अब इमरान खान को कौन बचाएगा? जिस जज की जिंदगी बनाई थी जहन्नुम, वो बने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस
Pakistan Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट के जरिए पाकिस्तान की राजनीति को कई बार कंट्रोल करने में कामयाब रहने वाले इमरान खान का दौर आज से खत्म हो रहा है, क्योंकि न्यायमूर्ति काजी फ़ैज़ ईसा ने आज पाकिस्तान के 29वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है।
इमरान खान के करीबी माने जाने वाले चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल रिटायर्ड हो गये हैं, जिन्होंने बार बार इमरान खान को कानूनी मुसीबतों से बचाया था। जब 9 मई को इमरान खान को लाहौर हाईकोर्ट से गिरफ्तार किया गया था और पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात बन गये थे, उस वक्त भी उमर अता बंदियाल ने ही इमरान खान को जेल से रिहा करने का आदेश दिया था।

लेकिन, आज से न्यायमूर्ति काजी फ़ैज़ ईसा, पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे और मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 13 महीने का होगा, जो 25 अक्टूबर 2024 को समाप्त होगा।
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के नये चीफ जस्टिस
63 साल न्यायमूर्ति ईसा को राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने इस्लामाबाद के ऐवान-ए-सद्र में आयोजित एक समारोह में कार्यवाहक प्रधान मंत्री अनवारुल हक काकर, सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर, मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शपथ दिलाई।
जब उनकी नियुक्ति की अधिसूचना पढ़ी गई, तो न्यायमूर्ति ईसा के साथ उनकी पत्नी सरीना ईसा भी स्टेज पर मौजूद थीं। यह पिछली प्रथा से अलग था, क्योंकि आमतौर पर ऐसे शपथ ग्रहण समारोहों के दौरान, पति-पत्नी सहित परिवार के करीबी सदस्यों को आगे की पंक्ति में बैठाया जाता है। लेकिन, पत्नी को स्टेज तक अपने साथ ले जाने के लिए जस्टिस ईसा की तारीफ की जा रही है।
इमरान खान ने किया था परेशान
सरीना तब सुर्खियों में आईं थीं, 2019 में टैक्स अधिकारियों ने उनसे कड़ी पूछताछ की थी और उस वक्त पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर सरीना को एक छड़ी की मदद से चलते हुए दिखाया गया था। सरीना पर आरोप लगाया गया कि उनके पति ने लंदन में संपत्ति बनाई, जिसका मालिक वह थीं।
हालांक, बाद में न्यायमूर्ति ईसा और उनकी पत्नी सरीना, दोनों को कानूनी बिरादरी की आलोचना के बाद दोषमुक्त कर दिया गया था। लेकिन, ये मामला पाकिस्तान में कई दिनों तक काफी सुर्खियां बटोरता रहा।
उस वक्त इमरान खान ने जस्टिस ईसा को काफी ज्यादा परेशान किया था, जिसको लेकर लगातार पाकिस्तानी मीडिया में रिपोर्ट्स आती रहती थीं।
उस वक्त जस्टिस ईसा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार पर खुद को और अपने परिवार को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। लिहाजा, अब जस्टिस ईसा, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बन गये हैं, तो इमरान खान के लिए मुसीबत बढ़ना तय है।
फिलहाल इमरान खान जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ डेढ़ सौ से ज्यादा मामले अलग अलग कोर्ट्स में चल रहे हैं और हर मुकदमे में आखिरी फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना है, जिसके चीफ जस्टिस, अब जस्टिस ईसा बन गये हैं।
स्वतंत्र विचारों के लिए जाने जाते हैं जस्टिस ईसा
जस्टिस ईसा को स्वतंत्र विचारों वाला माना जाता है और 2019 में इमरान खान ने उन्हें इसलिए निशाना बनाया था, क्योंकि फैजाबाद में इमरान खान को समर्थन देने वाली एक धार्मिक पार्टी के धरने के खिलाफ फैसला सुनाया था। वो धार्मिक पार्टी उस वक्त पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की भी करीबी थी, लिहाजा फैसला सुनाने के बाद जस्टिस ईसा मुसीबत में पड़ गये थे।
उनके खिलाफ कथित भ्रष्टाचार का मामला दायर किया गया था, लेकिन बाद में इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
जस्टिस ईसा की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान गंभीर संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनकी मुख्य परीक्षा 9 अगस्त को संसद भंग होने के 90 दिनों के भीतर आम चुनाव कराना होगा।
वहीं, उनके सामने एक अन्य चुनौती, सैन्य अदालतों द्वारा नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे मुकदमे को चुनौती देने वाले मामले से संबंधित है।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश के लिए सबसे बड़ा काम शीर्ष अदालत की प्रतिष्ठा और तटस्थता को बहाल करना हो सकता है, ऐसे समय में जब उनके पूर्ववर्ती उमर अता बंदियाल पर पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान के प्रति नरम रुख रखने का आरोप है।
इसके अलावा, जस्टिस ईसा को सुप्रीम कोर्ट में 56,000 से ज्यादा लंबित मामलों का सामना करना पड़ रहा है। उनमें से कुछ मामले वर्षों पहले दायर किए गए थे और अब तक उन पर सुनवाई नहीं हुई है।
जस्टिस ईसा का जन्म 26 अक्टूबर 1959 को क्वेटा में हुआ था। उनके पिता, क़ाज़ी मुहम्मद ईसा का पाकिस्तान की स्थापना के लिए चलाए गये मुहिम में बड़ा योगदान था और वो मुहम्मद अली जिन्ना के करीबी सहयोगी थे।












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