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Stealth fighter jet: फाइटर जेट्स में स्टेल्थ टेक्नोलॉजी खतरनाक क्यों होती है? चीन से इतने पीछे क्यों रह गये हम

Stealth fighter jet: पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट दी है, कि पाकिस्तान एयर फोर्स, चीन को 50 J-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स की ऑर्डर देने वाला है। यानि, आने वाले वक्त में पाकिस्तान की ख्वाहिश अपनी एयरफोर्स को पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से सुसज्जित करना है।

जाहिर तौर पर, चीन के बाद अगर पाकिस्तानी एयरफोर्स के बाद भी स्टेल्थ फाइटर जेट्स होंगे, तो ये भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करेंगे। लिहाजा हम जानने की कोशिश करेंगे, कि आखिर स्टेल्थ फाइटर जेट्स इतने खतरनाक क्यों होते हैं और चीन के मुकाबले भारत इतने पीछे क्यों रह गया है?

Stealth fighter jeta

दुनिया में मौजूद कुछ फाइटर जेट्स जैसे रूसी Su-57, अमेरिकी F-35 और चीनी J-20 और J-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स हैं, जिन्हें पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान भी कहा जाता है।

फाइटर जेट्स में स्टेल्थ टेक्नोलॉजी का क्या मतलब है? (What is Stealth fighter jet)

स्टेल्थ या एलओ कई अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन होता है और इसमें इतनी ज्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, कि फाइटर जेट्स में ज्यादा दूरी तक जाने की क्षमता कम हो जाती है। लेकिन, इसकी सबसे बड़ी खासियत ये हो जाती है, कि इसे कोई भी रडार डिटेक्ट नहीं कर सकता है।

यानि, स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत ये है, कि दुनिया में इस वक्त जितने भी रडार सिस्टम या एयर डिफेंस सिस्टम हैं, वो इन फाइटर जेट्स को ट्रैक ही नहीं कर सकते हैं। लिहाजा, ये काफी घातक बन जाते हैं।

इसीलिए, स्टील्थ फाइटर जेट को गुप्त फाइटर जेट या फिर चोर फाइटर जेट कहा जाता है।

स्टेल्थ फाइटर जेट में रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस), ध्वनिक सिग्नेचर, थर्मल इंप्रिंट जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी वजह से दुश्मन के रडार सिस्टम से निकली तरंगों को इसकी बॉडी सोख लेती है और रडार इसे डिटेक्ट नहीं कर पाता है।

'स्टेल्थ' शब्द अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में तब लोकप्रिय हुआ था, जब 1991 में खाड़ी युद्ध में F-117 स्टेल्थ लड़ाकू विमान को तैनात किया गया था। रडार को चकमा देने के लिए स्टेल्थ फाइटर जेट में, रडार की तरंगों को अवशोषित करने वाली सामग्री radar-absorbing materials (RAM) का इस्तेमाल किया जाता है। सेटील्थ को रडार से बचाने के लिए डाइ-इलेक्ट्रिक धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि रडार की तरंगों के लिए विमान पारदर्शी बन जाए। पारदर्शी कंडक्टरों की एक पतली फिल्म के साथ कॉकपिट कैनोपी और यहां तक कि पायलट के हेलमेट की भी कोटिंग की जाती है, जिससे रडार किसी भी हाल में इसे डिटेक्ट नहीं कर पाता है।

इसके अलावा, स्टेल्थ जेट में विमान के इंजन को पंख या धड़ के अंदर दबा दिया जाता है, ताकि कंप्रेसर ब्लेड रडार को दिखाई न दें। साथ ही, इसने इन्फ्रारेड (आईआर) सिग्नेचर को भी कम कर दिया जाता है। इसके अलावा कुछ विमानों में, जेट एग्जाक्स्ट को आईआर मिसाइलों से बचाने के लिए पंख की सतह के ऊपर रखा जाता है।

इसके अलावा, फाइटर जेट्स हर हाल में, हर तरह की तरंगों से बच सके, इसके लिए कई तरह की अन्य टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि विमान के ऑनबोर्ड रडार, कम्युनिकेश सिस्टम और बाकी बॉडी भी रडार को चकमा दे सके।

स्टेल्थ फाइटर जेट्स का कब इस्तेमाल किया गया?

1990 के खाड़ी युद्ध में इराक में F-117 के साथ स्टेल्थ फाइटर्स का ऑपरेशन शुरू हुआ था। बाद में, 1999 में यूगोस्लाविया में F-117 और B-2 स्पिरिट स्ट्रैटजिक बमवर्षक का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, एक F-117 को सर्बियाई S-125 'नेवा-एम' मिसाइल द्वारा मार गिराया गया।

2003 में इराक पर हमले में F-117 नाइटहॉक्स और B-2 स्पिरिट्स बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया गया था। ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए मई 2011 के ऑपरेशन के लिए भी इसका इस्तेमाल किया गया था। सिकोरस्की UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को शांत ऑपरेशन के लिए भारी रूप से संशोधित किया गया था और रडार को कम दिखाई देने के लिए स्टेल्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।

शुरूआती दिनों के मुकाबले अब स्टेल्थ टेक्नोलॉजी को काफी एडवांस कर दिया गया है।

इसके अलावा, F-22 ने सितंबर 2014 में सीरिया पर हमला करके फाइट ऑपरेशन की शुरूआत की थी और बाद में, 2018 में, इजरायली F-35I स्टेल्थ लड़ाकू विमानों ने सीरिया में कई मिशनों को अंजाम दिया और यहां तक कि बिना पता लगाए, ईरानी हवाई क्षेत्र में 'घुसपैठ' भी की।

Stealth fighter jet

स्टेल्थ फाइटर जेट्स की कीमत कितनी होती है? (Stealth fighter jets Cost)

दिसंबर 2022 में एक B-21 बॉम्बर विमान की कीमत 700 मिलियन डॉलर आंकी गई थी। अमेरिकी एयरफोर्स ने अनुमान लगाया है, कि वे 100 B-21 के बेड़े को विकसित करने, खरीदने और संचालित करने के लिए 30 वर्षों में कम से कम 203 अरब डॉलर खर्च करेंगे।

आधुनिक प्लेटफार्मों को प्रारंभिक डिजाइन चरण में ही कुछ स्तर की स्टेल्थ या एलओ तकनीक को शामिल करके डिज़ाइन किया गया है। यहां तक कि मौजूदा विमानों को भी उनकी क्षमता कम करने के लिए कई बार संशोधित किया जाता है। गुप्त डिजाइन बनाने की कीमत चुकानी पड़ती है।

पूरी तरह से स्टेल्थ विमान, सभी ईंधन और हथियार आंतरिक रूप से ले जाता है, जो पेलोड को सीमित करता है, जबकि एक गैर-स्टेल्थ अटैक विमान कई गुना ज्यादा रफ्तार से उड़ान भर सकता है। इसका मतलब होगा, कि युद्ध कि स्थिति में ज्यादा स्टेल्थ फाइटर जेट तैनात करने की जरूरत होती है ।

स्टेल्थ फाइटर जेट्स की रेस में भारत क्यों पिछड़ा? (stealth fighter jets India vs China)

इस रेस में भारत के पीछा रहने की सबसे बड़ी वजह कीमत और टेक्नोलॉजी है। स्टेल्थ फाइटर जेट्स के निर्माण के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट में भारी-भरकम खर्च है और भारत सरकार हमेशा उधेड़बुन में रही है, कि वो स्टेल्थ विमानों के निर्माण के लिए भारी-भरकम निवेश करे या नहीं।

अमेरिका और चीन के बीच स्टेल्थ फाइटर जेट को लेकर रेस लगातार कड़ी होती जा रही है। फिलहाल अमेरिका के पास एक स्टेल्थ फाइटर जेट है, जबकि चीन दो तरह के स्टेल्थ फाइटर जेट बना चुका है। माना जा रहा है, कि अमेरिका और चीन के बीच जो रेस चल रही है, उसमें स्टेल्थ फाइटर जेट्स में मेटा सरफेस का इस्तेमाल होगा। टू डाइमेंशनल मेटा मैटेरियल के इस्तेमाल से स्टेल्थ जेट हर दिशा में इलेक्ट्रोमैग्रेनिट तरंगों का प्रसार करेगा, ताकि रडार को भटकाने के साथ साथ विमान गुप्त खतरों का भी पता लगा सके।

इसके अलावा, स्टेल्थ जेट को विकसित करने या खरीदने और लगातार मैंटिनेंस में भारी-भरकम खर्च आता है। वहीं, कई स्टेल्थ विमानों की क्षमताएं अभी भी संदिग्ध हैं। कई लंबी दूरी की एएएम को लड़ाकू विमानों में आंतरिक रूप से ले जाना मुश्किल होता है।

इसके अलावा, सभी देश एडवांस रडार सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो निकट भविष्य में स्टेस्थ विमानों का पता लगाने में सक्षम होंगे। रूसी Su-57 को कम स्टेल्थ माना जाता है, लेकिन फिर भी उसे टेक्नोलॉजी और कीमत को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

चीनी J-20 और J-31 समानांतर स्टील्थ कार्यक्रम काफी ज्यादा गोपनीय हैं, लेकिन फिर भी कीमत की वजह से चीन को महंगे रूसी Su-35 जेट लड़ाकू विमान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। J-20 पर कैनर्ड नियंत्रण के साथ स्टेल्थ की गुणवत्ता पर सवाल उठाया जा रहा है।

भारत के पास स्टेल्थ फाइटर जेट्स को लेकर क्या हैं विकल्प?

डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारत को निश्चित तौर पर स्टेल्थ फाइटर जेट्स के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए और इसकी टेक्नोलॉजी पर महारत हासिल करनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि लागत को कम करने के लिए भारत ज्वाइंट वेंचर का सहारा ले सकता है।

भारत पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (AMCA) का निर्माण कर रहा है, जिसके अगल 8 से 10 सालों में तैयार होने की उम्मीद है। माना जा रहा है, कि ये स्टेल्थ फाइटर जेट्स हो सकते हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है, कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) पर काम में तेजी लाने की जरूरत है। जिसे दो स्टेज में निर्माण के लिए तैयार किया गया है, एक नॉन-स्टेल्थ एमके1 और दूसरा स्टेल्थ एमके2। भारत को पहले 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एलसीए एमके-2 और शायद अतिरिक्त राफेल या समकक्ष विमानों के साथ अपनी संख्या सही करनी होगी। और उसके बाद ही एडवांस स्टेल्थ के निर्माण की तरफ बढ़ा जा सकता है।

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