स्टडी में दावा- ओमिक्रॉन से पूरी तरह बचा सकती है कोविड वैक्सीन की तीसरी डोज
बर्लिन, 04 फरवरी। कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ वैक्सीन एक बड़ा हथियार बनकर लोगों की इस जानलेवा बीमारी से रक्षा कर रहा है। अफ्रीका में पहली बार कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का पता चलने के बाद इसने दुनिया में कोरोना वायरस की एक नई लहर का नेतृत्व किया। इसका असर भारत में भी देखने को मिला, हालांकि कोविड वैक्सीन के चलते यह दूसरी लहर जितना घातक नहीं रहा। हाल ही में एक स्टडी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि वैक्सीन की तीसरी डोज ओमिक्रॉन के खिलाफ पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करती है।

स्टडी के अनुसार जिन लोगों को कोविड वैक्सीन की तीन डोज दी गीई हैं, उनके शरीर में हाई क्वालिटी वाली एंटीबॉडी प्रतिक्रिया का जन्म होता है। ये एंटीबॉडी शरीर को ओमिक्रॉन के खिलाफ कुशलता से लड़ने में सक्षम बनाता है। इतना ही नहीं तीन डोज लेने वाले लोगों में ओमिक्रॉन का बुरा प्रभाव बेअसर साबित होता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह उन लोगों पर भी लागू होता है जो तीन बार वायरस से संक्रमित हुए और ठीक होकर वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं। वहीं वैक्सीन की डबल डोज लेने वाले लोगों में ये संक्रमण आसानी से फैल सकता है।
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नेचर मेडिसिन जर्नल में हाल ही में प्रकाशित इस अध्ययन में दो साल के लिए टीका लगाए गए और ठीक हो चुके व्यक्तियों के एंटीबॉडी का पता लगाया गया। प्रतिभागियों में 98 लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हुए थे और 73 लोग बिना संक्रमण के शामिल थे। दोनों ग्रुप्स को एमआरएनए-आधारित फाइजर वैक्सीन के साथ टीकाकरण की पेशकश की गई थी। जर्मनी में म्यूनिख के तकनीकी विश्वविद्यालय (टीयूएम) के शोधकर्ताओं ने पाया कि वायरल स्पाइक प्रोटीन के कुल तीन एक्सपोजर से वायरस को निष्क्रिय करने वाले एंटीबॉडी का उत्पादन होता है जो मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता में भी उच्च होते हैं।












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