भारत के साथ ऋण पुनर्गठन पर बातचीत कामयाब, श्रीलंका को मोदी सरकार से बहुत बड़ी मदद
श्रीलंका पिछले साल डिफॉल्ट हो चुका है और उसे IMF से बेलऑउट पैकेज लेने के लिए भारत, जापान और चीन के साथ ऋण पुनर्गठन समझौता करना ही होगा।

Sri Lanka News: भारत ने कहा था, कि वो आर्थिक संकट में फंसे अपने पड़ोसी देश श्रीलंका की मदद के लिए हमेशा तैयार रहेगा और भारत अपने वायदे पर खड़ा उतरा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है, कि श्रीलंका ने भारत के साथ ऋण पुनर्गठन वार्ता को कामयाबी के साथ पूरा कर लिया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति का ये बयान उस वक्त आया है, जब भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर श्रीलंका की यात्रा करने वाले हैं।

भारत ने की श्रीलंका की मदद
आर्थिक संकट में फंसा द्वीप देश श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 2.9 अरब डॉलर का ब्रिज लोन हासिल करने की कोशिश कर रहा है और अपने प्रमुख लेनदारों, चीन, जापान और भारत से वित्तीय आश्वासन प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है, जो कोलंबो के लिए राहत पैकेज पाने के लिए काफी जरूरी है। वहीं, श्रीलंका अपने लेनदारों के साथ कर्ज को लेकर बातचीत कर रहा है, लेकिन उस वक्त तक के लिए आईएमएफ ने श्रीलंका को दिए जाने वाले बेलऑउट पैकेज को रोक दिया है और श्रीलंका तब तक आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए लेनदारों के साथ बातचीत कर रहा है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने क्या कहा?
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने देश की संसद में कहा है, कि "मैं इस सभा को बता सकता हूं, कि भारत के साथ हमारी वार्ता सफल रही है। बहुत जल्द हमारे पास एक जवाब होगा।" भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर 19 जनवरी यानि कल, श्रीलंका पहुंचेंगे, जहां वह देश के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। पिछले हफ्ते, श्रीलंका ने जापान के साथ अपनी ऋण पुनर्गठन वार्ता पूरी की थी और राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने चीन के एक्ज़िम बैंक के साथ भी बातचीत की है। हालांकि, चीन के साथ बातचीत कहां तक पहुंची है, इसकी रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। वहीं, भारत ने पिछले साल कोलंबो को लगभग 4 अरब अमरीकी डालर की वित्तीय सहायता सौंपी है।
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श्रीलंका को भारत की मदद
जनवरी 2022 में, भारत ने श्रीलंका को 900 मिलियन अमरीकी डालर का ऋण देने की घोषणा की थी, ताकि वित्तीय संकट सामने आने के साथ ही उसके खत्म हो चुके विदेशी भंडार को पूरी तरह से खाली होने से रोका जा सके। हालांकि, जब बाद में श्रीलंका की स्थिति और भी ज्यादा खराब होने लगी, तो फिर भारत ने श्रीलंका को 500 मिलियन अमरीकी डालर की क्रेडिट लाइन की पेशकश की थी। बाद में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्रेडिट लाइन को बढ़ाकर 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया गया। आपको बता दें कि, 2022 की शुरूआत से ही श्रीलंका लगातार भारतीय क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल कर रहा है और अपनी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। श्रीलंका अगले चार सालों में आईएमएफ से 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर लोन लेने की कोशिश में है और इसके लिए उसे अपने लेनदारों से लोन पुनर्गठन वार्ता पूरी करनी होगी। ये आईएमएफ का शर्त होता है।

श्रीलंका-IMF की बातचीत कहां पहुंची?
पिछले साल डिफॉल्टर होने के बाद श्रीलंका आईएमएफ से कर्ज लेने को लेकर बातचीत कर रहा है। अगर श्रीलंका को आईएमएफ से लोन मिल जाता है, तो फिर वो वर्ल्ड बैंक और एशियन डेलवपमेंट बैंक से भी कर्ज ले सकता है, जिससे उसे अपना कर्ज चुकाने के साथ साथ अपने विदेशी मुद्रा भंडार को भरने में फिर से मदद मिलेगी। आईएमएफ से श्रीलंका को तभी लोन मिलेगा, जब उसके लिए वो भारत, जापान और चीन के साथ ऋण पुनर्गठन वार्ता को पूरा कर ले। भारत और जापान से ये वार्ता पूरी हो गई है और अब चीन के रूख पर सबकी नजर है।












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