'...वो 7 मिनट का 'आतंक' जब थम गई थीं सासें', Mars Mission अहम रोल निभाने वाली लेडी साइंटिस्ट ने ऐसा क्यों कहा?
नासा ने आज से तीन साल पहले एक बड़ी कामयाबी हासिल की थी, जब रोवर ने मंगल की सतह पर कदम रखा था। हालांकि मार्स रोवर को मंगल की सतह पर उतारना बड़े मुश्किलों भरा काम था। इसके लिए साइंटिस्ट्स ने पानी की तरह पसीना बहाया। दिन रात एक कर दी। नासा के लैंडर टेरेन रिलेटिव को तैयार करने में भारतीय मूल की महिला स्पेस साइंटिस्ट डॉ. स्वाति मोहन का इस मिशन में बेहद अहम रोल रहा है। जब सारी दुनिया इस ऐतिहासिक लैंडिग को देख रही थी उस दौरान कंट्रोल रूम में बिंदी लगाए स्वाति मोहन जीएन एंड सी सबसिस्टम और पूरी प्रोजेक्ट टीम के साथ कॉरडिनेट कर रही थीं।
मिशन की सफलता के तीन साल बाद डॉ. स्वाति मोहन साझा किया जब मिशन की सफलता के अंतिम कुछ क्षण बचे थे और उनकी पूरी टीम सांसे थामे हुए अपने वर्षों की कल्पना की हकीकत में बदलते देखने लिए काम कर रही थी। मंगल ग्रह पर नासा की ओर से भेजे गए मिशन ने 203 दिन की यात्रा के बाद मार्स पर कदम रखा था। ग्रह पर रोवर के टचडाउन की पुष्टि स्पेस एजेंसी की टीम की बड़ी सफलता थी।

कौन हैं डॉ स्वाति मोहन?
डॉ मोहन ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने एयरोनॉटिक्स / एस्ट्रोनॉटिक्स में एमआईटी से एमएस और पीएचडी भी की है। नासा की वैज्ञानिक डॉ स्वाति तब सिर्फ एक साल की थीं जब वह भारत से अमेरिका गईं थी। उन्होंने अपना ज्यादातर बचपन उत्तरी वर्जीनिया-वाशिंगटन डीसी मेट्रो क्षेत्र में बिताया।
दोपहर 3:55 ने 4:02 के बीच थम गई थीं सांसें
डॉ. स्वाति कोलकाता प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुईं थी, जिसमें उन्होंने स्पेस मिशन को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि 203 दिन की यात्रा के बाद आखिरकार पर्सविरन्स नासा द्वारा भेजा गए अब तक के सबसे बड़े रोवर ने मंगल ग्रह की सतह को छू लिया। रोवर गुरुवार को दोपहर 3:55 बजे (पूर्वी अमेरिकी समय) लाल ग्रह पर उतरा। डॉ. मोहन ने बताया कि रोवर को मंगल की सतह पर उतारने के दौरान सात मिनट का समय सांसें थमा देने वाला था, लेकिन उसे सफलता पूर्वक सतह पर उतार लिया गया।












Click it and Unblock the Notifications