Su-30MKI: एयरक्राफ्ट की दुनिया में भारत की लंबी छलांग, क्या भारत बनाकर बेचेगा रूसी सुखोई लड़ाकू विमान?
Sukhoi Fighters To Be Made In India: भारतीय रक्षा मंत्रालय (MoD) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने हाल ही में 12 सुखोई Su-30MKI विमानों और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए 13,500 करोड़ रुपये, यानि 1.5 बिलियन डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत के लिए इस समझौते का मकसद आत्मनिर्भरता के अपने लक्ष्य को हासिल करना है, जिसके तहत इस फाइटर जेट के निर्माण में 62.6 प्रतिशत सामग्री भारत में बने होंगे। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य इस फाइटर जेट के ज्यादा से ज्यादा उपकरणों का निर्माण भारत में करना है।

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रूस के दौरे के दौरान 12 दिसंबर को यह घोषणा की गई है, जहां उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन फाइटर जेट्स का निर्माण HAL के नासिक डिवीजन में किया जाएगा। MoD के प्रेस रिलीज में कहा गया है, कि इन विमानों की आपूर्ति भारतीय वायु सेना (IAF) की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाएगी और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगी।
फिलहाल, भारतीय वायुसेना के पास 260 Su-30 विमानों का बेड़ा है, और दुर्घटनाओं में खोये विमानों की भरपाई के लिए 12 अतिरिक्त लड़ाकू विमानों का अनुबंध किया गया है। अतिरिक्त Su-30MKI में कुछ सुपर सुखोई विशेषताएं शामिल होंगी। Su-30 बेड़े की स्वीकृत क्षमता 272 विमान है।
HAL के नासिक डिवीजन में बनेंगे फाइटर जेट्स
HAL को दुनिया की शीर्ष रक्षा फर्म रैंकिंग में 41वें स्थान पर रखा गया है और यह राफेल और हुंडई जैसी शीर्ष रक्षा कंपनियों से आगे है। एचएएल ने एयरबस, बोइंग और हनीवेल जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरोस्पेस फर्मों से विमान के स्पेयर पार्ट्स और इंजन बनाने के लिए कई मल्टीमिलियन डॉलर के अनुबंध भी हासिल किए हैं।
अक्टूबर 2024 में, HAL को महारत्न का दर्जा दिया गया था, जिससे कंपनी को ज्यादा से ज्यादा ऑपरेशनल क्षमता हासिल करने और वित्तीय स्वायत्तता मिली। नासिक में विमानों के निर्माण के लिए प्रभाग की स्थापना 1964 में सोवियत संघ के सहयोग से मिग कॉम्प्लेक्स के हिस्से के रूप में की गई थी। अन्य दो प्रभाग कोरापुट, उड़ीसा, एयरो-इंजन के लिए और हैदराबाद, एवियोनिक्स के लिए हैं। नासिक, बेंगलुरु के बाद HAL का दूसरा सबसे बड़ा प्रभाग है। यह संयंत्र नासिक शहर के केंद्र से 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में ओजर में स्थित है। IAF का नंबर 11 बेस रिपेयर डिपो (BRD) भी यहीं स्थित है। BRD विभिन्न मिग विमान वेरिएंट की मरम्मत करता है।
नासिक डिवीजन ने MIG 21, MIG-27 और SU-30 एमकेआई का निर्माण किया और MIG-21 'बाइसन' को अपग्रेड किया है। यह कई रूसी लड़ाकू विमानों की मरम्मत और ओवरहालिंग का काम करता है। अब इसके पास LCA Tejas Mk1A उत्पादन लाइन भी है।

एयरो-इंजन बनाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट
सितंबर में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के Su-30 बेड़े के लिए 240 AL-31FP एयरो-इंजन के लिए HAL के साथ 26,000 करोड़ रुपये (US$3.05 बिलियन) का अनुबंध किया था। HAL कोरापुट कारखाने से सालाना 30 इंजन की आपूर्ति करेगा। इन डिलीवरी के आठ साल में पूरा होने की उम्मीद है। अतिरिक्त एयरो-इंजन की आवश्यकता है, क्योंकि उनका सेवा जीवन एयरफ्रेम की तुलना में बहुत कम है।
इंजन रूस से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ कच्चे माल के चरण से बनाए जा रहे हैं, और केवल कुछ पुर्जे, फोर्जिंग और कास्टिंग आयात किए जाने की उम्मीद है। जब तक डिलीवरी पूरी हो जाती है, तब तक इंजनों में 63 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री होगी।
विस्तार कर रहा है भारत का निजी एयरोस्पेस सेक्टर
टाटा कंसोर्टियम भारत में गुजरात के बड़ौदा स्थित एक प्लांट में 40 EADS CASA C-295 MW विमान और इसके कई सब-सिस्टम बना रहा है। टाटा एएच-64 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर का धड़ और बोइंग के CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर के लिए एयरो-स्ट्रक्चर बना रहा है।
दुनिया भर में ग्राहकों को डिलीवर किए जाने वाले सभी C-130J में भारत से प्रमुख एयरो-स्ट्रक्चर घटक हैं, जो सालाना 24 C-130 एम्पेनेज का उत्पादन कर रहा है। लॉकहीड मार्टिन की कंपनी सिकोरस्की भी S-92 हेलीकॉप्टर के लिए केबिन की वैश्विक आपूर्ति के लिए हैदराबाद स्थित TASL पर विनिर्माण आधार के रूप में निर्भर करती है।
टाटा समूह भारत में CFM इंटरनेशनल LEAP इंजन घटकों के निर्माण के लिए GE के साथ काम कर रहा है। लॉकहीड मार्टिन ने भारत में F-16 विंग का उत्पादन करने के लिए TASL का चयन किया।
कई निजी कंपनियां, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, बड़े एयरो-घटक, ए़डवांस टेक्नोलॉजी कंपोनेंट्स और सब-सिस्टम बना रही हैं। डायनामैटिक टेक्नोलॉजीज सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के लिए वर्टिकल फिन की असेंबली बनाती है। वे एयरबस को उसके A320 परिवार के विमानों और वाइड-बॉडी 330 विमानों के लिए एयरो-स्ट्रक्चर भी सप्लाई करते हैं। हैदराबाद की वीईएम टेक्नोलॉजीज, एलसीए तेजस के लिए सेंटर फ्यूजलेज बनाती है। अडानी समूह भारत में हर्मीस यूएवी बना रहा है। 100 से ज़्यादा ड्रोन स्टार्ट-अप हैं। कई भारतीय एमएसएमई और स्टार्ट-अप रक्षा घटक उत्पादन में प्रवेश कर रहे हैं।
Su-30 MKI बनाने से भारत को क्या फायदे होंगे?
Su-30 MKI का अपग्रेडेशन भारत के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना है। इसमें IAF का सबसे बड़ा लड़ाकू बेड़ा शामिल है और यह इसकी लड़ाकू क्षमता को बहुत बढ़ाएगा और इसे कुछ और दशकों तक बनाए रखेगा। Su-30 MKI ने F-15C और यूरोफाइटर टाइफून जैसे पश्चिमी लड़ाकू विमानों के खिलाफ ज्यादातर हवाई युद्ध अभ्यासों में अच्छा प्रदर्शन किया है।
भारत पहले से ही वैश्विक ग्राहकों के लिए पश्चिमी विमानों के कई एयरोस्ट्रक्चर और सिस्टम बना रहा है। ऐसी रिपोर्टें हैं, कि भारत द्वारा निर्मित रूस समर्थित Su-30MKI को वैश्विक ग्राहकों को निर्यात करने के लिए HAL और रूस के बीच बातचीत चल रही है। साथ ही, रूस को अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को दरकिनार करने की आवश्यकता है। अधिक रूसी कंपनियां भारत में उत्पादन सुविधाएं स्थापित करना चाहती हैं।
भारत अभी भी Su-30 MKI के उत्पादन और अपग्रेडेशन के लिए महत्वपूर्ण (40 प्रतिशत) आयात सामग्री पर निर्भर है। एयरो-इंजन के महत्वपूर्ण घटकों का कुछ समय तक आयात किया जाना जारी रहेगा। साथ ही, भारत फिलहाल इजेक्शन सीट नहीं बनाता है। और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी अभी भी नहीं हो रहा है। लेकिन भारत सही राह पर है। भारत धीरे-धीरे रडार और हथियारों के मामले में स्वतंत्र हो रहा है। और धीरे धीरे आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है।
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