event 'Contribution of Hindi in the Friendship of India & China event in Beijing, capital of China.

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