अलार्म सिस्टम, स्पेशल बंकर, सेफ हाउस और अजाका...जानिए कैसे दुश्मनों से सुरक्षित रहता है इजरायल
क्या आप जानते हैं इजरायल ने दुश्मनों के खिलाफ अपने देश की पूरी जनता को ट्रेंड कर रखा है। दुश्मनों से कैसे बचा जाए, रॉकेट या मिसाइल हमला हो तो क्या किया जाए, इसके लिए इजरायल अपने नागरिकों को पहले ही ट्रेंड कर चुका है।
तेल अवीव, मई 19: इजरायल और फिलिस्तीन के खिलाफ जंग लगातार जारी है और इजरायल पर अब तक फिलिस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास 3200 से ज्यादा रॉकेट बरसा चुका है। बावजूद इसके इजरायल में सिर्फ 12 लोगों की जान गई है। इसके पीछे इजरायल की रक्षा प्रणाली 'आइरन डोम' तो है ही...लेकिन क्या आप जानते हैं इजरायल ने दुश्मनों के खिलाफ अपने देश की पूरी जनता को ट्रेंड कर रखा है। दुश्मनों से कैसे बचा जाए, रॉकेट या मिसाइल हमला हो तो क्या किया जाए, इसके लिए इजरायल अपने नागरिकों को पहले ही ट्रेंड कर चुका है। आईये जानते हैं आखिर कैसे इजरायल ने अपनी जनता को ट्रेनिंग दी है और सायरन की आवाज सुनते ही कैसे इजरायली सतर्क हो जाते हैं।

सायरन की आवाज और सब सतर्क
आपने तस्वीरों और वीडियो में देखा होगा कि हमास एक साथ 500 से ज्यादा रॉकेट भी इजरायल के ऊपर छोड़ चुका है और अब तक इजरायल पर हमास 3200 से ज्यादा रॉकेट से हमला कर चुका है। लेकिन अगर आपने उन वीडियोज को ध्यान से सुना होगा तो आपको बैकग्राउंड में अलार्म की आवाज सुनाई दे रही होगी। ये अलार्म इजरायल के एयर रेड सायरन सिस्टम का हिस्सा हैं और जैसे ही दुश्मनों की तरफ से इजरायल पर रॉकेट से हमला होता है, ये अलार्म बजने लगता है और आम नागरिक सतर्क हो जाते हैं। रिपोर्ट के मुताकिब इजरायल सरकार ने पूरे देश में अलार्म सिस्टम को लगाया हुआ है। कई अलार्म बजने के बाद ऑटोमेटिक बंद हो जाते हैं तो कई अलार्म को कंट्रोल किया जाता है। जैसे ही इजरायल के नागरिक अलार्म की आवाज सुनते हैं, वो रॉकेट हमले से बचने के लिए तैयार हो जाते हैं और उन प्रोटोकॉल को फॉलो करने लगते हैं, जो सरकार की तरफ से रॉकेट हमले से बचने के लिए बनाए गये हैं। इस वक्त हमास इजरायल पर रॉकेट बरसा रहा है तो इजरायल हमास पर बमों से हमला कर रहा है।

रॉकेट हमला होते ही बजता है अलार्म
इजरायल में एयर सायरन की आवाज वहां के नागरिकों के लिए नया नहीं है क्योंकि अकसर दुश्मन देश इजरायल को निशाना बनाने की फिराक में रहते हैं। हालांकि, दुनिया के दूसरे देशों में भी रॉकेट अलार्म सिस्टम लगाए गये हैं लेकिन इजरायल में सबसे ज्यादा इसका इस्तेमाल होता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त भी रॉकेट अलार्म सिस्टम का इस्तेमाल अलग अलग देशों ने जनता के बीच अलर्ट जारी करने के लिए किया था। जैसे ही दुश्मन देश का रॉकेट देश की सीमा में प्रवेश करने लगता है तो ये अलार्म ऑटोमेटिक बजने लगते हैं। विश्व में सबसे पहले ब्रिटेन ने अलार्म सिस्टम का इस्तेमाल करना शुरू किया था। उस वक्त इजरायल, फिलिस्तीन हुआ करता था, जब ब्रिटेन ने कुछ अलार्म सिस्टम लगाए थे। लेकिन 1948 में इजरायल के निर्माण के साथ ही इजरायल ने पूरे देश में अलार्म सिस्टम को लगा दिया। वहीं, इजरायल लगातार इस सिस्टम को अपडेट करता रहा है। आखिरी बार 2019 में इजरायल ने अपने एयर अलार्म को अपग्रेड किया था।

इजरायल का 'अजाका'
जैसे ही कोई इजरायली सायरन की आवाज सुनता है, उसके पास एक मिनट का वक्त होता है किसी सुरक्षित जगह पर अपने आप को छिपाने के लिए। जैसे ही रॉकेट को इंटरसेप्ट किया जाता है, ठीक वैसे की सायरन बजना बंद कर देता है लेकिन सायरन बजने की आवाज बंद होने के कुछ देर बाद तक लोगों को सुरक्षित ठिकाने पर छिपने के लिए कहा जाता है ताकि अगर रॉकेट गिरा तो वो मलबे की चपेट में भी ना आए। इजरायल में बकायदा इसके लिए लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है। सायरन की आवाज बंद होने के कुछ समय बाद ही लोग सुरक्षित स्थान से बाहर निकलते हैं।

जब आदमी बाहर हो और सायरन बजे?
क्या होगा जब लोग घर के बाहर हों और अलार्म बजने लगे। इसके लिए भी इजरायस में लोगों को ट्रेनिंग दी गई है। अगर कोई इजरायली अपने घर से बाहर है और अचानकर अलार्म की आवाज आने लगे तो इस स्थिति में फौरन लोगों को कोई ना कोई सुरक्षिक स्थान खोजने की सलाह दी जाती है और अगर कोई सुरक्षित जगह नहीं मिल पाती है तो लोगों को फौरन जमीन पर लेटने की सलाह दी जाती है। अगर कोई आदमी गाड़ी चला रहा है तो उस वक्त सायरन की आवाज बजने के साथ तुरंत ही गाड़ी से उतरकर किसी सुरक्षित स्थान पर जाना होता है। वहीं, जब ट्रेन चल रही होती है और अगर तभी सायरन की आवाज बजने लगे, उस वक्त ट्रेन की रफ्तार को कम कर 30 मील प्रतिघंटे की रफ्तार करना जरूरी हो जाता है। आज पूरे इजरायल में मल्टी टच प्वाइंट सायरस सिस्टम लगा हुआ है और रॉकेट छुटने की जानकारी रेडियो, टीवी और मोबाइल एप्स के जरिए भी लोगों को दी जाती है। वहीं, इजरायल के हर बिल्डिंग में सेफ हाउस बनाना अनिवार्य है। लेकिन, गाजा में ऐसा नहीं है। और यही वजह हैं, जिनकी वजह से इजरायल बचा हुआ है और गाजा की स्थिति इजरायल ने खराब कर रखी है।












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