कट्टरपंथी सिखों का गढ़ बनता जा रहा है ये देश, प्रधानमंत्री कई बार दे चुके हैं भारत के खिलाफ बयान
रिपुदमन मलिक, मोनिंदर बॉयल और हरदीप सिंह निज्जर की हिट लिस्ट में थे और ये दोनों चरपंथी गुटों के आगे हैं, जिन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब (एसजीजीएस) की छपाई को लेकर कनाडाई सिख के खिलाफ अभियान चलाया था।
टोरंटो, जुलाई 20: साल 1985 के एयर इंडिया बम विस्फोट में आरोप से बरी किए गए रिपुदमन मलिक की हत्या ने कनाडा में बढ़ते सिख कट्टरपंथ और भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरे को उजागर कर दिया है। कनाडा की पुलिस खालिस्तान कट्टरपंथियों की बढ़ती गतिविधियों से बहुत चिंतित है और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग कर रही है, ताकि कनाडा में सिख कट्टरपंथी ताकतों को रोका जा सके।

रिपुदमन मलिक की हुई थी हत्या
रिपुदमन मलिक की पिछले गुरुवार को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में सर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और ऐसी रिपोर्ट है, कि जिस इलाके में रिपुदमन मलिक की हत्या की गई है, उस इलाके में छह कुख्यात सिख गैंगस्टर अपने नेटवर्क का संचालन करते हैं। खालसा क्रेडिट यूनियन और खालसा स्कूलों के संस्थापक रिपुदमन मिलक पर साल 1985 के एयर इंडिया आतंकवादी बम विस्फोट मामले में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था, जिसमें 329 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए थे। हालांकि, अभी तक किसी ने भी रिपुदमन मलिक की हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि, वह मोनिंदर बॉयल और हरदीप सिंह निज्जर की हिट लिस्ट में थे और ये दोनों चरपंथी गुटों के आगे हैं, जिन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब (एसजीजीएस) की छपाई को लेकर कनाडाई सिख के खिलाफ अभियान चलाया था। निज्जर और बॉयल ने अफवाहें फैलाईं, कि मलिक ने जो प्रतियां छपवाईं, उसमें कुछ गलतियां थीं और वो मलिक से छपाई को रद्द करने की मांग कर रहे थे।

गलती की फैलाई गई थी अफवाह
रिपोर्ट के मुताबिक, काफी ज्यादा अफवाह फैलाने के बाद ये दोनों मलिक के प्रिंटिंग परिसर से गुरु ग्रंथ साहिब की किताब 'सरूप' की 20 प्रतियां लेकर उन्हें गुरु नानक सिख मंदिर में ले आए। हालांकि, सरूप की छपाई में कोई गलती नहीं पाई गई और इन दोनों उग्रवादियों को प्रतियां वापस करने के लिए कहा गया था। लेकिन उन्होंने प्रतियों को वापस करने से साफ इनकार कर दिया था। जून में जत्थेदार अकाल तख्त की मलिक के घर की प्रस्तावित यात्रा ने भी निज्जर और बॉयल को परेशान कर दिया था। हालांकि, निज्जर ने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने सुझाव दिया है कि, मलिक की हत्या के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई हो सकती है और उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि, कनाडा सरकार को इस एंगल से जांच करनी चाहिए। सिख कट्टरपंथ में आईएसआई की संलिप्तता एक सर्वविदित तथ्य है और सुरक्षा एजेंसियां इन असत्यापित दावों की जांच कर सकती हैं।

भारत विरोधी गुट हो रहे हैं सक्रिय
इसी साल पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव से पहले भी भारत में खालिस्तानी कट्टरता की आहट फिर से सुनने को मिली थीं और रिपोर्ट्स मिल थीं, कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने खालिस्तानी एजेसियों को भारत में अस्थिरता फैलना की जिम्मेदारी दी है। वहीं, लिस्ट के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर हरविंदर सिंह संधू ऊर्फ रिंडा संधू को आईएसआई ने भारत को सीमावर्ती राज्य पंजाब में आतंकी हमलों को अंजाम देने का काम सौंपा था, ताकि संवेदनशील क्षेत्र में स्थिति को खराब किया जा सके। जबकि, मलिक की हत्या एक रहस्य बनी हुई है। हालांकि, कनाडा की पुलिस ने उस गाड़ी को खोज निकाला है, जिसके जरिए मलिक की हत्या की गई थी, लेकिन अभी भी हत्या के सुराग सुलझ नहीं पाए हैं। कनाडा पुलिस ने एक सीसीटीवी वीडियो भी जारी किया था, जिसमें एक सफेद रंग की होंडा सीआरवी को महिला की हत्या से कुछ देर पहले गुजरते देखा गया था।

भारत सरकार ने भी उठाए हैं कदम
वहीं, कनाडा में पैर पसार रहे खालिस्तानी आतंकवादी संगठन के खिलाफ भारत सरकार ने भी कदम उठाए हैं। पिछले साल नवंबर महीने में भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने औपचारिक रूप से कनाडा सरकार से 'सिख फॉर जस्टिस' नामक संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित करने का अनुरोध किया है। एनआईए ने ओटावा में अपने कनाडाई कानून प्रवर्तन समकक्षों के साथ बातचीत की और उन्हें एसएफआई के खिलाफ कई सारे सबूत और डोजियर सौंपे थे। जिसमें बताया गया था कि, इस संगठन को भारत सरकार ने क्यों प्रतिबंधित कर रखा है और भारत में, खासकर पंबाज में किस तरह से ये संगठन आतंकी वारदातों को अंजाम देना चाहता है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा एजेंसी एनएआई की तरफ से कनाडा सरकार से ये अपील पिछले साल की शुरूआत में की गई थी।

कितना खतरनाक है सिख फॉर जस्टिस
भारत सरकार 10 जुलाई, 2019 को खालिस्तान समर्थक संगठन दि सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) को इसकी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एसएफजे को गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक कानून के तहत प्रतिबंधित घोषित करने का फैसला किया गया था। खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस संगठन अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में बैठकर चलाया जाता है। इस संगठन को यूएपीए-1967 की धारा (1) के प्रावधानों के तहत गैर कानूनी घोषित किया गया था। एनआईए ने UAPA के तहत दाखिल चार्जशीट में सिख फॉर जस्टिस संगठन के कुल 16 सदस्यों को आतंकी घोषित किया गया था। इनमें नाम क्रमशः गुरपतवंत मान सिंह पन्नू, हरदीप सिंह निज्जर, परमजीत सिंह पम्मा, अवतार सिंह पन्नू, गुरप्रीत सिंह बागी, हरप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह, अमरदीप सिंह पुरेवाल, जे एस धालीवाल, दुपिंदरजीत सिंह, कुलवंत सिंह, हरजाप सिंह, जतिंदर सिंह ग्रेवाल, कुलवंत सिंह मोताथा और हिम्मत सिंह का नाम शामिल हैं। वहीं, कनाडा सरकार पर कई बार आरोप लग चुके हैं, कि वो अपने देश में भारत विरोधी ताकतों को रोकने की कोशिश नहीं कर रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी कई बार भारत विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में चुके हैं और आखिरी बार उन्होंने किसान आंदोलन पर बयान दिया था, जिसकी भारत ने निंदा की थी।












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