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अंतरिक्ष में जाते ही इंसानी दिमाग में होने लग रहा बदलाव, नई स्टडी से क्यों परेशान हैं वैज्ञानिक?

अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग में अहम बदलाव हो रहा, जिससे वो कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।

astronauts

दुनिया के कई देशों में ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की होड़ लगी हुई है। इस बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया कि अंतरिक्ष यात्रा इंसानी शरीर के लिए उनती सुरक्षित नहीं है, जितनी अब तक हम सोचते थे। उसके बहुत सारे बुरे प्रभाव भी पड़ रहे।

नासा की एक नई स्टडी के मुताबिक स्पेस में रहने की वजह से अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग पर बुरा असर पड़ रहा। इसके अलावा उनको कैंसर का भी खतरा रहता है। नई स्टडी में ये भी बताया गया कि एक अंतरिक्ष यात्री की दो यात्राओं के बीच कम से कम तीन साल का गैप जरूर होना चाहिए।

नासा के मुताबिक लंबे वक्त तक अंतरिक्ष में रहने वाले लोगों पर उन्होंने शोध किया। जिसमें पता चला कि स्पेस में रहने की वजह से दिमाग में सेरेब्रोस्पाइनल द्रव का विस्तार हो रहा। ये रंगहीन और पानी जैसा तरल पदार्थ है, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में और उसके आसपास बहता है। ये आपके द्वारा की जाने वाली हर चीज को निर्देशित और समन्वित करता है। जिसमें चलने, सांस लेने, देखने और सोचने की क्षमता शामिल है।

ये बात 30 अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग की स्कैनिंग के बाद कही गई। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसको ठीक होने में तीन साल तक का वक्त लग जाता है। ऐसे में उन्होंने सुझाव दिया कि लगातार दो अंतरिक्ष यात्रायों के बीच कम से कम तीन साल का अंतर होना चाहिए। सेरेब्रोस्पाइनल द्रव के बढ़ने से सिर दर्द, ट्यूमर, हार्ट प्रॉब्लम आदि का भी खतरा रहता है।

पृथ्वी और स्पेस के बीच ऐसे होता है बदलवा
पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण है, जिसका असर शरीर पर भी पड़ता है। हमारे शरीर के अंदर कई ऐसे अंग हैं, जो गुरुत्वकर्षण के विपरीत काम करके सेरेब्रोस्पाइनल द्रव को पैर में जमा होने से रोकते हैं, लेकिन स्पेस में मामला उल्टा है। वहां पर ये तरल पदार्थ सिर की ओर शिफ्ट हो जाता है।

इस अध्ययन में 23 पुरुष और सात महिला अंतरिक्ष यात्री शामिल थे। जिनकी औस आयु लगभग 47 थी। इसमें आठ लगभग दो सप्ताह के अंतरिक्ष मिशन पर थे, जबकि 18 ने करीब 6 महीने का वक्त बिताया। इसके अलावा चार यात्री स्पेस में एक साल तक रहे।

दिमाग के स्कैन से पता चला कि कम वक्त बिताने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन लंबे समय तक रहने वालों पर बुरा प्रभाव पड़ा। हालांकि 6 महीने के बाद सेरेब्रोस्पाइनल द्रव में इजाफा होना बंद हो गया। ये मंगल मिशन के लिए अच्छी खबर है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री माइक्रोग्रैविटी में दो साल बिता सकते हैं।

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