SCO Summit: भारत पहली बार कर रहा SCO शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता, जानें कैसे करता है पूर्व और पश्चिम को संतुलित

SCO Summit 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के आभासी शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत एससीओ के बाकी सदस्य देशों के राष्ट्रध्यक्ष भी शामिल हो रहे हैं।

चीन और रूस के साथ साथ पाकिस्तान ने भी पुष्टि कर दी है, कि उनके राष्ट्राध्यक्ष एससीओ शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। इस शिखर सम्मेलन के दोपहर 12.30 बजे शुरू होने और लगभग 3 बजे समाप्त होने की उम्मीद है। पहले एससीओ शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से होने वाला था, लेकिन जून की शुरुआत में योजना बदल दी गई और वर्चुअल शिखर सम्मेलन ही कराने का फैसला लिया गया।

SCO Summit

भारत कर रहा है एससीओ की अध्यक्षता

भारत के नजरिए से, एससीओ के मंच के जरिए, भारत पश्चिम और पूर्व के देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना है। भारत इसी साल सितंबर में जी20 देशों की भी मेजबानी कर रहा है। लिहाजा, उससे पहले एससीओ शिखर सम्मेलन का महत्व भारत के लिए काफी ज्यादा बढ़ जाता है।

एससीओ, नई दिल्ली के लिए मध्य एशिया के साथ अधिक गहराई से जुड़ने का एक मंच भी है।

रैंड कॉरपोरेशन के इंडो-पैसिफिक विश्लेषक डेरेक ग्रॉसमैन ने कहा, कि "भारत इस प्रकार की विदेश नीति में गौरवान्वित होता है, जहां वह एक ही समय में सभी के साथ समान और संतुलिच व्यवहार करता है।" उन्होंने कहा, कि "भारत की विदेश नीति में कोई भी दुश्मन नहीं है।"

पर्यवेक्षकों का कहना है, कि नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में अपने हितों को सुरक्षित करने की कोशिश करेगी। यह संभवतः "सीमा पार आतंकवाद" से लड़ने की आवश्यकता पर जोर देगा, जिसमें पाकिस्तान पर कटाक्ष होगा। भारत इस मंच के जरिए पाकिस्तान पर प्रेशर बनाने की कोशिश करेगा, कि वो सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाए।

इसके अलावा, भारत क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने की आवश्यकता पर भी जोर दे सकता है, जिसमें भारत का इशारा चीन की तरफ होगा, जिसके साथ लगातार सीमा विवाद चल रहा है। भारत और चीन के बीच पिछले तीन साल से तीव्र गतिरोध चल रहा है, जिसमें पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में विवादित सीमा पर हजारों सैनिक तैनात हैं।

एससीओ की भारत की अध्यक्षता में कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण गतिविधियाँ देखी गईं।

भारत की अध्यक्षता के दौरान, एससीओ व्यापक क्षेत्रों में अपने जुड़ाव और बातचीत की गहराई और तीव्रता में नए मील के पत्थर तक पहुंच गया है। 'SCO- SECURE' की भारत की अध्यक्षता का विषय है, जो साल 2018 में एससीओ क़िंगदाओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संक्षिप्त भाषण से लिया गया है।

इसका मतलब है, S- से सुरक्षा, E से आर्थिक विकास, C से कनेक्टिविटी, U से एकता, R से संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान, E से पर्यावरण संरक्षण।

इसके अलावा, नई दिल्ली ने एससीओ में सहयोग के लिए पांच नए स्तंभ बनाए हैं। ये पांच स्तंभ हैं, (1) स्टार्टअप और नवाचार, (2)पारंपरिक चिकित्सा, (3) डिजिटल समावेशन, (4) युवा सशक्तिकरण और (5) साझा बौद्ध विरासत।

स्टार्टअप और इनोवेशन पर विशेष कार्य समूह और पारंपरिक चिकित्सा पर विशेषज्ञ कार्य समूह भारत की पहल पर ही बनाए गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के मूल मंत्र वसुधैव कुटुंबकोम (दुनिया एक परिवार है) के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए, लोगों से लोगों के बीच अधिक जुड़ाव बनाने पर जोर दिया है।

आपको बता दें, कि एससीओ के साथ भारत का जुड़ाव एक पर्यवेक्षक देश के रूप में 2005 में शुरू हुआ। यह 2017 में अस्ताना शिखर सम्मेलन में एससीओ का पूर्ण सदस्य देश बन गया।

भारत ने एससीओ और उसके आरएटीएस के साथ अपने सुरक्षा-संबंधी सहयोग को गहरा करने में गहरी रुचि दिखाई है, जो विशेष रूप से सुरक्षा और रक्षा से संबंधित मुद्दों से संबंधित है।

भारत एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा, कि पिछले छह वर्षों में, भारत ने एससीओ की गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में "बहुत सक्रिय और रचनात्मक भूमिका" निभाई है। सितंबर 2022 में, भारत ने पहली बार समरकंद शिखर सम्मेलन में उज्बेकिस्तान से एससीओ की अध्यक्षता संभाली थी।

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