सर्बिया ने कोसोवो सीमा पर भेजे लड़ाकू विमान, नाटो हुआ अलर्ट, जानिए क्यों चल रहा वर्षों से विवाद?
बेलग्रेड के अधिकारियों ने दावा किया है कि कोसोवो-सर्बिया सीमा पर सर्बियाई सेना को बैरकों और सुरक्षित ठिकानों का निरीक्षण करते हुए कुछ संदिग्ध ड्रोन दिखाई दिए हैं।
सर्बिया ने कोसोवो की सीमा पर उन्नत हथियारों से लैस अपनी सेना भेज दी है, इससे यूरोपीय इलाके में जंग का खतरा मंडराने लगा है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में नजर आ रहा है कि सर्बिया ने बड़े पैमाने पर अपनी सेना को कोसोवा की सीमा पर भेजा है। यह तनाव ऐसे समय पर बढ़ा है जब कोसोवो की सरकार ने सर्बिया के लोगों के खिलाफ कई नए प्रतिबंध लगाए हैं। यूक्रेन जंग के बीच जहां यूरोपीय देश रूस और चीन से किनारा कर रहे हैं, वहीं सर्बिया इन दोनों ही देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है।
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आईडी कार्ड और लाइसेंस को लेकर भी हुआ था विवाद
सर्बिया और कोसोवो यह विवाद इस साल गर्मियों में उस समय बढ़ गया जब कार प्लेट और आईडी कार्ड को लेकर सर्बिया की देखादेखी कोसोवो ने नई शर्त रख दी थी। कोसोवो की नीतियों से सर्बिया के लोग भड़क उठे। दरअसल कोसोवा के उत्तरी इलाके में हजारों की संख्या में सर्बियाई लोग रहते हैं। वहीं, सर्बिया की सरकार भी कोसोवा के नियम को लेकर बुरी तरह नाराज हो गई थी। हालांकि कुछ समय के लिए इस नियम पर कोसोवो ने रोक लगा दी थी।

राष्ट्रपति ने सेना भेजने का दिया आदेश
इस बीच बेलग्रेड के अधिकारियों ने दावा किया है कि कोसोवो-सर्बिया सीमा पर सर्बियाई सेना को बैरकों और सुरक्षित ठिकानों का निरीक्षण करते हुए कुछ संदिग्ध ड्रोन दिखाई दिए हैं। इसके बाद सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने देश के लड़ाकू विमानों को इन ड्रोनों को रोकने का आदेश दिया है। सार्वजनिक प्रसारक आरटीएस ने बताया कि युद्धक विमानों के अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ड्रोन सर्बियाई हवाई क्षेत्र से चले गए। सर्बियाई प्रधानमंत्री एना ब्रनाबिक ने मंगलवार शाम को आरटीएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि ड्रोन को सीमा के सर्बियाई हिस्से और दो बैरकों में एक सैन्य स्थिति का निरीक्षण करते हुए देखा गया था। पीएम ब्रनाबिक ने कहा, "अगर ये चीजें होती रहती हैं, तो हम किसी भी अन्य देश की तरह ऐसे किसी भी विमान को मार गिराएंगे।" हालांकि ड्रोन देखे जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

2008 में सर्बिया ने किया आजादी का ऐलान
यूगोस्लाविया से अलग होकर कुल छह देश बने थे। इन देशों से एक सर्बिया भी एक था। मगर इसी देश का हिस्सा रहा सर्बिया ने कोसोवो से अलग रहना चुना और अलग देश की मांग करने लगे। इसके बाद देश में 1990 के दशक में खूनी जंग शुरू हो गया। साल 2008 में कोसोवो ने आजादी का ऐलान कर दिया। सर्बिया की सरकार ने इस आजादी के ऐलान को अस्वीकार कर दिया। सर्बिया, कोसोवो को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता है। सर्बिया का कहना है कि यह स्वतंत्रता का ऐलान अवैध है।

नाटो के सैनिक सर्बिया में हैं तैनात
2010 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि कोसोवो की सर्बिया से आजादी की घोषणा अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं है। कोसोवो की आंशिक स्वतंत्रता की वजह से यह न तो अभी न तो संयुक्त राष्ट्र और न ही नाटो का सदस्य देश है। हालांकि नाटो ने जून 1999 से ही अपने 3770 सैनिकों को शांति मिशन के लिए तैनात कर रखा है। संयुक्त राष्ट्र के 192 सदस्य देशों में से 69 देशों ने कोसोवो को एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी हुई है जिनमें अमरीका, ब्रिटेन, यूरोप के कई देश और कोसोवा का पड़ोसी देश अल्बेनिया और क्रोएशिया शामिल हैं। जबकि रूस, चीन, भारत, स्पेन, ग्रीस,और बोस्निया जैसे कई देश कोसोवो की स्वतंत्रता को मान्यता नहीं देते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों की मान्यता के कारण सब्रिया को यूरोपीय संघ से अपर हैंड मिलता रहा है और नाटो की सेना भी उसकी मदद करती रही है।












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