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सावधान! स्मार्टफोन बच्चों को कर रहा है बीमार, इन मानसिक रोगों का खतरा बढ़ा: शोध

बच्चों को स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह भावना सबकी रहती है। अब एक सर्वे हुआ है, उसके बाद खुद ही फैसला करना होगा कि क्या किया जाए? क्योंकि शोध से पता चला है कि ऐसे बच्चे युवा होने पर मानसिक रोगी हो सकते हैं।

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डिजिटल का जमाना है, यह सोचकर अगर छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में स्मार्टफोन या टैबलेट छोड़ रहे हैं तो यकीन मानिए इसके खतरे का जरा भी अंदाजा नहीं है। क्योंकि, एक वैश्विक सर्वे आया है, जो हर किसी के कान खड़े कर सकता है। इसके मुताबिक एक बच्चा जितनी कम उम्र में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने लगता है, युवावस्था में मानसिक समस्याओं का उसे उतना ही ज्यादा सामना करना पड़ सकता है।

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स्मार्टफोन बच्चों को कर रहा है बीमार- शोध
यह सर्वे अमेरिका स्थित सेपियन लैब्स की ओर से किया गया है, जिसे सोमवार को वैश्विक स्तर पर जारी कियाा। इस सर्वे को टीओआई के साथ भी साझा किया गया है। इस शोध के नतीजे भयानक हैं। इस सर्वे में यह भी पाया गया है कि आज के जिन युवाओं ने बचपन में बहुत छोटी उम्र से स्मार्टफोन इस्तेमाल करना शुरू किया था, उनके दिमाग में आत्महत्या की भावनाएं ज्यादा आती हैं।

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भारत समेत 40 से देशों में हुआ सर्वे
यही नहीं, ऐसे युवाओं में दूसरों के खिलाफ गुस्से की भावना भी ज्यादा रहती है और अलग-अलग रहने और मतिभ्रम की समस्या भी अधिक देखने को मिलती है। सेपियन लैब्स अमेरिका स्थित एक नॉन-प्रॉफिट सस्था है, जिसने यह सर्वे 40 से ज्यादा देशों में किया है।

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महिलाएं ज्यादा प्रभावित- सर्वे
इस सर्वे में 18 से 24 साल के 27,969 व्यस्कों को शामिल किया गया है, जिनमें करीब 4,000 भारत से भी हैं। इस सर्वे का एक अहम तथ्य यह भी है कि इस समस्या से महिलाएं ज्यादा प्रभावित लगती हैं। इसमें शामिल 74% महिलाएं, जिन्हें 6 साल की उम्र में पहला स्मार्टफोन मिला था, युवावस्था में उन्हें ज्यादा गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

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    उम्र बढ़ने के साथ स्मार्टफोन के दुष्परिणाम घटते हैं- रिसर्च
    लेकिन, जिन्हें 10 साल की उम्र में पहला स्मार्टफोन मिला था, उनमें ऐसी समस्याओं का सामना करने वालों की संख्या घटकर 61% और 15 साल में पहली बार स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों में यह 52% रह गया। इसी तरह, जिन्हें 18 साल की उम्र में पहला स्मार्टफोन मिला, उनमें 46% मानसिक रूप से परेशान थीं।

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    पीड़ित पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में कम-शोध
    यही ट्रेंड युवा पुरुषों में भी पाया गया है, लेकिन उनकी संख्या कम होती चली गई। जैसे जिन्हें 6 साल की उम्र में पहली बार स्मार्टफोन का चस्का लग गया था, उनमें करीब 42% को मानसिक दिक्कतें झेलनी पड़ रही थी। लेकिन, 18 वर्ष की आयु में पहली बार स्मार्टफोन लेने वालों में ऐसी समस्याओं से पीड़ितों की संख्या 36% रह गई।

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    जितनी छोटी उम्र, बड़े होने पर उतनी बड़ी समस्या- न्यूरोसाइंटिस्ट
    सेपियन लैब्स की फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट तारा त्यागराजन(न्यूरोसाइंटिस्ट) ने कहा, 'आपको जल्द फोन मिलने का मतलब है व्यस्क के रूप में ज्यादा स्वास्थ्य समस्याएं, खासकर आत्महत्या के विचार, दूसरों के प्रति गुस्से की भावना और सच्चाई से भागने की प्रवृत्ति; कुल मिलाकर सामाजिक आत्मीयता की कमजोर भावना.......'

    भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले बच्चों की संख्या वैश्विक औसत से ज्यादा-रिसर्च
    यह शोध भारत की मौजूदा स्थिति की वजह से और भी महत्वपूर्ण हो गया है। क्योंकि, पिछले साल McAfee के ग्लोबल कनेक्टेड फैमिली का शोध जारी हुआ था, उसके मुताबिक भारत में 10 से 14 साल के 83% बच्चे स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। यह आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय औसत 76% से 7% ज्यादा है।

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    इस समस्या का कारण?
    हालांकि, इस शोध से कम उम्र से स्मार्टफोन के इस्तेमाल का मानसिक स्वास्थ पर पड़ने वाले कारणों का पता नहीं चला है। लेकिन, त्यागराजन का कहना है कि आंकड़े बताते हैं कि बच्चे रोजाना 5 से 8 घंटे स्मार्टफोन में दे देते हैं। जबकि, स्मार्टफोन से पहले यह समय उनका परिवार और दोस्तों के साथ बीतता था या दूसरी गतिविधियों में लगे होते थे। लेकिन, आज ऐसा समय उन्हें नहीं मिल रहा है।

    जितना भी हो बच्चों को स्मार्टफोन देने में देरी करें- न्यूरोसाइंटिस्ट
    लेकिन, माता-पिता के लिए न्यूरोसाइंटिस्ट का स्पष्ट संदेश है कि 'जितना भी हो बच्चों को स्मार्टफोन देने में देरी करें, जितने बड़े हो जाएं उतना अच्छा।....इसकी जगह बच्चों के सामाजिक विकास पर ध्यान लगाएं, यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी है, जिसे कि फोन ने खत्म कर दिया है।'

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