क्या ओमिक्रॉन वेरिएंट पर दहशत फैलाया गया है? क्या होता है मरीजों का हाल, दक्षिण अफ्रीकी डॉक्टर से जानिए
जैसे-जैसे ओमिक्रॉन वेरिएंट दक्षिण अफ्रीका में फैल रहा है, डॉ. अनबेन पिल्ले एक दिन में दर्जनों बीमार रोगियों को देख रहे हैं। उन्होंने कोरोना वायरस के डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर तुलना की है।
जोहानिसबर्ग, दिसंबर 12: कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने जिस कदर उत्पात मचाया था और डेल्टा वेरिएंट ने जितने लोगों की जान ली थी, वो खौफनाक था और जब पिछले महीने वैज्ञानिकों ने रिसर्च में कोरोना वायरस के एक और वेरिएंट ओमिक्रॉन को देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सबसे खतरनाक बात ये थी, कि जब तक वैज्ञानिक ओमिक्रॉन वेरिएंट का पता लगा पाते, ये कई देशों में फैल चुका था और हर देश दहशत में आकर कड़े कदम उठाने लगे। लेकिन, अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर जान बूझकर डर फैलाया गया है? दक्षिण अफ्रीका में जो ताजा स्टडी किया गया है, उसके नतीजे क्या कहते हैं, आईये जानते हैं। (सभी तस्वीर फाइल-भारत की)

दक्षिण अफ्रीकी डॉक्टर का दावा
जैसे-जैसे ओमिक्रॉन वेरिएंट दक्षिण अफ्रीका में फैल रहा है, डॉ. अनबेन पिल्ले एक दिन में दर्जनों बीमार रोगियों को देख रहे हैं। फिर भी उन्हें किसी भी मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के लिए नहीं भेजना पड़ा है। यही एक कारण है कि उन्हें, अन्य डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों के दावे पर शक हो रहा है कि ओमाइक्रोन वेरिएंट वास्तव में डेल्टा की तुलना में काम कमजोर है और हल्के कोविड -19 का कारण बन रहा है, भले ही इसके फैलने की रफ्तार डेल्टा की तुलना में ज्यादा हो। डॉक्टर पिल्ले ने कहा कि, "वे घर पर बीमारी का इलाज करवाने में सक्षम हैं।" डॉक्टर पिल्ले ने अपने रोगियों के बारे में कहा कि, "अधिकांश 10 से 14 दिनों के अंदर घर में ही आइलोलेशन में पूरी तरह से ठीक हो गये"।
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बुजुर्ग मरीजों पर असर
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर पिल्ले ने कहा कि, वृद्ध रोगी और दूसरी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को ओमिक्रॉन वेरिएंट से गंभीर बीमार होने का खतरा हो सकता है और ऐसे मरीज ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं। दक्षिणी अफ्रीका में पहली बार ओमिक्रॉन वेरिएंट की रिपोर्ट के बाद से दो हफ्तों में अन्य डॉक्टरों ने भी इसी तरह की कहानियां साझा की हैं, जिनमें उन्होंने इस वेरिएंट को डेल्टा के मुकाबले कमजोर बताया है। हालांकि, डॉक्टरों का ये भी कहना है कि, सभी सावधानी बरतने की जरूरत है और ओमिक्रॉन वेरिएंट वास्तव में डेल्टा के मुकाबले कमजोर ही है, यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त डेटा एकत्र करने में कई और सप्ताह लगेंगे और उनपर रिसर्च के बाद ही पुख्ता तौर पर कहा जा सकता है।

आंकड़ों के जरिए ओमिक्रॉन को समझें
दक्षिण अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज ने ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर अभी तक के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक,
- हाल के हफ्तों में कोविड-19 इन्फेक्शन के साथ अस्पताल में भर्ती लोगों में से सिर्फ 30% ही गंभीर रूप से बीमार हुए हैं, जो पिछले महामारी की लहरों के पहले हफ्तों के दौरान आधे से भी कम थे।
- पिछले बार की तुलना में इस बार अस्पताल में भर्ती होने की अवधि कम हो गई है। पिछली बार औसतन मरीज को आठ दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ता था, जबकि इस बार अवधि घटकर सिर्फ 2.8 दिन हो गई है।
- पिछली लहर के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले 20 प्रतिशत कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की मौत हो गई थी, जबकि इस लहर के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले सिर्फ 3 प्रतिशत रोगियों की मौत हो रही है।
अफ्रीका स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के निदेशक विलेम हानेकोम ने राष्ट्रीय संस्थान के आंकड़ों और अन्य रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि, "फिलहाल, लगभग सब कुछ इसके हल्के रोग होने की ओर इशारा करता है।" उन्होंने कहा कि, "अभी शुरुआती दिन हैं, और हमें अंतिम डेटा प्राप्त करने की आवश्यकता है। अक्सर अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों की तादाद बाद में बढ़ती हैं और मौतों का आंकड़ा भी बाद में बढ़ता है, और अभी इस लहर को आए सिर्फ 2 हफ्ता ही हुआ है।"

दुनियाभर में रखी जा रही है नजर
इस बीच, दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस के घटते-बढ़ते मामलों की संख्या और अस्पताल में भर्ती होने की दरों पर नजर रख रहे हैं, जबकि यह देखने के लिए परीक्षण कर रहे हैं कि वर्तमान में उपलब्ध टीकों का असर मरीजों पर किस तरह से हो रहा है, वहीं मरीजों का इलाज कितने दिनों में हो रहा है। जबकि डेल्टा अभी भी दुनिया भर में कहर बरपाने वाला प्रमुख कोरोनवायरस वेरिएंट है, जबकि, अफ्रीकी देश में मिला कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट अभी तक दुनियाभर के 60 से ज्यादा देशों में फैल चुका है।

गौतेंगे प्रांत में ओमिक्रॉन के काफी मामले
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर पिल्ले दक्षिण अफ्रीका के गौतेंग प्रांत में प्रैक्टिस करते हैं, जहां ओमिक्रॉन वेरिएंट के काफी ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। करीब एक करोड़ 60 लाख लोगों की आबादी वाला यह प्रांत, दक्षिण अफ्रीका का सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है और इसमें सबसे बड़ा शहर, जोहान्सबर्ग और राजधानी प्रिटोरिया शामिल है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गौतेंग ने दिसंबर के पहले सप्ताह में नए मामलों में 400% की वृद्धि देखी, और परीक्षण से पता चलता है कि 90% से ज्यादा मरीजों में कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट पाया गया है।

डेल्टा और ओमिक्रॉन के लक्षणों में तुलना
डॉक्टर पिल्लै का कहना है कि, पिछली डेल्टा लहर के दौरान कोरोना मरीजों को सांस लेने में काफी ज्यादा परेशानी हो रही थी और उनके शरीर का ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिर जा रहा था, जिसकी वजह से मरीजों को जल्द से जल्द अस्पतालों में भर्ती करवाना जरूरी हो जाता था, लेकिन, इस बार ओमिक्रॉन वेरिएंट के जो मरीज मिल रहे हैं और अभी तक उन्होंने जिन मरीजों का इलाज किया है, उनमें इस तरह के लक्षण नहीं दिख रहे हैं। डॉक्टर पिल्लै ने कहा कि, जिन रोगियों का उन्होंने इलाज किया है, उनमें हल्के फ्लू जैसे लक्षण हैं, जैसे शरीर में दर्द और खांसी की शिकायत।

5 हजार डॉक्टरों के प्रतिनिधि हैं डॉक्टर पिल्लै
डॉक्टर पिल्ले, दक्षिण अफ्रीका में लगभग 5,000 जनरल फिजिशयन डॉक्टरों के एक संघ के डायरेक्टर हैं और उन्होंने अपने सहयोगियों की मदद से कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर आंकड़ों के आधार पर दस्तावेज तैयार किया है। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर 'नेटकेयर' की भी रिपोर्ट में यही पता चला चला है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के कम गंभीर मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं। हालांकि, ओमिक्रॉन वेरिएंट का प्रसार काफी ज्यादा है और दक्षिण अफ्रीका में नये मामलों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। दक्षिण अफ्रीका ने गुरुवार को 22,400 नए मामलों और शुक्रवार को 19,000 नए मामलों की पुष्टि की है, जो कुछ हफ्ते पहले प्रति दिन लगभग 200 थे। दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री, जो फाहला ने शुक्रवार को कहा कि नए उछाल ने पिछले एक महीने में 90,000 लोगों को संक्रमित किया है।

ओमिक्रॉन के फैलने की रफ्तार
दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला ने कहा कि, ''ओमिक्रॉन वेरिएंट काफी तेजी से फैलता है और लोगों को संक्रमित करता है''। स्वास्थ्य मंत्री ने स्टडी रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि, इस वक्त दक्षिण अफ्रीका में जितने भी कोरोना वायरस के नये मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से 70 फीसदी मामले ओमिक्रॉन वेरिएंट के ही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान लहर में कोरोनोवायरस विस्तार एक व्यक्ति से संक्रामित होने वाले लोगों की संख्या 2.5 है। यानि, इस वक्त एक कोरोना मरीज 2.5 मरीजों को संक्रमित कर रहा है, जो कि दक्षिण अफ्रीका में महामारी के दौरान दर्ज की गई सबसे ज्यादा दर है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज के अस्पताल के आंकड़ों पर नजर रखने वाली वसीला जस्सत ने कहा कि, "चूंकि यह वेरिएंट काफी तेजी से लोगों को संक्रमित करता है, लिहाजा हम ऐसी वृद्धि देख रहे हैं जैसे हमने पहले कभी नहीं देखी।"

ओमिक्रॉन वेरिएंट और वैक्सीनेशन
डॉक्टर वसीला जस्सत ने कहा कि, मौजूदा लहर के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में से 86% मरीजों ने कोरोना वायरस का टीका नहीं लगवाया है। जिससे पता चलता है कि ये वायरस वैक्सीन नहीं लेने वाले लोगों को ज्यादा संक्रमित कर रहा है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के अस्पतालों में कोविड-रोगी अब भी महामारी की दूसरी लहरों के दौरान आने वाले मरीजों के कम हैं और करीब दो तिहाई मरीजों की उम्र 40 साल से कम या आसपास है। डॉक्टर जसत ने कहा कि, भले ही शुरुआती संकेत हैं कि ओमिक्रॉन के मामले कम गंभीर हैं, लेकिन नए कोविड-19 मामलों की मात्रा अभी भी दक्षिण अफ्रीका के अस्पतालों को प्रभावित कर सकती है और इसके परिणामस्वरूप अधिक संख्या में गंभीर लक्षण और मौतें हो सकती हैं।
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