Dunki: शाहरूख खान की डंकी से इमोशनल हुई जनता, जानिए आखिर कैसे अस्तित्व में आया पासपोर्ट?
Dunki Passports: हाल ही में रिलीज हुई शाहरुख खान-राजकुमार हिरानी की फिल्म 'डंकी' इमिग्रेशन के मुद्दे पर केंद्रित है और इस फिल्म को दर्शकों से काफी प्यार मिल रहा है। इस फिल्म का टाइटल उस डंकी यात्रा से लिया गया है, जिसके जरिए सैकड़ों भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक हर साल अमेरिका और पश्चिमी देश बसने के लिए जाते हैं।
डंकी मार्ग, जो काफी ज्यादा मुश्किलों से भरा, खतरनाक और जानलेवा होता है, फिल्म में उसी को लेकर कहानी बुनी गई है, क्योंकि डंगी मार्ग से यात्रा करने पर कानूनी परमिट की जरूरत नहीं होती है, सिर्फ उस देश में पहुंचने के बाद वहां की सरकार और अदालत को आश्वस्त करना होता है, कि वो भागकर क्यों पहुंचे हैं।

कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, डंगी मार्ग से अमेरिका पहुंचाने के लिए एजेंट्स 35 लाख से 40 लाख रुपये वसूलते हैं और 100 लोगों के ग्रुप से कम से कम 20 से 25 लोगों की मौत खतरनाक रास्ते में ही हो जाती है।
वहीं, जब लोग मैक्सिको की दीवाल कूदकर अमेरिका पहुंचते हैं, तो फिर वहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है और कोर्ट में पेश किया जाता है। अब भारत से ज्यादातर भागे लोग वहां कोर्ट में झूठ बोलते हैं, कि भारत में उनकी जान को खतरा है इसीलिए वो भागकर शरण लेने अमेरिका पहुंचे हैं।
अगर ऐसे लोग कोर्ट को विश्वास दिलाने में कामयाब हो जाते हैं, तो फिर उन्हें अमेरिका में रहने की इजाजत दे दी जाती है और अगर 15 से 20 सालों में उन्हें अमेरिका की नागरिकता मिल जाती है, लेकिन अगर वो कोर्ट को विश्वास दिलाने में नाकाम रहते हैं, तो फिर उन्हें वापस भारत भेज दिया जाता है।
ऐसे में उन्होंने एजेंट को जो लाखों रुपये दिए रहते हैं, वो बर्बाद हो जाता है।
आइये जानते हैं, कि पासपोर्ट की शुरूआत कैसे हुई?
पासपोर्ट, परमिट और पहचान के प्रमाण के रूप में कार्य करते हैं, जो एक देश के निवासियों को दूसरे देश की यात्रा करने की अनुमति देते हैं, और इसके समान दस्तावेज़ सदियों से मौजूद रहे हैं।
हिब्रू बाइबिल में, नहेमायाह की पुस्तक में कहा गया है कि लगभग 450 ईसा पूर्व में प्राचीन फ़ारसी राजा अर्तक्षत्र ने यरूशलेम में एक दूत भेजा था, लेकिन उसके साथ पत्र भी भेजे थे, जिसमें अन्य राज्यपालों से अनुरोध किया गया था, कि वे उसे अपनी यात्रा के दौरान सुरक्षित मार्ग प्रदान करें।
इसी तरह के दस्तावेज़ फ़्रांस और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में मौजूद थे। अपनी पुस्तक द पासपोर्ट: द हिस्ट्री ऑफ मैन्स मोस्ट ट्रैवल्ड डॉक्यूमेंट में, मार्टिन लॉयड लिखते हैं, "फ्रांस में, 'पासपोर्ट सिस्टम' 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से पहले अच्छी तरह से स्थापित किया गया था।
देश में एक शहर से दूसरे शहर तक यात्रा के लिए आंतरिक पासपोर्ट की भी आवश्यकता थी और विदेशी यात्राओं के लिए विदेशी पासपोर्ट की जरूरत होती थी।
उन्होंने कहा, कि फ्रांसीसी राज्य ने भी इस प्रणाली का उपयोग "कुशल श्रमिकों और पूंजी को जाने से रोकने और उपद्रवियों को आने से रोकने" के लिए किया था। इसके अलावा, फ्रांस जाने वाले एक विदेशी यात्री को अपना पासपोर्ट सरेंडर करना पड़ता था, जिसे उसके प्रवास की अवधि के लिए अस्थायी पासपोर्ट से बदल दिया जाता था।
मॉडर्न पासपोर्ट कैसे अस्तित्व में आया?
भारतीय विदेश मंत्रालय की पासपोर्ट सेवा वेबसाइट का कहना है, कि भारत में, "प्रथम विश्व युद्ध से पहले भारतीय पासपोर्ट जारी करने की कोई प्रथा नहीं थी।"
यह प्रथम विश्व युद्ध (1914 से 1918) के बाद स्थिति बदल गई, जब भारत की ब्रिटिश सरकार ने भारत रक्षा अधिनियम लागू किया। इसके तहत भारत छोड़ने और भारत आने के लिए पासपोर्ट रखना अनिवार्य कर दिया गया।
विश्व युद्धों ने पासपोर्ट को दूसरे देशों में भी देखे जाने के तरीके को बदल दिया, जिससे देशों को अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने और दुश्मन के रूप में देखे जाने वाले लोगों के प्रवेश को रोकने की आवश्यकता महसूस हुई।
साल 1914 में ब्रिटेन में पासपोर्ट को लेकर पहली बार सख्त नियम लागू किए गये। जिसमें पहली बार लिखा गया, कि किन लोगों को देश में आने की इजाजत दी जाएगी और किन्हें नहीं।
द गार्जियन में प्रकाशित लेख 'पासपोर्ट का संक्षिप्त इतिहास' के अनुसार, पहला आधुनिक पासपोर्ट इसी अधिनियम का एक प्रोडक्ट था। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए ऐसे दस्तावेज़ों की ज़रूरत नहीं होती थी। इसमें इसके धारक की विशिष्ट विशेषताएं थीं, जैसे "एक तस्वीर और उसका हस्ताक्षर, उनका रंग, आदि।"
इसके अलावा, पासपोर्ट में उस शख्स के नाक, आंख, माथा जैसे शारीरिक अंगों के बारे में भी जानकारी दी गई होती थी।
संयुक्त राष्ट्र केपहले बनाई गई संस्था, लीग ऑफ नेशंस ने भी 1920 में पासपोर्ट के माध्यम से यात्रा को विनियमित करने के मामले पर एक सम्मेलन आयोजित किया था। पासपोर्ट और सीमा शुल्क औपचारिकताओं पर सम्मेलन ने एक मानक प्रणाली की मांग की थी। यहीं से ब्रिटिश प्रणाली आम हो गई।
1920 के दशक में अमेरिका में नियम
1920 के दशक में अमेरिका जैसे देशों के पासपोर्ट पर कानून बने। यह वह समय था, जब देश में चीन और जापान से आप्रवासन बढ़ रहा था।
नेशनल ज्योग्राफिक के एक लेख में कहा गया है, कि "एक साल बाद, शायद एक राजनीतिक अवसर को पहचानते हुए, अमेरिका ने 1921 का आपातकालीन कोटा अधिनियम पारित किया और बाद में, आप्रवासियों के प्रवाह को सीमित करने वाला 1924 का आपातकालीन आप्रवासन अधिनियम पारित किया।
किसी आप्रवासी के मूल देश की पहचान कैसे करें? इसके लिए अमेरिका ने पासपोर्ट को अनिवार्य कर दिया।
और इसी तरह से धीरे धीरे दुनिया के सभी देशों ने पासपोर्ट सिस्टम को अपना लिया और वक्त के साथ पासपोर्ट को लेकर कई तरह के बदलाव किए गये और मॉडर्न पासपोर्ट बनकर हमारे सामने आया।
-
Pakistan Petrol Diesel Price: कंगाल पाकिस्तान में ₹335 का पेट्रोल! कितने रुपए में मिल रहा है एक LPG सिलेंडर -
New Labour Codes: नए श्रम कानून लागू होने से कंपनियों और कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा? Explainer में समझें -
Monalisa की शादी के 8 दिन बाद ये क्या हो गया? मुस्लिम पति पर बड़ा खुलासा, डायरेक्टर के बयान से मचा हड़कंप -
Delhi Riots: जिसने पूरी जिंदगी ईर्ष्या की, उसी के निकाह में 6 साल जेल काटकर पहुंचे Sharjeel Imam, दूल्हा कौन? -
Gold Silver Rate Crash: सोना ₹13,000 और चांदी ₹30,000 सस्ती, क्या यही है खरीदारी का समय? आज के ताजा रेट -
ईरान का गायब सुप्रीम लीडर! जिंदा है या सच में मर गया? मोजतबा खामेनेई क्यों नहीं आ रहा सामने, IRGC चला रहे देश? -
Love Story: बंगाल की इस खूबसूरत नेता का 7 साल तक चला चक्कर, पति है फेमस निर्माता, कहां हुई थी पहली मुलाकात? -
'मेरे साथ गलत किया', Monalisa की शादी मामले में नया मोड़, डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर लगा सनसनीखेज आरोप -
Strait of Hormuz में आधी रात को भारतीय जहाज का किसने दिया साथ? हमले के डर से तैयार थे लाइफ राफ्ट -
Uttar Pradesh Gold Price: यूपी में आज 22K-18K सोने का भाव क्या? Lucknow समेत 9 शहरों में कितना गिरा रेट? -
Hormuz Crisis: ईरान के खिलाफ 20 मजबूत देशों ने खोला मोर्चा, दे दी बड़ी चेतावनी, अब क्या करेंगे मोजतबा खामेनेई -
बिना दर्शकों के खेला जाएगा PSL, मोहसिन नकवी ने की 2 शहरों में आयोजन की घोषणा, किस वजह से लिया यह फैसला?












Click it and Unblock the Notifications