फटने वाला है 8 सालों से पड़ा सुपर टैंकर, UN ने कहा- तेल रिसाव हुआ तो लाल सागर बन जाएगा ब्लैक सी

संयुक्त राष्ट्र में यमन के अधिकारी डेविड ग्रेसली ने कहा कि हम यह बिल्कुल नहीं चाहते हैं कि लाल सागर में यह घटना घटे और लाला सागर काला सागर हो जाए। यह जहाज 1976 का एक सुपर टैंकर है जो कि पुराना हो चुका है।

super Oil tanker off Yemeni

Image: Oneindia

संयुक्त राष्ट्र ने लाल सागर में 8 साल से फंसे एक SFO सफर सुपर टैंकर के फंटने या डूबने की चेतावनी दी है। 2015 में यमन ने इस जहाज को गृहयुद्ध छिड़ जाने के बाद समंदर में ही छोड़ दिया था। इस जहाज के टैंकर में एक मिलियन बैरल तेल भरा हुआ है। अगर ये जहाज तबाह होता है तो इससे यमन तथा उसके आसपास के देशों को काफी नुकसान पहुंच सकता है। इससे मानवीय और पर्यावरणीय तबाही हो सकती है। SFO सफर सुपर टैंकर को जापानी कंपनी हिताची ने बनाया था। ये 362 मीटर लंबा है। इसका वजन 4 लाख टन से भी अधिक बताया जाता है।

साल 1988 में यमन की एक कंपनी ने इसे स्टोरेज शिप वेसल में बदल लिया था और इसमें तेल रखना शुरू कर दिया। यमन में संयुक्त राष्ट्र के चीफ डेविड ग्रेसली ने कहा कि इस वेसल को 1976 में ही बनाया गया था। लेकिन अब असुरक्षित बन चुका है। ये किसी भी समय फट सकता है। उन्होंने कहा, हम नहीं चाहते हैं कि लाल सागर भी काला सागर में बदल जाए, लेकिन अब ऐसा ही होगा। ग्रेसली ने कहा कि ये बेहद जरूरी है कि जल्दी से जल्दी कोई एक्शन लिया जाए नहीं तो बहुत देर हो जाएगी। यह 'अगर' का सवाल नहीं है, यह केवल 'कब' का सवाल है। इस पर दस लाख बैरल तेज इकट्ठा है। यदि यह समंदर में फैला तो तबाही आ जाएगी।

लाखों लोग होंगे प्रभावित

वैज्ञानिक पत्रिका नेचर सस्टेनेबिलिटी ने इससे जुड़ी एक रिपोर्ट छापी है। इसके मुताबिक यह संयुक्त राष्ट्र से मिलने वाले खाद्य सहायता को अचानक बंद कर देगा, जिससे 60 लाख से भी अधिक लोग प्रभावित होंगे। इतना ही नहीं यमन में 80 लाख लोग अपने ताजे पानी के लिए गैसोलीन से चलने वाले पंपों या ट्रकों पर निर्भर हैं। यदि तेल रिसाव होता है तो अधिकांश ईंधन आयात भी बंद हो जाएंगे। लगभग 20 लाख लोग यमन के तट के ऊपर रहते हैं और अपने पानी के लिए विलवणीकरण संयंत्रों पर निर्भर हैं। तेल रिसाव से ये संयंत्र भी ठप हो जाएंगे।

तेल रिसाव हुआ तो मचेगी तबाही

नेचर सस्टेनेबिलिटी के अनुसार, एक अनियंत्रित तेल रिसाव तीन सप्ताह में यमन के लाल सागर के लगभग सभी मछलियों को मार सकता है। मछलियों की 1000 दुर्लभ प्रजातियां और 365 तरह के कोरल रीफ खत्म हो जाएंगे। तटीय शहरों में रहने वाले लाखों लोग इससे बुरी तरह से प्रभावित होंगे। इससे समुद्र में फैला प्रदूषण 30 साल तक कायम रहेगा। ऐसे लोग जो अपनी आजीविका के लिए समंदर पर निर्भर हैं वे पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे। इसका नुकसान सिर्फ यमन नहीं बल्कि अन्य देशों को भी होगा। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज के डूबने के बाद इससे निकले तेल को जिबूती, इरिट्रिया और सऊदी अरब तक जाने में दो से तीन सप्ताह लगेंगे।

क्यों नहीं हो रहा समस्या का हल?

2014 में हूती विद्रोहियों ने यमन में सत्ता पलट दिया था और राजधानी साना को अपने कब्जे में ले लिया था। इससे सऊदी अरब और यूएई घबरा गए उन्होंने अमेरिका की मदद से लड़ाई छेड़ दी। इसके बाद ईरान ने हूती विद्रोहियों का समर्थन किया। ईरान समर्थनक हूती विद्रोहियों और सऊदी के समर्थन वाली सरकार में गृह युद्ध छिड़ गया। यमन के समुद्र तट वाला इलाका हूती विद्रोहियों के कब्जे में आ गया। इलाका कब्जे में आते ही विद्रोहियों ने सबसे पहले सारी लोकल और इंटरनेशनल संस्थाओं के इलाके में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी। रख-रखाव के अभाव में खराब हो रहे जहाज को ठीक करने के लिए हूती विद्रोहियों ने UN को भी इजाजत नहीं दी है।

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