आर्थिक संकट के बीच गिरेगी श्रीलंका की सरकार, सहयोगियों ने खींचा समर्थन, राष्ट्रपति का इस्तीफे से इनकार
नव-नियुक्त वित्त मंत्री अली साबरी, जिन्होंने राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे के भाई, बासिल राजपक्षे की जगह वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाला था, उन्होंने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कोलंबो, अप्रैल 05: भीषण आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका की राजपक्षे सरकार अल्पमत में आ गई है और माना जा रहा है कि, बहुत जल्द श्रीलंका की सरकार गिर जाएगी। संसदीय कार्यवाही के अनुसार, आर्थिक संकट पर बढ़ती अशांति के बीच कम से कम 41 सांसदों के गठबंधन से बाहर निकलने के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने संसद में बहुमत खो दिया है और माना जा रहा है, कि उनकी सरकार अब गिर सकती है।

सरकार ने खोया बहुमत
वहीं, श्रीलंका की राजपक्षे सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद लंका फ्रीडम पार्टी के नेता मैत्रीपाला सिरिसेना ने कहा कि, ‘हमारी पार्टी लोगों के पक्ष में है'। हालांकि, सहयोगी पार्टियों के समर्थन वापस लेने के बाद राजपक्षे की सरकार अल्पमत में आ गई है और माना जा रहा है, कि अल्पमत में सरकार के आने के बाद अब राष्ट्रपति के लिए कोई भी फैसला लेना काफी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, हालांकि स्वतंत्र सांसद अभी भी सरकारी प्रस्तावों का समर्थन करना जारी रख सकते हैं।
नये वित्तमंत्री ने भी दिया इस्तीफा
वहीं, नव-नियुक्त वित्त मंत्री अली साबरी, जिन्होंने राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे के भाई, बासिल राजपक्षे की जगह वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाला था, उन्होंने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि, बहुत सोच विचार के बाद उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि, "अब मेरा विचार है, महामहिम के लिए इस अभूतपूर्व संकट को नेविगेट करने के लिए उपयुक्त अंतरिम व्यवस्था की जाए और नये वित्त मंत्री की नियुक्ति के साथ साथ सक्रिय और अपरंपरागत कदम उठाए जाने की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि, जब उन्होंने 3 अप्रैल को न्याय मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था, तो उनका कोई अन्य पद लेने का इरादा नहीं था।

राष्ट्रपति का इस्तीफा देने से इनकार
वहीं, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे ने कहा है कि, वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे, हालांकि, वह संसद में बहुमत साबित करने वाली पार्टी को सरकार सौंपने के लिए तैयार हैं। जबकि, श्रीलंका में जारी संकट के बीच सोमवार रात कोलंबो के इंडिपेंडेंस स्क्वायर और राष्ट्रपति राजपक्षे के कार्यालय के बाहर भारी प्रदर्शन किया गया है और आर्थिक संकट को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है। आपको बता दें कि, श्रीलंका की संसद में 225 सदस्य होते हैं और आज श्रीलंकन सरकार ने संसद का सत्र बुलाया था। अभी तक राजपक्षे सरकार के पास करीब 157 सांसदों का समर्थन था, जिसमें सहयोगी पार्टियां भी थीं, लेकिन सरकार के 41 सांसदों के अलावा सहयोगी पार्टी के भी 14 सांसदों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है।
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प्रदर्शन में शामिल हुए क्रिकेटर्स
श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर सनथ जयसूर्या ने जनता से 'एक व्यक्ति' के रूप में एकजुट होने और एक बेहतर राष्ट्र के लिए खड़े होने का आह्वान किया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में लसनथ जयसूर्या ने जनता से जाति, धर्म, या दल की राजनीति से विभाजित नहीं होने का आग्रह किया है। पूर्व बल्लेबाज ने मिरिहाना में कल रात के सार्वजनिक विरोध पर टिप्पणी करते हुए बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। उन्होंने एक बयान जारी करते हुए कहा कि, ‘पिछले एक महीने के दौरान हम श्रीलंकाई लोगों ने एक साथ पीड़ा को चुपचाप सहा है। हर चीज और हर किसी का ब्रेकिंग पॉइंट होता है। हम उस मुकाम पर पहुंच गए हैं। कल का विरोध निर्दोष लोगों की पीड़ा और अनुचित उत्पीड़न का परिणाम था। आइए हम कभी भी जाति धर्म या दलगत राजनीति में विभाजित न हों, आइए एक व्यक्ति के रूप में एकजुट हों और अपने लिए, अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए खड़े हों।‘ आपको बता दें कि, सनथ जयसूर्या से पहले श्रीलंका के एक और महान बल्लेबाज महेला जयवर्धने ने श्रीलंका की खराब स्थिति पर गहरा दुख जताया था।

मत्स्य उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित
श्रीलंका का मछली उद्योग भी एक बढ़ते आर्थिक संकट का खामियाजा भुगत रहा है और द्वीप देश के मछुआरों के पास अपनी नावों को समुद्र में उतारने के लिए तेल ही नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी तमिलों के लिए मछली पकड़ना एक प्रमुख आजीविका है और संकटग्रस्त देश में ईंधन की कमी ने मत्स्य उद्योग को पंगु बना दिया है। स्थानीय मीडिया ने बताया कि देश के उत्तरी भाग में मछुआरे, जो आम तौर पर वैकल्पिक दिनों में मछली पकड़ते हैं, वे सप्ताह में एक बार भी समुद्र में जाने में असमर्थ हो गये हैं। एक देशी नाव को एक दिन की मछली पकड़ने के लिए 30 लीटर मिट्टी के तेल की आवश्यकता होती है, जबकि अब वे सप्ताह में केवल एक बार केवल 20 लीटर तेल ही जमा कर पाते हैं, लिहाजा मछली पकड़ने के लिए समुद्र में उतरना काफी मुश्किल हो गया है।

300 के पार पहुंचा अमेरिकी डॉलर
वहीं, श्रीलंका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब देश की मुद्रा, डॉलर के मुकाबले 300 को पार कर गया है और ये बताता है, कि देश की आर्थिक स्थिति कितनी ज्यादा खराब हो चुकी है। देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह से खत्म हो चुका है और अब सरकार के अल्पमत में आने के बाद स्थिति और भी ज्यादा खराब हो चुकी है। इससे पहले राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे ने देश की तमाम विपक्षी पार्टियों को सरकार में शामिल होने का न्योता दिया था और मिलकर इस संकट से बाहर निकलने की अपील की थी, लेकिन विपक्ष ने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

विपक्ष ने मांगा पीएम-राष्ट्रपति से इस्तीफा
सांसद अनुरा प्रियदर्शन यापा ने मंगलवार, 5 अप्रैल को श्रीलंकाई संसद को बताया कि, उन्होंने 11 सांसदों के साथ खुद को एक अलग स्वतंत्र समूह के रूप में प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया है। वहीं, पूर्व मंत्री विमल वीरावांसा ने भी संसद को बताया कि, उन्होंने और उनके 16 सांसदों ने खुद को एक अलग स्वतंत्र समूह के रूप में प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया है। आपको बता दें कि, ये दोनों नेता दो दिन पहले तक श्रीलंका की राजपक्षे सरकार को समर्थन दे रहे थे। इन दोनों के साथ ही श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने भी संसद अपने 15 एसएलएफपी सांसदों के साथ सरकार से समर्थन वापस लेने की जानकारी संसद को दी। वहीं, सीलोन वर्कर्स कांग्रेस ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

श्रीलंका में राजनीतिक संकट
वहीं, सीलोन वर्कर्स कांग्रेस (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष सेंथिल थोंडामन ने कहा कि पार्टी ने सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया है। सीडब्ल्यूसी ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। वहीं, संसद के उपाध्यक्ष रंजीत सियाम्बलपतिया ने इस्तीफा दे दिया है। जबकि, संसद के उपाध्यक्ष रंजीत सियाम्बलपतिया ने पद छोड़ दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी है।
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