फैज से इमरान तक, पॉलिटिकल पार्टियों पर प्रतिबंध लगाने में कुख्यात है पाकिस्तान, इन पार्टियों पर लग चुका है बैन

Pakistan News: अपनी आजादी के 75 सालों में से आधे से ज्यादा समय में पाकिस्तान ने कई सैन्य समर्थित प्रतिष्ठानों को सत्ता में देखा है, जबकि इसकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारें अपने वैध कार्यकाल को पूरा करने के लिए संघर्ष करती रही हैं। पाकिस्तान में एक भी चुनी गई सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल को पूरा नहीं किया है।

लेकिन, पाकिस्तान में राजनीतिक पार्टियों पर हमेशा से कठोर कार्रवाई की जाती रही है। पिछले दिनों जेल में बंद इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट ने तोशाखाना मामले में बरी कर दिया और पाकिस्तान की एक अदालत ने उनकी शादी को अवैध ठहराने के फैसले को भी पलट दिया, जिसके बाद अब शहबाज शरीफ की सरकार ने उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

Shehbaz govt bans Imran Khan s party

पाकिस्तान में लंबे समय से ऐसे राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने का इतिहास रहा है और अब शहबाज शरीफ की सरकार ने संसद में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली राजनीतिक पार्टी पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। पाकिस्तान में 1954 से अब तक पांच राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

पाकिस्तान की कम्युनिस्ट पार्टी

जुलाई 1954 में पाकिस्तान की कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उसपर आरोप था, कि उसने 1951 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश की थी। मेजर-जनरल अकबर खान के नेतृत्व में कथित रूप से पूर्व सोवियत संघ द्वारा समर्थित इस असफल साजिश को रावलपिंडी षड्यंत्र मामले के रूप में जाना जाता है।

इस घटना के बाद जनरल अकबर, उनकी पत्नी, मशहूर शायद फैज अहमद फैज, दर्जनों सैन्य अधिकारी और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सैयद सज्जाद जहीर को गिरफ्तार कर लिया गया, उन पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया गया। मार्क्सवादी क्रांतिकारी जहीर ने मार्च 1948 में कलकत्ता में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की थी। प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद, पार्टी नेतृत्व और उसके कार्यकर्ताओं के साथ-साथ समर्थकों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

अवामी लीग

26 मार्च 1971 को तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल याह्या खान ने शेख मुजीबुर रहमान की अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया था। राष्ट्रपति ने इस घटनाक्रम की घोषणा करते हुए कहा था, कि "शेख मुजीबुर रहमान का असहयोग आंदोलन का कदम देशद्रोह का कृत्य है। उन्होंने और उनकी पार्टी ने तीन सप्ताह से अधिक समय तक वैधानिक प्राधिकरण की अवहेलना की है। उन्होंने पाकिस्तान के झंडे का अपमान किया है और राष्ट्रपिता की तस्वीर को अपवित्र किया है।

पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने आगे कहा था, कि "उन्होंने समानांतर सरकार चलाने की कोशिश की है। उन्होंने अशांति, आतंक और असुरक्षा पैदा की है। आंदोलन के नाम पर कई हत्याएं की गई हैं। पूर्वी पाकिस्तान में स्थित सशस्त्र बलों को हर तरह के ताने और अपमान का सामना करना पड़ा है।"

नेशनल अवामी पार्टी

नेशनल अवामी पार्टी (NAP) के वली खान गुट का गठन 1967 में मौलाना भशानी और अब्दुल वली खान के बीच मूल NAP में विभाजन के बाद हुआ था। बाद में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद वली खान गुट का नाम नेशनल अवामी पार्टी रखा गया। NAP को अपने आठ साल के लंबे अस्तित्व के दौरान दो बार प्रतिबंधित किया गया था, पहली बार 1971 में याह्या खान की सरकार के दौरान और दूसरी बार 1975 में जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार दौरान। इसके बाद इसे नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के नाम से इसे फिर से पुनर्जीवित किया गया, जिससे इसका नाम बदलकर अवामी नेशनल पार्टी कर दिया गया।

जय सिंध कौमी महाज-अरिसर

मई 2020 में, पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने सिंध में स्थित एक पार्टी जय सिंध कौमी महाज-अरिसर (JSQM-A) को दो कथित उग्रवादी समूहों - सिंधुदेश लिबरेशन आर्मी और सिंधुदेश रिवोल्यूशनरी आर्मी के साथ गैरकानूनी घोषित कर दिया। JSQM-A चीन की बेल्ट एंड रोड पहल की आलोचना करने के लिए प्रसिद्ध था।

तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान

पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने 15 अप्रैल 2021 को तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर प्रतिबंध लगा दिया। इसने फ्रांसीसी राजदूत को देश से बाहर निकालने के लिए हिंसक प्रदर्शन किया था, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों की हत्या इसके सदस्यों ने कर दी थी। घटना के बाद प्रांतीय सरकार ने तत्कालीन इमरान खान की सरकार से इस पार्टी पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था और बाद में इसपर आतंकवाद विरोधी अधिनियम 1997 के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया।

TLP ने प्रतिबंध हटाने के लिए 29 अप्रैल 2021 को एक समीक्षा याचिका दायर की। और प्रतिबंध के बावजूद, पार्टी को चुनावों में भाग लेने की अनुमति दी गई थी, क्योंकि इसे इलेक्शन कमीशन की लिस्ट से हटाया नहीं गया था। हालांकि, बाद में टीएलपी पर लगाए गये प्रतिबंध को हटा लिया गया।

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