चीन को 1 लाख बंदर नहीं भेजेगा श्रीलंका, भारी विरोध के बाद फैसला बदलने पर मजबूर हुई सरकार

श्रीलंका में सरकार ने चीन को एक लाख टोक मैकाक बंदरों का भेजने के फैसले पर रोक लगा दिया है। श्रीलंका के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पशु प्रेमियों की नाराजगी और मामला कोर्ट पहुंच जाने के बाद बंदरों को निर्यात करने की योजना को रद्द कर दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने बंदरों के प्रस्तावित निर्यात को रोकने के लिए आदेश जारी करने के लिए अपील न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की थी। श्रीलंका में इस प्रजाति के 20 से 30 लाख बंदर हैं।

endangered tok macaque monkey

बंदर की इस टोक मैकाक प्रजाति को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
वन्यजीव प्रेमियों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने एक संक्षिप्त बयान में कहा, "यह श्रीलंका में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक उत्कृष्ट परिणाम है।"

इससे पहले अप्रैल में खबर आई थी कि श्रीलंका ने चीन को 1 लाख टोक मैकाक बंदर निर्यात करने का फैसला किया है। इसे लेकर चीन से 3 दौर की बातचीत हो गई थी।

कृषि मंत्री ने कहा कि चीन की इस मांग पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी एक लाख बंदरों को चीन को बेचने की पूरी योजना बनाएगी।

श्रीलंका में इन बंदरों को रिलावा नाम से जाना जाता है। श्रीलंका में लगभग सभी जीवित पशुओं के विदेशी पर निर्यात पर प्रतिबंध है। ऐसे में श्रीलंका सरकार इन बंदरों को चीन भेजने के लिए नियम बदलने पर विचार कर रही थी।

श्रीलंका में बंदरों की तीन प्रजातियां हैं। इनमें टोक मैकाक बंदरों की तादाद सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। देश में टोक मैकाक बंदरों की बढ़ती तादाद कई तरह की परेशानियों की वजह बनती जा रही है।

ये बंदर भोजन की तलाश में फसलों को नष्ट कर देते हैं और कभी-कभी लोगों पर हमला तक कर देते हैं। यही वजह है कि हाल ही के दिनों में श्रीलंका ने बंदर समेत कुछ जानवरों को प्रोटेक्टेड यानी संरक्षित जानवरों की सूची से बाहर कर, इन्हें कीट की श्रेणी में रख दिया है।

श्रीलंका ने इस वर्ष अपनी संरक्षित सूची से बंदर, मोर और जंगली सूअर सहित कई जानवरों को हटा दिया है। संरक्षित जानवरों की सूची से बाहर करने के बाद किसानों को इन्हें मारने का परमिट मिल गया है।

कृषि मंत्री के मुताबिक श्रीलंका में बंदर और गिलहरियां हर साल 10 करोड़ नारियलों को बर्बाद कर देते हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 की पहली छमाही में 30,215 मिलियन श्रीलंकाई रुपये (87.5 मिलियन डॉलर) का नुकसान इन बंदरों की वजह से हुआ था।

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