Elon Musk ने घटती जनसंख्या पर UN को लताड़ा, कहा- मंगल ग्रह पर ले जाने के लिए नहीं बचेंगे लोग

अंतरिक्ष से भी कहीं दूर दूसरे ग्रहों पर इंसानी जीवन को लेकर बेहद उत्साही लोगों में से एक एलन मस्क ने करीब दो साल पहले ये कहकर चौंका दिया था, कि वे मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी कर रहे हैं।

वॉशिंगटन, जनवरी 19: मंगल ग्रह पर इंसानों की दुनिया बसाने को बेताब दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी ने धरती पर घटनी इंसानी आबादी के लिए यूनाइटेड नेशंस को जमकर लताड़ लगाई है। पिछले कई सालों से स्पेस एक्स कंपनी के सीईओ एलन मस्क बार बार चेतावनी दे रहे हैं, कि वैश्विक प्रजनन दर में गिरावट से मानवता तेजी से तबाही की तरफ बढ़ रही है और मंगल ग्रह के लिए इंसान ही नहीं बचेंगे।

ज्यादा बच्चे पैदा करें लोग- मस्क

ज्यादा बच्चे पैदा करें लोग- मस्क

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने इंसानों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह दी है और कहा है कि इंसानों को घटती जनसंख्या को लेकर जल्द से जल्द और ज्यादा से ज्यादा चिंतित होनी चाहिए। इसके साथ ही एलन मस्क ने यूनाइटेड नेशंस को भी जमकर लताड़ लगाई है और कहा है कि, अगर घरती पर ही ज्यादा इंसान नहीं बचे, तो फिर मंगल ग्रह पर किसको ले जाया जाएगा। एलन मस्क ने कहा है कि, जिस तरह से घरती पर इंसानों की आबादी घटती जा रही है, उस तरह से उनकी मंगल ग्रह पर साहसिक शहर बसाने की योजनाओं को गहरा झटका लगेगा।

यूनाइटेड नेशंस को लताड़ा

यूनाइटेड नेशंस को लताड़ा

इलेक्ट्रिक कारों की निर्माता कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने घटती जनसंख्या को लेकर यूनाइटेड नेशंस पर भी जमकर भड़ास निकाली है और संयुक्त राष्ट्र की जमकर आलोचना की है और टेस्ला कंपनी के सीईओ ने कहा है कि, अभी भी दुनिया में अपर्याप्त लोग हैं और उन्होने यूनाइटेड नेशंस के जनसंख्या को लेकर लगाए गये अनुमान को 'बकवास' बताया है। उन्होने कहा कि, ''पिछले वर्ष से जन्मों की संख्या को जीवन प्रत्याशा से गुणा करें तो आपको पता चलेगा कि बच्चों के जन्मदर में गिरावट आ रही है और अगर यह बदला नहीं है, तो यह बड़ा उदाहरण है''। स्पेसएक्स के सीईओ के सिद्धांत के अनुसार, निकट भविष्य में एक जनसंख्या बम इस तरह का भी होगा, जब एक बड़ी आबादी बूढ़ी होकर खत्म होने वाली रहेगी और जन्मदर हद से ज्यादा सिकुड़ गया रहेगा''।

'तेजी से कम हो रही है जनसंख्या'

'तेजी से कम हो रही है जनसंख्या'

इससे पहले पिछले साल बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया थथा कि, दुनिया भर में फर्टिलिटी रेट में भी गिरावट दर्ज की जा रही है और साल 2100 तक धरती पर इंसानों की आबादी काफी कम हो जाएगी। वहीं, कोरोना महामारी ने घटती जनसंख्या के ट्रेंड को और बढ़ाने का ही काम किया है, जबकि कुछ लोग अनुमान लगा रहे थे कि, कोरोना संक्रमण के दौर में इंसानों की आबादी बढ़ सकती है। आपको बता दें कि, एलन मस्क, जो खुद एक बहुत बड़े इंजीनियर हैं, उनकी हमेशा से एक धारणा रही है, कि घटती जनसख्या 21वीं सदी में मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

जापान में बचेंगे सिर्फ 7 करोड़ लोग

जापान में बचेंगे सिर्फ 7 करोड़ लोग

इसके साथ ही एलन मस्क ने जापान के बच्चों की जन्मदर का हवाला दिया है और कहा है कि, साल 2021 में जापान में सिर्फ आठ लाख बच्चों का ही जन्म हुआ और लाइफ एक्पेटेंसी 85 साल थी, जो काफी ज्यादा है। और अगर इन दोनों को गुना करें, को पता चलता है कि, भविष्य में जापान में सिर्फ 6.8 करोड़ लोग ही बचेंगे, जबकि इस वक्त जापान की आबादी सिर्फ 12.58 करोड़ है। यही हाल चीन का भी है और चीन में भी पिछले कई दशकों से जनसंख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकार की काफी कोशिशों के बाद भी चीन की जनसंख्या में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। चीन की सरकार ने जनसंख्या बढ़ाने के लिए कई तरह की स्कीम चलाए हैं, लेकिन उसका कोई असर नहीं हो पा रहा है।

एलन मस्क का मिशन मंगल कार्यक्रम

एलन मस्क का मिशन मंगल कार्यक्रम

अंतरिक्ष से भी कहीं दूर दूसरे ग्रहों पर इंसानी जीवन को लेकर बेहद उत्साही लोगों में से एक एलन मस्क ने करीब दो साल पहले ये कहकर चौंका दिया था, कि वे मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी कर रहे हैं। इस बयान के बाद मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन को लेकर चर्चा ने जोर पकड़ लिया था। इतना ही नहीं, एलन मस्क ने यह भी बताया था कि, मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती कैसी होगी और किस तरह से मंगल ग्रह पर इंसान अपनी नई जिंदगी की शुरूआ करेंगे। लेकिन, मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन बसाना इतना आसान नहीं हो और अभी तक मंगल ग्रह को लेकर जो भी वैज्ञानिक रिसर्च किए गये हैं, उसमें यही पाया गया है कि, मंगल पर ऐसा वातावरण नहीं है, कि वहां पर इंसानों को बसाया जा सके। लेकिन, एलन मस्क का कहना है कि, वो मंगल ग्रह पर इस तरह की परिस्थितियों का निर्माण करेंगे, जिससे मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन बसाया जा सके।

मंगल पर कैसे जीवन बसाएंगे मस्क?

मंगल पर कैसे जीवन बसाएंगे मस्क?

एलन मस्क ने सबसे पहली बार मंगल पर इंसानी बस्ती बसाने के ख्याल के बारे में साल 2015 में स्टीफल कोल्बर्ट के शो में बताया था। तब उन्होंने कहा था, कि अगर मंगल का तापमान थोड़ा गर्म हो जाए तो वहां इंसान के रहने लायक वातावरण बन सकता है। बाद में एलन मस्क ने घोषणा की थी, कि वह मंगल ग्रह के तापमान को कृत्रिम तरीके से गर्म करने पर विचार कर रहे हैं। एलन मस्क ने बताया था, वह मंगल के कुछ हिस्से पर परमाणु हमला करेंगे, ताकि वहां ग्रीन हाउस उत्सर्जन हो और तापमान में वृद्धि हो। हालांकि मस्क की इस योजना की सफलता पर वैज्ञानिकों ने संदेह जरूर जताया था, लेकिन इसे पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया जा सका है।

स्पेशल घरों का किया जाएगा निर्माण

स्पेशल घरों का किया जाएगा निर्माण

विज्ञान की दुनिया में कई क्रांति कर चुके एलन मस्क ने यह भी बताया था, कि मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती कैसी होगी। एलन मस्क ने ट्विवटर पर बताया था कि, शुरुआत में लोग कांच के गुंबदों में रहेंगे और फिर धीरे धीरे मंगल ग्रह को पृथ्वी की तरह बदल दिया जाएगा। एलन मस्क ने ये जानकारी एक ट्विटर यूजर के सवाल के जवाब में दिया था। ट्विटर यूजर ने एलन मस्क से पूछा था कि, जब लोग पहली बार मंगल पर पहुंचेंगे, तो क्या ग्रह को पहले ही पृथ्वी की तरह तैयार कर लिया गया रहेगा या फिर लाल ग्रह पर जिंदा रहने के लिए स्पेस एक्स ने कोई दूसरा तरीका तैयार करेगा? इस सवाल के जवाब में ही मस्क ने कांच के घरों में लोगों को रखने की जानकारी दी थी। दरअसल अभी मंगल का तापमान अधिकतम माइनस 48 डिग्री रहता है। साथ ही मंगल पर सूर्य से आने वाली खतरनाक किरणों को रोकने के लिए कोई रक्षाकवच नहीं है, जैसा हमारे पृथ्वी के लिए ओजोन की परत करता है, लिहाजा ऐसे वातावरण में इंसानी जीवन नहीं रह सकता है।

मंगल के वातावरण को बदलने की तैयारी

मंगल के वातावरण को बदलने की तैयारी

एलन मस्क की योजना साल 2050 तक मंगल पर पहली बस्ती बसाने की है। एलन मस्क ने बताया था कि, वह तापमान बढ़ाने के लिए मंगल के एक हिस्से पर भारी ताकत के कई परमाणु विस्फोट करेंगे। विस्फोट से कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकलेगी, जिसके चलते मंगल ग्रह के तापमान में बढ़ोतरी होगी। ऐसा होने से ग्रीन हाउस गैसों को प्रभाव बढ़ेगा और धीरे-धीरे इंसानों के रहने लायक एक कृत्रिम वातावरण तैयार हो जाएगा। हालांकि ये करना इतना आसान भी नहीं होगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल के तापमान में परिवर्तन के लिए वहां पर 10 हजार परमाणु बम गिराने होंगे, जिन्हें वहां तक पहुंचाने के लिए आधुनिकतम मिसाइलों की जरूरत होगी। इसके साथ ही परमाणु बम के बाद वहां विकिरण का खतरा भी बना रहेगा।

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