भूकंप में मददगार भारत को तुर्की ने दिया धोखा, कश्मीर मुद्दे पर दे दिया पाकिस्तान का साथ
भारत ने UNHRC में तुर्की के पाकिस्तान का साथ देने पर नाराजगी जताई है। भारत ने सलाह देते हुए कहा कि तुर्की हमारे आंतरिक मामले में बयान देने से बाज आए।

भूकंप से तड़प रहे तुर्की को जिस भारत ने ऑपरेशन दोस्त के जरिए मानवीय सहायता पहुंचाई तुर्की ने उसी को धोखा दे दिया। दरअसल, तुर्की हर बार की तरह इस बार भी यूएनएचआरसी में पाकिस्तान का साथ देने से बाज नहीं आया और जम्मू -कश्मीर का मुद्दा उठाकर एक तरह से भारत की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया। तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में आरोप लगाया कि भारत जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। भारत लोगों की मानवाधिकार की रक्षा नहीं कर रहा है।
भारत ने तुर्की को दिया करारा जवाब
वहीं तुर्की के बयान पर भारत ने भी करारा जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि सीमा पूजानी(Seema Pujani) ने तुर्की के बयान पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि तुर्की को हमारे आंतरिक मामलों पर अवांछित टिप्पणी करने से बचना चाहिए। कश्मीर पर तुर्की की टिप्पणी भारत द्वारा भूकंप प्रभावित राष्ट्र को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए 'ऑपरेशन दोस्त' शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद आई है।
भारत ने पाकिस्तान को भी लताड़ा
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव सीमा पूजानी ने अहमदिया समुदाय, ईसाइयों, हिंदुओं और सिखों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को लेकर पाकिस्तान को भी करारा जवाब दिया। पूजानी ने क्रूर नीति के लिए पाकिस्तान की आलोचना की जिसने बलूचिस्तान प्रांत और अन्य स्थानों पर रहने वाले लोगों को प्रभावित किया है।
पुजानी ने अहमदिया समुदाय की दुर्दशा पर जोर दिया और कहा कि अहमदिया समुदाय को पाकिस्तान में केवल अपने विश्वास का पालन करने के लिए सताया जा रहा है। यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट हासिल करने के लिए भी समुदाय को अपने संस्थापक की निंदा करनी पड़ती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में ईसाई समुदाय के साथ किया जाने वाला व्यवहार भी उतना ही निंदनीय है। यह अक्सर क्रूर ईशनिंदा कानूनों के माध्यम से लक्षित होता है। ईसाई समुदाय की कम उम्र की लड़कियों को उदासीन न्यायपालिका द्वारा इस्लाम में परिवर्तित किया जाता है।












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