सीरिया: सीजफायर के बाद भी जारी है मौतों का सिलसिला, सात वर्षों में मारे गए हैं करीब पांच लाख लोग

सीरिया आज दुनिया के नक्‍शे पर एक ऐसा देश बन चुका है जिसका वजूद तो है लेकिन न के बराबर। पिछले सात वर्षों से यहां पर जो जंग चल रही है उसमें इस देश को दुनिया मिटाने की पूरी कोशिश हो रही है। कभी अपनी संस्‍कृति और विरासत के लिए मशहूर रहा सीरिया अब यहां पर हो रही मौतों की वजह से खबरों का हिस्‍सा है।

दमिश्‍क। सीरिया आज दुनिया के नक्‍शे पर एक ऐसा देश बन चुका है जिसका वजूद तो है लेकिन न के बराबर। पिछले सात वर्षों से यहां पर जो जंग चल रही है उसमें इस देश को दुनिया मिटाने की पूरी कोशिश हो रही है। कभी अपनी संस्‍कृति और विरासत के लिए मशहूर रहा सीरिया अब यहां पर हो रही मौतों की वजह से खबरों का हिस्‍सा है। मार्च 2011 में यहां पर मौत का तांडव शुरू हुआ था और मार्च 2018 तक जारी है। कई बार संयुक्‍त राष्‍ट्रसंघ (यूएन) की ओर से यहां पर सीजफायर का ऐलान किया गया लेकिन इस ऐलान का कभी कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे ही एक सीजफायर का ऐलान पिछले दिनों भी किया गया था। इस ऐलान के बाद 500 लोगों की मौत हुई जिसमें 127 बच्‍चे थे।

30‍ दिन का संघर्ष विराम लेकिन पांच घंटे बाद बरसे बम

30‍ दिन का संघर्ष विराम लेकिन पांच घंटे बाद बरसे बम

सीरिया में सरकार की ओर से पांच घंटे तक संघर्षविराम को रोकने के बाद फिर से बमबारी की जा रही है। सरकार और विद्रोहियों के बीच जारी बमबारी का सिलसिला थम नहीं रहा है और कई निर्दोष लोग अब तक मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की ओर से सीरिया में 30 दिनों के संघर्षविराम की मांग के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। रूस ने सीरिया की सरकार से अनुरोध किया था कि वह कुछ देर तक युद्ध को रोक दे ताकि नागरिक आसानी से निकलकर सुरक्षित जगहों पर पहुंच सकें। रविवार से जारी बमबारी में यहां पर 500 लोगों की मौत हो चुकी है जिसमें कई बच्‍चे भी शामिल हैं।

वर्ष 2011 में हुई थी शुरुआत

वर्ष 2011 में हुई थी शुरुआत

18 मार्च 2011 को सीरिया के शासक बशर अल असद के खिलाफ विरोध प्रदशर्न शुरू हुए थे। असद ने वर्ष 2000 में अपने पिता की मौत के बाद शासन संभाला था। उनके पिता ने सीरिया पर 30 वर्ष तक शासन किया था।सीरिया में इस समय कुर्दिश सेना, आईएसआईएस, जैश अल फतह और असद की सेना वॉर में शामिल है। मई 2011 में अमेरिका ने सीरिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिका में स‍ीरिया की सरकार की संपत्ति को भी बैन कर दिया गया। वर्ष 2014 में सीरिया में तीन वर्षों के बाद चुनाव हुए। इन चुनावों में राष्‍ट्रपति और शासक बशर अल असद को 88.7% वोट्स के साथ दोबारा शासक लोगों ने चुना।

भुखमरी के हालात

भुखमरी के हालात

साथ ही साीरिया में किसी भी तरह के अमेरिकी निवेश को भी रोक दिया। इसकी वजह से सीरिया में मुश्किलें बढ़ती ही गईं। सीरिया में तेल का निर्यात इस देश की आय का सबसे बड़ा स्‍त्रोत है। लेकिन यूरोपियन यूनियन ने जब इसे बैन किया सीरिया में भूखमरी के हालात पैदा हो गए।

एक वर्ष में 8,000 की मौत

एक वर्ष में 8,000 की मौत

वर्ष 2012 में जब सीरिया के सिविल वॉर ने एक वर्ष पूरा कर लिया तो यूनाइटेड नेशंस की ओर से आंकड़ें जारी किए गए। इन आंकड़ों के मुताबिक सीरिया में जारी वॉर की वजह से करीब 8,000 लोगों की मौत एक वर्ष में हुई। वहीं एक्टिविस्‍ट्स का कहना था कि यह संख्‍या 10,000 से ज्‍यादा है।

कितनी मौतें और कितनों ने छोड़ा घर

कितनी मौतें और कितनों ने छोड़ा घर

23 अप्रैल 2016 को यूनाइटेड नेशंस और अरब लीग की ओर से जो आंकड़ें जारी किए गए थे उनके मुताबिक सीरिया में 346,612 से लेकर 481,612 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां पर सबसे ज्‍यादा संख्‍या में बच्‍चों की मौत हुई है। वहीं सीरिया के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 400,000 लोग युद्ध में मारे गए हैं। 4.1 मिलियन ने छोड़ा देश सितंबर 2015 तक करीब 4.1 मिलियन लोगों ने अपना देश छोड़ दिया, 6.5 मिलियन लोगों को देश के अंदर ही कहीं विस्‍थापित किया गया। इस समय दुनिया हर पांच में से एक विस्‍थापित व्‍यक्ति सीरियन है।

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